हर साल जनवरी को सर्वाइकल हेल्‍थ अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। ऐसा इसलिए ताकि महिलाओं को सर्वाइकल हेल्‍थ के बारे विस्‍तार से जानकारी दी जाए।  TOI में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में, सर्वाइकल कैंसर के कुल मामलों में एक चौथाई भारत का योगदान था। 30 से 69 वर्ष की महिलाओं में इस कैंसर के चलते भारत में 17 प्रतिशत मौतें हुई। यह अनुमान है कि भारत में हर 53 महिलाओं में से 1 को सर्वाइकल कैंसर का अनुभव होता है, जबकि विकसित देशों में इसकी संभावना 100 में 1 है।

देश में सर्वाइकल कैंसर के रोगियों में वृद्धि की खतरनाक दर और मौतों के बावजूद, इस बीमारी के लिए सरकार द्वारा तैयार कोई स्क्रीनिंग प्रोग्राम नहीं है। और आज भी महिलाएं इस बारे में बिल्‍कुल भी जागरूक नहीं है। अगर यह सर्वाइकल कैंसर वैक्‍सीन लगवाने के लिए पर्याप्त कारण है, तो यहां कुछ और कारण दिए गए हैं जिन्‍हें जानने के बाद आप इसे जरूर लगवाना चाहेंगी। 

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एक्‍सपर्ट की राय

अर्चना धवन बजाज, कंसल्टेंट ऑब्स्टीट्रीशियन, गायनेकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ एक्सपर्ट, नर्चर आईवीएफ दिल्ली बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर यूटरस के मुंह का कैंसर है, जो भारतीय महिलाओं को बहुत ज्‍यादा परेशान करता है। जी हां ये ऐसी बीमारी है, जो कि यूटरस में सेल्‍स की अनियमित वृद्धि होने के कारण होती है। सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) की वजह से होता है। एचपीवी कई तरह के होते हैं, जिनमें से कुछ ही सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारकों में एचपीवी इंफेक्शन, स्मोकिंग, बार-बार होने वाली प्रेग्‍नेंसी, एक से ज्यादा सेक्सुअल पार्टनर और परिवार में सर्वाइकल कैंसर का इतिहास आदि शामिल है। 

cervical cancer vaccine inside

अर्चना धवन बजाज का कहना हैं कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से बचाव करना सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए जरूरी है। और सर्वाइकल वैक्‍सीन लगवाने से इस वायरस को रोका जा सकता है।सर्वाइकल कैंसर का इंजेक्‍शन 10 साल की उम्र की लड़की से लेकर 45 साल की उम्र तक ही हर महिला को लगवाना चाहिए। इस वैक्‍सीन के आपको तीन डोज दिए जाते हैं, पहला वैक्‍सीन लगवाने के बाद आपको अगले महीने दूसरा वैक्‍सीन लगवाना होता है और तीसरा वैक्‍सीन आपको 6 महीने के बाद लगाया जाता है।

वैक्‍सीन है प्रभावी

बात जब चिकन पॉक्‍स जैसी बीमारियों के बारे में होती है, तो वैक्‍सीन में आप विश्‍वास करती हैं लेकिन जब बात कैंसर जैसी बड़ी बीमारी की आती हैं तो आपको वैक्‍सीन के प्रभावी होने पर बिल्‍कुल भी यकीन नहीं होता है। हालांकि, एक रिसर्च ने साबित किया है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के खिलाफ महिलाओं को वैक्‍सीन लगवाना बेहद असरदार हो सकता है। 

भारतीय महिलाओं में है हाई रिस्‍क

जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं कि भारत में प्रत्येक 53 महिलाओं में से 1 और अन्य विकसित देशों में सौ में से 1 को सर्वाइकल कैंसर का अनुभव होने की संभावना होती है। देश में महिलाएं अधिक जोखिम में हैं इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

यह रोकथाम है, इलाज नहीं है

अगर आप पहले से ही एचपीवी से प्रभावित हैं, तो वैक्‍सीन का असर बहुत कम या बिल्‍कुल नहीं होता है। वैक्‍सीन मौजूदा एचपीवी इंफेक्‍शन को ठीक नहीं कर सकता है। इंफेक्‍शन के संपर्क में आने से पहले वैक्‍सीन लगवाना बेहतर होता है। इसलिए 10 साल की उम्र की बाद की हर लड़की को इसे लगवाना चाहिए।

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कोई साइड इफेक्‍ट नहीं

वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। हां इंजेक्‍शन लगाने के बाद कुछ महिलाओं की उस जगह की स्किन थोड़ी लाल या मामूली सूजन हो सकती हैं। या किसी-किसी को इंजेक्‍शन लगाने पर चक्कर आना, मतली या उल्टी हो सकती है। हालांकि ये कोई बड़ा साइड इफेक्‍ट नहीं है कि आपको वैक्‍सीन लगवाने पर विचार करना चाहिए।

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बहुत जरूरी है पैप स्‍मीयर टेस्‍ट

बहुत कम महिलाएं पैप टेस्‍ट के बारे में जानती हैं। लेकिन हर महिला को 21 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार पैप स्‍मीयर टेस्‍ट करवाना चाहिए। चाहे उन्‍होंने इंजेक्‍शन लगवा लिया हो तब भी। हालांकि वैक्‍सीन बहुत ज्‍यादा जरूरी है लेकिन पैप स्‍मीयर टेस्‍ट करवाना भी उतना ही जरूरी है। अगर आपने अभी  तक सर्विकल कैंसर वैक्सीन नहीं लगवाया है तो रेगुलर पैप टेस्ट जरूर करवाएं। इससे किसी भी तरह के लक्षण दिखते ही आप खुद का सही दिशा में बचाव कर सकती हैं।
अगर आपने अभी तक सर्वाइकल कैंसर वैक्‍सीन नहीं लगवाया है तो इतनी जानकारी के बाद शायद आप आज ही इसे लगवाने पर विचार करेंगी।

 

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