क्‍या आपको पता है कि उम्र के 50वें पड़ाव पर पहुंचते-पहुंचते 20 से 80 प्रतिशत महिलाओं के गर्भाशय में फाइब्रॉएड्स विकसित हो जाते हैं? गर्भाश्‍य में मांसपेशियों के ट्यूमर का बढ़ना आमतौर पर महिलाओं में प्रगनेंसी के दौरान होता है। विज्ञान की भाषा में इसे लेओयोमोमा या मायोमा भी कहा जाता है। गर्भाशय के फाइब्रॉएड्स का गर्भाशय के कैंसर में विकसित होना अमूमन बहुत कम ही होता है। हालाकि, फाइब्रॉएड्स का आकार छोटे से बीज से शुरू हो कर धीरे-धीरे बढ़ता है और इसके साथ ही गर्भाशय का आकार भी बढ़ जाता है। इसे मानवीय नजरों से देख पाना अति मुश्किल कार्य है। फाइब्रॉएड्स कभी-कभी एकल तो कभी एक साथ कई संख्‍या में विकसित होते हैं। ज्‍यादातर मामलों में सर्विक्‍स फाइब्रॉएड्स की संख्‍या अधिक होने के कारण विस्‍तारित हो जाता है। साथ ही कुछ मामलों में महिलाओं का वजन भी बढ़ने लगता है। 

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गर्भाशय फाइब्रॉएड्स के कारण 

फाइब्रॉएड्स का सही कारण क्‍या है यह अभी तक किसी को भी ज्ञात नही है। शोधकर्ताओं की मानें तो फाइब्रॉएड्स होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे: 

  • हार्मोन के स्‍तर पर प्रभाव (एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍टेरोन स्‍तर)
  • इंसुलिन का बढ़ना आदि और भी कई तरह के ग्रोथ फैक्‍टर्स 
  • आनुवंशिक प्रवृतियां 
  • ईसीएम(एक्‍स्‍ट्रासेल्‍युलर मैट्रिक्‍स)

चिकित्‍सक इस बात को लेकर निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकते कि फाइब्रॉएड्स के पीछे क्‍या कारण है यह कैसे गर्भाशय के अंदर बढ़ता और घटता है। हालाकि, यह स्‍पष्‍ट हैं कि यह मुख्‍य रूप से हार्मोनल स्‍तर पर निर्भर करता है। क्‍योंकि एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍टेरोन में गर्भावस्‍था के दौरान तेजी से वृद्धि होती है। वहीं एंटी-हार्मोनल दवाओं के उपयोग से और रजोनिवृत्ति के दौरान यह सिकुड़ जाते हैं। इसका दूसरा संभावित कारण स्‍टेम सेल हो सकता है। स्‍टेम सेल्‍स गर्भाशय के स्‍मूथ मस्‍कुलर टिशूज में मौजूद होते हैं। ये कोशिकाएं जल्‍दी से विभाजित हो जाती हैं और ऊतकों के पास एक रबड़ जैसा द्रव्यमान बनाती हैं।

लक्षण

इसके लक्षण स्थान, आकार और फाइब्रॉएड की संख्या पर निर्भर करते हैं और कई महिलाओं में तो इसके कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं। 

हालाँकि नीचे फाइब्रॉएड के कुछ सामान्य लक्षण बताए गए हैं, जो महिलाओं को अक्सर अनुभव होते हैं;

1. दर्दनाक अवधि या भारी रक्तस्राव

2. पीठ के निचले हिस्से और पैरों में दर्द

3. मासिक धर्म की लंबी अवधि

4. कब्ज

5. पेल्विक एरिया में भारीपन महसूस होना

6. प्रजनन से जुड़े मुद्दे, जैसे बांझपन

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गर्भाशय फाइब्रॉएड के विभिन्न उपचार

इस समस्‍या के कई उपचार उपलब्ध हैं। मुख्य रूप से रोगी में फाइब्रॉएड के लक्षणों को देखते हुए उपचार किया जाता है।

• दवाएं

आमतौर पर फाइब्रॉएड को ठीक करने के लिए दवाएं ही पसंद की जाती हैं। फाइब्रॉएड के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ सामान्य दवाएं हैं इबुप्रोफेन, एसिटामिनोफेन। लुप्रॉन, (GnRHa) जैसी दवाएं आमतौर पर इंजेक्शन द्वारा दी जाती हैं, जो फाइब्रॉएड को सिकोड़ती हैं।

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•  सर्जरी 

अगर गंभीर लक्षण है तो सर्जरी की जाती है।

1. मायोमेक्टॉमी - यह सर्जरी हेल्‍दी टिशूज को प्रभावित किए बिना फाइब्रॉएड को हटाने का सबसे अच्छा तरीका है।

2. हिस्टेरेक्टॉमी - यह सर्जरी गर्भाशय को निकाल कर फाइब्रॉएड को ठीक करने का एक प्रभावी तरीका है। यह मुख्य रूप से तब किया जाता है जब फाइब्रॉएड आकार में बड़े होते हैं।

3. मायोलिसिस - इसमें डाली गई सुई के इस्तेमाल से फाइब्रॉएड नष्ट हो जाते हैं और इस सुई को इलेक्ट्रिक करंट या लैप्रोस्कोपी द्वारा निर्देशित किया जाता है।

4. एंडोमेट्रियल एब्लेशन - इस सर्जरी में, रक्‍तस्‍त्राव को रोकने के लिए गर्भाशय की परत को हटा दिया जाता है। इसे अक्‍सर लेजर, वायर लूप, माइक्रोवेव्‍स, बॉयलिंग वॉटर और अन्‍य तरीकों से किया जाता है। 

निष्कर्ष

किसी भी महिला के गर्भाशय में फाइब्रॉएड विकसित हो सकते हैं।  लेकिन चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस बीमारी से निपटने के लिए विभिन्न उपचार उपलब्ध हैं। इसके लिए बेस्‍ट तरीका है कि आप संकेतों पर ध्‍यान दें और समय पर उपचार करा कर एक सामान्य जीवन जीएं।

 

संदर्भ:

 https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/uterine-fibroids/symptoms-causes/syc-20354288

https://www.womenshealth.gov/a-z-topics/uterine-fibroids