हिंदूओं में हाथ जोड़ने और नमस्‍कार करने की कई धार्मिक विशेषताएं हैं, साथ ही इसे सेहत से जोड़कर भी देखा जाता है। खासतौर पर योगा लवर्स के बीच सूर्य नमस्‍कार का विशेष महत्‍व है। सूर्य नमस्‍कार कई तरह के योगासनों से मिलकर बना एक योगासन है। इसी तरह योगा में पश्चिम नमस्कार आसन के भी बहुत लाभ बताए गए हैं। इसे अंग्रेजी में रिवर्स प्रेयर पोज भी कहा जाता है। जिस तरह सूर्य नमस्‍कार में दोनों हाथों को जोड़ कर आगे की ओर नमस्‍कार किया जाता है, वहीं पश्चिम नमस्कार आसन में पीठ की ओर हाथों को जोड़ कर नमस्‍कार किया जाता है। 

यह योगासन कई तरह से सेहत को फायदे पहुंचाता है। तो चलिए आज हम आपको पश्चिम नमस्कार आसन के बारे में बताते हैं। 

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पश्चिम नमस्कार आसन के फायदे 

  • अगर आपके कंधे जाम हो गए हैं और उनके मूवमेंट में आपको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो आपके लिए यह आसन बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इतना ही नहीं, अगर आप के कंधे नाजुक हैं और अक्‍सर ही हल्‍के से स्‍ट्रेच के बाद उनमें दर्द होने  लगता है या फिर उनके मूवमेंट में दिक्‍कत आती है तो आपको 'पश्चिम नमस्कार आसन' रोज करना चाहिए। 
  • 'पश्चिम नमस्कार आसन' से आपकी बॉडी का मेटाबॉलिज्‍म रेट बढ़ता है। अगर आपका वजन ज्‍यादा है तो इस आसन को करने से वह भी कम हो जाता है। इतना ही नहीं, आपकी पीठ, कंधे और हाथों में जमा फैट भी इस योगासन को करने से कम होने लगता है। 
  • अगर आपको बहुत ज्‍यादा लैपटॉप या डेक्‍सटॉप पर काम करना पड़ता है या आप बहुत ज्‍यादा टाइपिंग का काम करती हैं तो यह योगासन आपकी कलाइयों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। दरअसल, बहुत ज्‍यादा टाइपिंग का काम करने से कलाइयों के जोड़ में दर्द होने लगता है। ऐसे में पश्चिम नमस्कार आसन करने से कलाई के जोड़ खुल जाते हैं और इससे काफी रिलैक्‍स महसूस होता है। 
  • गर्दन और पीठ के दर्द के लिए पश्चिम नमस्कार आसन बहुत ही लाभकारी है। इस योगासन को करने से मसल्‍स का तनाव कम होता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है। 
  • शांत दिमाग और स्‍ट्रेस को दूर करने के लिए भी यह आसन बहुत अच्‍छा विकल्‍प साबित हो सकता है। अगर आपको बहुत ज्‍यादा आलस महसूस हो रहा है तो एक बार 20 सेकेंड के लिए पश्चिम नमस्कार आसन करें, आप फ्रेश फील करने लगेंगी। 
 
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स्‍टेप बाय स्‍टेप पश्चिम नमस्कार आसन करना सीखें

  • पश्चिम नमस्कार आसन करने के लिए सबसे पहले फर्श पर एक मेट बिछाएं। 
  • अब मेट पर खड़ी हो जाएं और पैरों के बीच एक इंच का गैप बनाएं। अपने हाथों को नीचे की ओर लटकाएं और ढीला छोड़ दें। इसे ताड़ासन कहा जाता है। 
  • इसके बाद अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ें और दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाएं। धीरे-धीरे दोनों हाथों को जोड़ने की कोशिश करें। 
  • गहरी सांस लें और कलाई को मोड़ते हुए हाथों की उंगलियों को रीढ़ की हड्डी से सटा लें। अब हथेलियों को आपस में इस तरह से मिलाएं, जैसे आप नमस्‍कार करते हैं। 
  • इस पोजीशन में आने के बाद आंखों को बंद कर लें और 20 से 30 सेकेंड तक इसी अवस्‍था में खड़ी रहें। 
  • 20 से 30 से‍केंड बाद अपनी आंखों को खोलें और कलाई को नीचे की ओर मोड़ें। धीरे से ताड़ासान में वापस आएं। 
  • 1 मिनट बाद दोबारा से इस प्रक्रिया को दोहरा कर 'पश्चिम नमस्कार आसन' करें। ऐसा कम से कम 5 बार रोज करें। 

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सावधानियां 

  • जरूरी नहीं है कि आप पहली बार में ही ऐसा करने में सफल हो जाएं। इसलिए जबरदस्‍ती कलाई को ज्‍यादा नहीं मोड़े, इससे आपकी कलाई में दर्द भी हो सकता है। 
  • पश्चिम नमस्कार आसन करते वक्‍त गहरी सांस (गहरी सांस लेने के फायदे) जरूर लें। ऐसा करने से शरीर में ऑक्‍सीजन का संचार सही तरह से होगा और आप आसन को आसानी से कर पाएंगी। 
  • पहली बार जब आप पश्चिम नमस्कार आसन करें तो 5 से 10 सेकेंड के लिए उस अवस्‍था में रहें। धीरे-धीरे जब आप इस आसन को करने में माहिर हो जाएं तो समय भी बढ़ाती जाएं। 

अगर आपको भी अपने कंधों और कलाई को मजबूत करना है तो आपको भी रोज कम से कम 5 बार पश्चिम नमस्कार आसन करना चाहिए। फिटनेस और योगा से जुड़ी और भी रोचक जानकारी के लिए पढ़ती रहें Herzindagi। 

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