कोरोना काल में ज़्यादातर लोग घर से ही काम कर रहे हैं, इसलिए इंटरनेट सेवा अच्छी होना बहुत ज़रूरी है। अगर इंटरनेट स्लो है तो इसका असर काम पर भी देखने को मिल सकता है। यही नहीं स्लो इंटरनेट होने की वजह से फ़ाइल या फिर पिक्चर भी डाउनलोड नहीं हो पाती हैं। इसके अलावा काम भी समय पर ख़त्म नहीं हो पाता है। अगर आपके वेब सर्च स्क्रॉल होने की गति स्लो है तो हैरान होने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि समझ जाएं कि इंटरनेट काफ़ी स्लो है। 

कई बार लोग सिर्फ़ कंप्यूटर में काम करते वक़्त इनर फ़ंक्शन से फैमिलियर नहीं होते हैं। बता दें कि वाइंड रेंज में परेशानियों की एक सीरीज़ है, जो इंटरनेट को स्लो कर सकती है। हालांकि इनमें कुछ को फ़िक्स किया जा सकता है और कुछ यूजर्स के कंट्रोल के बाहर होता है। वहीं कई बार कंप्यूटर में इनर फ़ंक्शन की वजह से भी इंटरनेट स्लो हो जाता है, इसलिए जब भी ऐसी समस्याओं का सामना हो तो इन ट्रिक्स को फ़ॉलो ज़रूर करें।

क्लीयर हिस्ट्री और कुकीज़ 

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कई बार काम करते वक़्त हम कई चीज़ों को सर्च करते रहते हैं, यह कहीं ना कहीं स्टोरेज को फ़ुल करता है। वहीं बात करें कुकीज़ की तो यह टेक्स्ट फ़ाइल हैं जो डेटा के छोटे टुकड़ों में होता है, इसका इस्तेमाल ऑनलाइन सर्फ़ करने के लिए अपने कंप्यूटर को आईडी के तौर पर किया जाता है। आप जितनी अधिक वेबसाइट को विजिट करते हैं उतनी ही अधिक कुकीज़ पिक करते हैं और यही कुकीज़ इंटरनेट को स्लो कर देती हैं। इसलिए जब कंप्यूटर में इंटरनेट स्लो हो तो सबसे पहले हिस्ट्री और कुकीज़ को डिलीट कर दें।

वेबसाइट की भी हो सकती है समस्या

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कई बार हम अलग-अलग वेबसाइट को सर्च करते हैं, लेकिन जब यह ओपन नहीं होती तो हम इसकी वजह इंटरनेट को बताते हैं। हालांकि वेबसाइट भी इसके पीछे की वजह हो सकती है, जिसे आप एक्सेस कर रहे हैं। वहीं इंटरनेट सर्वर और वेबसाइट दोनों का ही ऑपरेशनल इश्यू हो सकता है और यह Bots या फिर DDOS (डिस्ट्रीब्यूटेड डेनियल ऑफ सर्विस) का अटैक भी हो सकता है। यह एक तरह का साइबर अटैक है जो नेटवर्क  को बाधित करता है, जिसकी वजह से इंटरनेट सर्विस भी स्लो हो जाती है। वहीं कई बार इंटरनेट स्लो इसलिए हो जाता है क्योंकि एक ही वेबसाइट को कई लोग उसी वक़्त में सर्च कर रहे होते हैं।

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सिस्टम मैकेनिक सॉफ्टवेयर का उपयोग

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शुरुआत में एक महीने तक इस सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करने के लिए कोई चार्ज नहीं है, लेकिन बाद में इसके इस्तेमाल पर फ़ीस चार्ज की जाती है। सिस्टम मैकेनिक एक तरह का सॉफ़्टवेयर पैकेज है जो आपके कंप्यूटर की परफ़ॉर्मेंस को कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही कंप्यूटर से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में भी मदद करता है। जिसमें कुकीज़ या फिर अन्य चीज़ें हैं। यह सॉफ़्टवेयर ख़राब वाई-फ़ाई कनेक्शन को भी ऑप्टिमाइज़ करता है और स्टोरेज स्पेस को ओपन करता है ताक़ि आपका पीसी तेज़ स्पीड में सर्फ़ कर सकें। वहीं सिस्टम मैकेनिक सॉफ़्टवेयर कंप्यूटर के इनर वर्किंग प्रोसेस को ट्रैक करता है। जिसकी वजह से इंटरनेट की स्पीड स्लो नहीं रहती है।

 

अगर सबपर हो वाईफाई राउटर

वाईफ़ाई राउटर इंटरनेट सर्विस आपके कमरे तक बीम करती है, हालांकि जब तक आप रेंज के अंदर हैं आपको सर्विस अच्छी मिलेगी। और ऐसा ज़रूरी नहीं कि सभी राउटर आपके स्थान के सभी क्षेत्रों में बेहतर गुणवत्तापूर्ण सेवा देने का काम करें। अगर समस्या राउटर है तो आप वाई-फ़ाई राउटर बूस्टर या फिर मज़बूत केबल का इस्तेमाल करें ताक़ि सिंगल अच्छे आयें और, स्पीड भी बेहतर मिलें। वर्किंग महिलाएं को राउटर से जुड़ी इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

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इंटरनेट सर्विस या फिर पीसी को करें अपग्रेड

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अगर आपकी इंटरनेट सर्विस लगातार स्लो है तो सर्विस प्रोवाइडर को चेक करें। अपने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के साथ मौजूदा सब्स्क्रिप्शन की जांच करें। हो सकता है स्पीड के लिए आपको अपग्रेड करने की आवश्यकता हो। अपग्रेड करने से आपको भारी अंतर देखने को मिल सकता है। इंटरनेट सर्विस के अलावा कई बार पीसी या फिर लैपटॉप को भी अपग्रेट करने की आवश्यकता होती है। अगर आप नियमित कंप्यूटर का इस्तेमाल करती हैं तो समय-समय पर इसे अपग्रेड करना ज़रूरी है।

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