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    इनफर्टिलिटी पर क्या असर डालते हैं यूटेरिन फाइब्रॉएड, क्या हर महिला को इनके बारे में जानना है जरूरी

    यूटेरिन फाइब्रॉएड्स अगर किसी महिला को हो रहे हैं तो उनका ट्रीटमेंट करवाना बहुत जरूरी है। ये समस्या बहुत विकराल रूप ले सकती है। 
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    Updated at - 2020-09-11,13:27 IST
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    fibroids due to uterine cavity

    एक साल से अधिक समय तक असुरक्षित सेक्शुअल इंटरकोर्स करने के बाद भी कंसीव न कर पाने की स्थिति को इनफर्टिलिटी कहते हैं। यूटेरिन फाइब्रॉएड्स इनफर्टिलिटी के कई कारणों में से एक हो सकते हैं।

    क्या होते हैं यूटेरिन फाइब्रॉएड्स?

    यूटेरिन फाइब्रॉएड्स यूट्रस में मसल्‍स टिशू के सॉफ्ट या नॉन कैंसरस ट्यूमर्स हैं। फाइब्रॉएड्स तब बनते हैं जब यूट्रस की दीवार में एक सिंगल मसल सेल बढ़कर नॉन कैंसरस ट्यूमर बन जाता है। फाइब्रॉएड्स यूट्रस का शेप और साइज बदल सकते हैं और कई बार यूट्रस के निचले भाग यानि सर्विक्स में भी बदलाव लाते हैं। 

    महिलाओं में आमतौर पर एक से ज्यादा फाइब्रॉएड ट्यूमर होते हैं, लेकिन सिंगल फाइब्रॉएड भी मुमकिन है। फाइब्रॉएड का असली कारण क्या है ये अस्पष्ट है, लेकिन जेनेटिक, हार्मोनल और एंवायरमेंटल कारणों का मेल इस पर असर डाल सकता है। चाहे फाइब्रॉएड्स के लक्षण हों या फिर उनका इलाज, यह आकार, स्थान और संख्या पर निर्भर करता है।

    uterine fibroids

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    फाइब्रॉएड्स अक्सर यूट्रस के आस-पास ही मिलते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये सर्विक्स में भी हो जाते हैं। आमतौर पर तीन तरह के फाइब्रॉएड्स होते हैं-

    - सबसेरोसल यूट्रस की बाहरी दीवार में होते हैं (55%)

    - इंट्राम्यूरल यूट्रस की मस्कुलर लेयर में पाए जाते हैं (40%)

    - सबम्यूकोसल यूटेरिन कैविटी में बढ़ते हैं (5%)

    फाइब्रॉएड्स यूट्रस से किसी नली के रूप में भी जुड़े हो सकते हैं, या फिर आस-पास के लिगामेंट्स या अंग जैसे ब्लैडर या आंतों से भी उनका जुड़ाव हो सकता है। हालांकि, ये बात जानने वाली है कि फाइब्रॉएड्स पेल्विक कैविटी के बाहर कम ही दिखते हैं। 

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    फर्टिलिटी पर कैसे पड़ता है फाइब्रॉएड्स का असर?

    - आमतौर पर 5-10 प्रतिशत इनफर्टाइल महिलाओं को फाइब्रॉएड्स होते हैं।

    - फाइब्रॉएड्स कितने बड़े हैं और वो किस जगह पर हैं इस बात से फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है। 

    - बहुत बड़े यानि 6 सेंटिमीटर डायामीटर से बड़े फाइब्रॉइड्स जो यूट्रस की दीवार के अंदर होते हैं वो काफी ज्यादा असर डालते हैं।  

    ये फाइब्रॉइड्स कई तरह से फर्टिलिटी पर असर डाल सकते हैं।  

    - सर्विक्स के आकार में बदलाव यूट्रस के अंदर जाने वाले स्पर्म की संख्या पर असर डालता है।

    - यूट्रस के शेप में बदलाव से स्पर्म या एम्ब्रियो के मूवमेंट में फर्क पड़ सकता है।

    - फाइब्रॉएड्स के कारण फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक हो जाती हैं।

    - वो यूटेरिन कैविटी के अंदर मौजूद परत के आकार पर भी असर डाल सकते हैं।

    - यूटेरिन कैविटी में ब्लड के फ्लो पर भी असर पड़ता है और इससे एम्ब्रियो के यूटेरिन वॉल में चिपकने (इम्प्लांट होने) या फिर विकसित होने की गुंजाइश कम हो जाती है। 

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    ट्रीटमेंट- 

    फाइब्रॉएड्स से पीड़ित कई महिलाएं इनफर्टाइल नहीं होती हैं। कई बार फाइब्रॉएड्स का ट्रीटमेंट ही फर्टिलिटी पर असर डाल सकता है ना कि फाइब्रॉएड्स खुद। इसलिए फाइब्रॉएड्स वाली महिलाओं और उनके पार्टनर्स को फाइब्रॉएड्स का इलाज करवाने से पहले फर्टिलिटी से जुड़ी अन्य समस्याओं का आंकलन करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।  

    कुछ मामलों में जहां फाइब्रॉएड्स के ऐसे लक्षण नहीं हैं जिनमें हेवी ब्लीडिंग या दर्दभरे पीरियड्स हो रहे हैं वहां किसी भी तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है। पर फिर भी डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी होता है ताकि ये पता लगाया जा सके कि आगे चलकर कहीं महिला की नेचुरल प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत तो नहीं आएगी। एक फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट इस बात का आंकलन कर सकता है कि फाएब्रॉइड्स कन्सेप्शन में बाधा डाल रहे हैं या नहीं।  

    अगर ट्रीटमेंट की जरूरत होती है तो निम्नलिखित में से कोई विकल्प लिया जा सकता है- 

    1. मायोमेक्टोमी 

    ये फाइब्रॉएड्स को हटाने का एक सर्जिकल प्रोसीजर है। इसमें सिजेरियन डिलीवरी की जरूरत पड़ सकती है और प्रेग्नेंसी के लिए इंतज़ार करना पड़ सकता है।  इसकी वजह से रिप्रोडक्टिव अंगों में स्कारिंग हो सकती है जिससे भविष्य में फर्टिलिटी पर असर पड़ता है।  

    2. हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल 

    इससे फाइब्रॉएड्स कंडीशन के लक्षणों में आराम तो मिलता है, लेकिन इन्हें लेते वक्त आप प्रेग्नेंट नहीं हो पाएंगी।  

    3. इंट्रायूटेरिइन डिवाइस (आईयूडी) 

    आईयूडी तब तक प्रेग्नेंसी को रोकता है जब तक आप इसका इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, फर्टिलिटी को प्रिजर्व करते समय ये कुछ लक्षणों को रोक या खत्म कर सकता है।  

    4. मायोलिसिस और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन 

    यह एक मॉर्डन और आमतौर पर कम खतरनाक लैप्रोस्कोपिक प्रोसीजर है, जिससे फाइब्रॉएड की ब्लड सप्लाई को कम करते हुए टिशू को या तो छोटा या फिर खत्म किया जाता है। इन प्रोसीजर में रेडियोफ्रीक्वेंसी वॉल्यूमेट्रिक थर्मल अब्लेशन, लेजर और बायपोलर नीडिल्स, क्रायोमायलोसिस और मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग- गाइडेड लेजर एब्लेशन शामिल हैं। ये छोटे फाइब्रॉएड्स पर ज्यादा असर करता है।  

    फाइब्रॉएड्स की एबनॉर्मल ब्लीडिंग को रोकने के लिए एंडोमेट्रियल एब्लेशन या फिर यूटेरिन आर्टरी एम्बोलाईजेशन जैसे प्रोसीजर्स फाइब्रॉएड ट्यूमर्स को छोटा करने या फिर खत्म करने के लिए किए जाते हैं जो महिला की फर्टिलिटी पर असर डालते हैं। हर ट्रीटमेंट के अपने रिस्क और कॉम्प्लिकेशन्स होते हैं तो कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात जरूर कर लें।  

    सार- 

    इनफर्टिलिटी में यूटेरिन फाइब्रॉएड्स का इलाज केस के हिसाब से तय किया जाता है। फाइब्रॉएड्स का इलाज कैसे और क्या करना चाहिए ये आपके लक्षणों की गंभीरता, डॉक्टर द्वारा दिए गए सुझाव और रिप्रोडक्टिव गोल्स पर निर्भर करता है।  

    डॉक्टर उमा पांडे (प्रोफेसर - ओबी एंड गायनी विभाग) को उनकी एक्सपर्ट सलाह के लिए धन्यवाद 

    References

    https://extendfertility.com/uterine-fibroids-and-fertility/

    https://www.emjreviews.com/reproductive-health/article/fibroids-and-infertility/

    https://www.medscape.com/viewarticle/837099

    https://www.reproductivefacts.org/news-and-publications/patient-fact-sheets-and-

    booklets/documents/fact-sheets-and-info-booklets/fibroids-and-fertility/

    https://www.webmd.com/women/uterine-fibroids/surgery-for-uterine-fibroids#1

    https://www.bcbst.com/mpmanual/!ssl!/webhelp/Laparoscopic_and_Percutaneous_Techniques_

    for_the_Myolysis_of_Uterine_Fibroids.htm

    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/17082676/

    https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/uterine-fibroids/diagnosis-treatment/drc-

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