प्रेग्नेंसी में क्यों करवाना चाहिए NextGen NIPT टेस्ट, जानिए एक्सपर्ट की राय

मेट्रोपोलिस हेल्‍थकेयर की तरफ से प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए एक बेहतरीन टेस्ट ऑफर किया जा रहा है जो उन्हें बच्चे की सेहत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देता है।

 

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प्रेग्नेंसी महिलाओं के जीवन का एक नाजुक चरण होता है, और होने वाले माता-पिता हर स्तर पर सावधान रहना चाहते हैं। जब भी हम प्रेग्नेंसी और उससे जुड़े टेस्ट्स की बात करते हैं तो Metropolis की सर्विस को काफी पसंद किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर प्रशिक्षित कर्मचारियों और सक्षम डॉक्टर्स सहित आधुनिक लैब्स और उपकरण हैं जो सटीक रिजल्ट देने में मदद करते हैं। मेट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर एक लीडिंग हेल्थ केयर प्रोवाइडर है जिसने अब NextGen NIPT (NextGen) टेस्ट पेश किया है। ये एक तरह का जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट है जिसका प्रोसेस काफी आसान है और इससे सटीक रिजल्ट सामने आते हैं।

मोट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर आपको ऐसे जेनेटिक टेस्ट करवाने की सुविधा देता है जिनकी मदद से नतीजे जल्दी और सटीक मिलते हैं। मेट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर में टेस्ट के रेट भी बाकियों की तुलना में ज्यादा बेहतर हैं। Nextgen NIPT और अन्य जेनेटिक टेस्ट्स किसी वरदान से कम नहीं हैं क्योंकि ये आपको सबसे एक्युरेट रिजल्ट देते हैं। इससे आप बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के बारे में सही तरह से जान सकते हैं।

क्या है Nextgen NIPT?

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एनआईपीटी- नॉन इनवेसिव प्रीनेटल टेस्ट बाकी जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट की तुलना में थोड़ा अलग है जिसमें दर्द और मिस्कैरेज का रिस्क नहीं होता। ये टेस्ट पूरी तरह से सुरक्षित है जिसमें मां और होने वाले बच्चे दोनों में से किसी को भी कोई खतरा नहीं होता है। जहां तक एनआईपीटी का सवाल है तो ये ब्लड सैंपल लेकर किया जाता है और इसका नतीजा ही बताता है कि आगे क्या एक्शन लिया जा सकता है।

इस टेस्ट को एक नॉन-इन्वेसिव तरीके से किया जाता है जिससे मां के शरीर में कोई परेशानी नहीं होती और फीटस की सुरक्षा को किसी तरह का खतरा नहीं होता है।

कैसे काम करता है NextGen NIPT टेस्ट?

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जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट मेथड ने बहुत ज्यादा तेज़ी से विकास किया है और सैम्पल कलेक्शन के प्रोसेस को काफी आसान बना दिया है जिससे फीटस की सुरक्षा में कोई कमी ना रह जाए। 1970 और 80 के दशक में इन्वेसिव स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक टेस्ट्स खासतौर पर सीवीएस और एम्नियोसेंटेसिस इस दौरान शुरू हुए थे और उनमें बच्चे को कम ही सही लेकिन गंभीर खतरा रहता था। (स्‍वस्‍थ प्रेग्‍नेंसी के लिए जरूरी टेस्‍ट्स)

मेडिकल प्रोफेशनल्स ने पाया कि अगर बच्चा पैदा करने वाली महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा है तो बच्चे में असामान्य लक्षण दिखने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए क्वाड टेस्ट (Quad test), एफटीआरए टेस्ट (first trimester risk assessment) और अल्ट्रासाउंड आदि टेस्ट बनाए गए और इनके साथ अन्य कई स्क्रीनिंग तकनीकें आईं।

आगे चलकर जैसे-जैसे वैज्ञानिक विकास हुआ वैसे ही एनआईपीटी टेस्ट की शुरुआत भी हुई। जैसा कि नाम बता रहा है ये टेस्ट नॉन-इन्वेसिव टेस्ट है जो मां के सीरम में फीटस की सेल्स का बायोमार्कर टेस्ट करता था। इसके बाद आया NextGen NIPT जिसे मेट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर द्वारा इजाद किया गया है। इस टेस्ट में सबसे ज्यादा सटीक नतीजे मिलते हैं और फॉल्स-निगेटिव रेट्स नहीं मिलते हैं। ये आसान है, सटीक है और इसमें खतरा भी कम है जिससे आपको 99% से ज्यादा सही नतीजे मिलते हैं।

इसे भी पढ़ें:मां और बच्चे दोनों के लिए क्यों जरूरी है मैटरनल स्क्रीनिंग टेस्ट्स?

क्या आप NextGen NIPT के बारे में और जानना चाहते हैं?

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दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटा (नाल) से डीएनए या फिर सेल फ्री डीएनए के फ्रेगमेंट निकलते हैं जो फीटस के होते हैं। आमतौर पर, ये मां की ब्लडस्ट्रीम में बहुत ही कम मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन एनआईपीटी टेस्ट द्वारा इन्हें आइडेंटिफाई किया जा सकता है। जो डीएनए सीक्वेंसिंग होती है वो ब्लडस्ट्रीम के सैंपल के जरिए ही की जाती है। इसके आगे एनालिसिस और क्लीनिकल टेस्ट्स के जरिए नतीजे निकाले जाते हैं।

एनआईपीटी की मदद से ये पता लगाया जाता है कि कहीं बच्चे में कोई जेनेटिक कमी या फिर असमानता तो नहीं है। इसका पता प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में ही लगा लिया जाता है। ये प्रेग्नेंसी के 10वें हफ्ते के बाद से करवाया जा सकता है।(एम्नियोसेंटेसिस क्या है और प्रेग्‍नेंसी में क्‍यों किया जाता है?)

अगर वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो फीटस में जो स्टैंडर्ड क्रोमोसोम का नंबर होता है वो 23 जोड़ी मतलब 46 होता है और अगर इनमें कोई भी बदलाव होता है तो उसे एन्युप्लोइडी (Aneuploidy) कहा जाता है। अगर किसी सैम्पल में Aneuploidy दिखती है तो इसका मतलब की क्रोमोसोम का नंबर असामान्य है। उदाहरण के तौर पर- ट्राइसोमी 21 में डाउन सिंड्रोम, ट्राइसोमी 13 में पटाऊ सिंड्रोम, ट्राइसोमी 18 में एडवर्ड सिंड्रोम और सेक्स क्रोमोसोम्स असमानताएं, यह पहचानने में महत्वपूर्ण है कि क्या बच्चा पहले से ही इनमें से किसी जीवन के लिए खतरनाक अनुवांशिक विकार (जेनेटिक डिसऑर्डर) से गुजर रहा है।

मेट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर में नेक्सटजेन (Nextgen) सीक्वेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, और ये टेस्ट अत्यधिक सटीक परिणाम लाता है, तब भी अगर मां के ब्लड सीरम में cfDNA अमाउंट 3.5 % फीटल फ्रैक्शन ही हो।

किसे करवाना चाहिए Nextgen NIPT टेस्ट?

कोई भी प्रेग्नेंट महिला जो कम से कम 10 हफ्ते की प्रेग्नेंसी पूरी कर चुकी हो, जिसे एक ही या फिर जुड़वां बच्चों के बारे में पता हो वो एनआईपीटी टेस्ट करवा सकती है। खासतौर पर इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर प्रीनेटल डायग्नोसिस (ISPD) का सुझाव है कि एनआईपीटी बिल्कुल सही है और इसे सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को बतौर प्राइमरी स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए।

किसे नहीं करवाना चाहिए एनआईपीटी?

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  • कुछ ऐसी भी महिलाएं होती हैं जिनके लिए एनआईपीटी टेस्ट के नतीजे सही नहीं निकल पाएंगे, जैसे-
  • ऐसे मरीज जिन्होंने पहले ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाया हो
  • स्टेम सेल थेरेपी या फिर इम्यूनोथेरेपी करवा चुके या करवा रहे मरीज
  • ऐसे मरीज जिनका पिछले 12 महीने में ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ हो
  • ऐसे मरीज जिन्हें ट्राइसोमी हो
  • कैंसर से जूझ रहे मरीज

क्या होगा अगर एनआईपीटी पॉजिटिव होगा?

पहले तो ये बता देते हैं कि नेक्सजेन एनआईपीटी स्क्रीनिंग टेस्ट एक तरह का स्क्रीनिंग टेस्ट है और डायग्नोस्टिक टेस्ट नहीं। अगर ये पॉजिटिव आता है तो इसका मतलब बच्चा किसी तरह की जेनेटिक असमानता से पीड़ित है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो आपको इसके आगे डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाने की जरूरत पड़ेगी और आप अपने गायनेकोलॉजिस्ट से इसके बारे में सलाह ले सकते हैं।

मेट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर कई तरह की आनुवंशिक नियंत्रण सेवाएं भी ऑफर करता है जहां एक्सपर्ट डॉक्टर्स होने वाली मां को प्री और पोस्ट जेनेटिक टेस्ट काउंसलिंग दे सकते हैं।

मेट्रोपोलिसहेल्‍थकेयर में बहुत बड़ा जेनेटिक टेस्टिंग मेन्यू है जिसमें पुष्टिकारक डायग्नोस्टिक टेस्ट्स जैसे कार्योटाइपिंग, क्रोमोसोमल माइक्रोएरे, FISH आदि शामिल हैं। ये परीक्षण एमनियोटिक द्रव और सीवीएस जैसे नमूनों पर किए जाते हैं जो इन्वेसिव प्रोसीजर एमनियोसेंटेसिस और कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग द्वारा निकाले जाते हैं जिसमें गर्भपात का थोड़ा जोखिम होता है।

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आखिर क्यों नेक्स्टजेन एनआईपीटी टेस्ट बाकी टेस्ट्स से बेहतर है इसे संक्षेप में कहना हो तो-

  • इस टेस्ट में गर्भपात का कोई खतरा नहीं होता है।
  • ये एक पर्सनलाइज टेस्ट है जिसमें मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का ध्यान रखा जाता है।
  • इसमें बहुत कम मात्रा में ब्लड सैम्पल की जरूरत होती है।
  • सभी ऑटोसोम्स (क्रोमोसोम 1-22) और सेक्स क्रोमोसोम्स में aneuploidies के जोखिम की रिपोर्ट करता है।
  • 99% सटीक रिपोर्ट होती है जिससे दोबारा टेस्ट करवाने या फिर गलत नतीजे आने की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
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मेट्रोपोलिस हेल्‍थकेयर मरीजों को साइंटिफिक टेस्टिंग, अत्यधिक योग्य और अनुमोदित टेस्टिंग के तरीकों, परीक्षणों और स्क्रीनिंग प्रोफाइल की विस्तृत श्रृंखला, अच्छी तरह से सुसज्जित प्रयोगशाला और अप्रूव्ड और मानकीकृत उपकरण और उच्च गुणवत्ता वाले प्रयोगशाला कर्मचारियों द्वारा सटीक नतीजे देने का आश्वासन देता है।

सोर्स-

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3893900/

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https://www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/aneuploidy

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