भारत की प्राकृतिक खूबसूरती की जीतनी तारीफ की जाए उतनी कम है। शायद इसीलिए त्योहार, आपसी भाई-चारे और प्राकृतिक खूबसूरती को देखते हुए भारत को 'अतुल्य भारत' कहा जाता है। यहां ऐसे कई विचित्र प्राकृतिक नजारे हैं जिसके बारे आप बहुत कम ही जानते होंगे। भारत में ऐसे कई खूबसूरत स्थान हैं जहां आप घूमने जाना तो चाहते हैं लेकिन उसके बारे में सही जानकारी नहीं होने के चलते आप नहीं जा पाते हैं। इन्हीं विचित्र और खूबसूरत जगहों में से एक है 'नमक की झील'। जी हां, भारत में ऐसी बहुत ही कम झीले हैं जहां नमक भी मिलता है। आज इस लेख में मैं आपको उन झीलों से रूबरू कराने जा रहा हूं जहां नमक भी मिलता है और यह पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र भी रहा है। तो चलिए जानते हैं वो कौन-कौन सी झील हैं-

पचपदरा झील-

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राजस्थान सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यहां की ऊंची ऐतिहासिक इमारतें और राजा-महाराजा के हमलों को देख कर ये कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि यहां एक ऐसी भी झील है जहां नमक भी मिलता है। राजस्थान के बाड़मेंड़ जिले में एक झील है जिसका नाम है 'पचपदरा झील'। इस झील का पानी इतना खारा है कि यहां से हमेशा नमक निकाला जाता है। इस झील को देखने और यहां घूमने के लिए हर साल हजारों की संख्या में दूर-दूर से सैलानी भी आते हैं। अगर आप भी राजस्थान घूमने जा रहे हैं तो यहां एक बार ज़रूर पहुंचे। इसे पंचभद्रा सॉल्ट लेक भी कहा जाता है।

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लोनार झील-

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हाल में ही आपने ये खबर देखी होगी या सुनी होगी कि महाराष्ट्र में एक झील का पानी रातों-रात गुलाबी रंग का हो गया। ये कोई और झील नहीं बल्कि, लोनार झील थी। इस प्राकृतिक झील की उम्र लगभग 50 हज़ार साल पुरानी मानी जाती है। कहा जाता है कि एक उल्कापिंड के पृथ्वी पर गिरने की वजह से ये झील बनी। यह मुंबई से लगभग 500 किलोमीटर दूर और महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में है। इसका पानी एकदम खारा है और ये महाराष्ट्र के टूरिस्ट स्पॉट्स में से एक है। ये झील भारत के नेशनल जियो हेरिटेज मॉन्युमेंट भी है।

पुलीकट झील-

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दक्षिण भारत हमेशा से पर्यटकों के लिए ट्रैवल डेस्टिनेशन का एक मुख्य केंद्र रहा है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में हमेशा सैलानी घूमने जाते रहते हैं। इन राज्यों में ऐसे कई प्राकृतिक प्लेसेस हैं जिन्हें देख कर आज भी टूरिस्ट अचंभित हो जाते हैं। पुलीकट झील उन्हीं प्राकृतिक प्लेसेस में से एक है। यह तमिलनाडु सीमा के आख़िरी छोर पर है। खारा पानी होने के चलते इस झील से भी नमक काफी मात्रा में मिलता है। (Beaches की सैर नहीं की, तो केरल में कुछ नहीं देखा) इस झील में तीन नदियों का पानी एक साथ एक ही जगह पर मिलता है। इस झील में कई प्रकार की मछलियां भी देखने को मिलती हैं।

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चिल्का झील-

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हर साल लगभग हजारों की संख्या में सैलानी उड़ीसा घूमने के लिए जाते हैं। धार्मिक जगहों में भी उड़ीसा भारत के सबसे पवित्र स्थान में से एक माना जाता है। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यहां के खूबसूरत समुद्र तट और झील पर्यटकों और श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करते हैं। (Jagannath Puri Rath Yatra 2020) उड़ीसा में ही मौजूद है एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील, 'चिल्का झील'। इस झील को देखने और यहां घूमने के लिए लाखों टूरिस्ट आते रहते हैं। इस झील के बारे यह कहा जाता है कि दिसम्बर से जून तक इसका पानी खारा रहता है और मानसून में इस झील का पानी मीठा हो जाता है। 

पैंगोंग झील-

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लद्दाख! यानि प्रकृति की गोद में बसी एक ऐसी जगह जहां हर कोई एक बार ज़रूर घूमना चाहेगा। प्राकृतिक नज़ारे और बर्फ की चादरों से ढका लद्दाख अपनी खूबसूरत डेस्टिनेशन के साथ नदी और झील के लिए भी जाना जाता है। पैंगोंग झील लद्दाख की खूबसूरत झीलों में एक है, जिसे नमक की झील भी कहा जाता है। यहां हर साल हजारों की संख्या में देश-विदेश से सैलानी घूमने आते हैं। इसे दुनिया की सबसे उंची, लंबी और गहरी झील भी कहा जाता है। इस झील की उच्चाई लगभग 45000 मीटर है। अगर आप कभी लद्दाख जाएं तो एक बार यहां ज़रूर घूमने जाएं।

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