पत्थरचट्टा एक किस्म का पौधा होता है और आयुर्वेद के अनुसार इसमें कई औषधीय गुण होते हैं। इसके गुणों के कारण ही इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे एयर प्लांट, कैथेड्रल बेल्स, लाइफ प्लांट और मैजिक लीफ। सदियों से इसका उपयोग किडनी से और मूत्र विकारों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में किया जाता रहा है, लेकिन इसके कई अन्य फायदे भी हैं।

वैद्य हरिकृष्ण पांडे बताते हैं कि इसे आयुर्वेद में भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणफुट्टी के नाम से भी जाना जाता है। पथरी के अलावा यह पेट की सफाई करने और जमा विषैले तत्वों को बाहर निकाल, पेट को स्वस्थ रखने में मददगार होता है। रोचक गुणों से भरपूर होने के कारण यह बवासीर में भी लाभदायक है। इसके अन्य लाभों के बारे में वैद्यजी से जानें।

किडनी से संबंधित समस्या के लिए

pattharchatta for kidney problems

गुर्दे की पथरी के लिए तो लोग इसको रामबाण मानते हैं। किडनी के रोगी को इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर और ठंडा कर, उसमें शहद मिलाकर दिन में दो बार पिलाना चाहिए। पेशाब में जलन, पेशाब का रुक-रुककर आना, दर्द  होना या अन्य पेशाब की समस्याओं के लिए, इसके पत्तों का रस, शहद में मिलाकर पिलाना हितकर होता है। 

शरीर के घाव भरने के लिए

यह शरीर के घाव भरने में भी सहायक है। साथ ही पत्थरचट्टा रक्त की शुद्धि कर चर्म रोगों से बचाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) का शमन करता है। आप इसके 4-5 पत्तों को पीसकर एक लेप तैयार कर सकते हैं और उसे घाव, चोट या निशान वाली जगह पर लगाने से आपको तुरंत आराम मिलेगा। शरीर पर हुए रैशेज या खुजली की समस्या से भी आपको राहत मिलेगी।

वेजाइनल इंफेक्शन के लिए

महिलाओं को अक्सर वेजाइनल इंफेक्शन की शिकायत होती है, जिस वजह से प्राइवेट एरिया में खुजली, जलन के साथ-साथ वेजाइनल डिस्चार्ज भी होता है। ऐसे में पत्थरचट्टा महिलाओं के लिए रामबाण उपाय है। वेजाइना में सूजन, जलन, खुजली आदि से निजात पाने के लिए इसके पत्तों को उबालकर काढ़ा बना लें और फिर उसमें शहद डालकर ठंडा कर दिन में दो बार पीएं।

फोड़े, गांठ या सूजन के इलाज के लिए 

pattharchatta for inflammation

अगर आपके शरीर पर किसी तरह का फोड़ा, गांठ या लालिमा हो गई है, तो उसके इलाज के लिए भी पत्थरचट्टा बड़ा काम आ सकता है। प्रभावित एरिया पर पत्थरचट्टा का लेप लगाने भर से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। इसके लिए आप 3-4 पत्थरचट्टा के पत्तों को पीसकर उसका पेस्ट फोड़े, गांठ और सूजन वाली जगह पर लगाएं। आप इसके पत्ते को गर्म कर दर्द वाली जगह पर बांध भी सकते हैं, इससे भी आपको आराम मिलेगा। यह जलन और सूजन को कम करने में लाभकारी है। 

गॉल ब्लेडर की पथरी के इलाज के लिए

अधिकांश महिलाओं को पित्त की पथरी होती है। इसका दर्द भी असहनीय होता है। कई डॉक्टर्स आपको गॉल ब्लेडर ऑपरेट करने की ही सलाह देते हैं, लेकिन हम आपको बता दें कि आप पत्थरचट्टे के सेवन से इससे भी निजात पा सकती हैं। इसके 8-10 पत्तों को कूट-पीसकर चटनी जैसा बना लें। इसमें दो चुटकी अजवाइन का चूर्ण, एक चम्मच गोखरू का चूर्ण मिलाकर चार-पांच दिन खाली पेट सेवन करना हितकर है। ध्यान रखें कि इसके बाद एक घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं है। 

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खूनी दस्त के इलाज के लिए

पत्थरचट्टे का इस्तेमाल आप खूनी दस्त को रोकने के लिए भी कर सकते हैं। इसके पत्तों से रस निकालकर उसमें चुटकी भर पीसा हुआ जीरा और आधा चम्मच देशी घी डालकर अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण का सेवन दिन में दो बार करें, इसे खाने से आपको आराम मिलेगा। अगर इस दौरान पेट में दर्द हो, तो इसके पत्तों के रस में जरा-सा सोंठ का चूर्ण मिलाकर लेना चाहिए।

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उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए

patharchatta for blood pressure

अगर आप उक्त रक्तचाप से पीड़ित हैं, तो उसके लिए आप पत्थरचट्टे का सेवन कर सकते हैं। इसे खाने से आपका हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहेगा। आप इसके पत्तों का रस निकालकर पांच-पांच बूंद पानी में मिलाकर पी सकते हैं। चाहें तो इसके 2-3 पत्तों को रोज सुबह खाली पेट भी खाया जा सकता है। इससे आपकी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या छूमंतर हो जाएगी। 

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देखा आपने एक पत्थरचट्टा का पौधा आपके कितने काम आ सकता है। वैद्य हरिकृष्ण कहते हैं तुलसी, गिलोय, नीम आदि को स्वास्थ्य रक्षक माना जाता है, इसे भी उसी श्रेणी का मानकर घर के बगीचे या गमले में इसका डंठल या पत्ता लगा दें। कुछ ही दिन में इसका पौधा लहराने लगेगा और जरूरत पड़ने पर आपके लिए मददगार साबित होगा।

अगर इनमें से कोई परेशानी आपको है, तो आप भी पत्थरचट्टे का सेवन कर सकते हैं। इन अहम जानकारी को दूसरों तक भी पहुंचाएं और आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे लाइक जरूर करें। स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी अन्य जानकारी के लिए पढ़ती रहें हरजिंदगी।

 

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