खाना बनाना आप एक रूटीन वर्क बोल सकती है लेकिन, आपको जान के ये हैरानी होगी की खाना बनाना एक हेल्थ थेरेपी भी हो सकता है। दरअसल, अधिकतर महिलाओं को यह मालूम नहीं है कि खाना बनाना या खाना पकाने की कला एक मानसिक इलाज है, जो आपको कई परेशानियों से दूर रखती है। इस इलाज को आम-बोल चाल के भाषा में कलिनरी आर्ट थेरेपी कहते हैं, और इस थेरेपी का इस्तेमाल कई मानसिक रोग डॉक्टरों द्वारा किया भी जाता है। खाना बनाने की कला हालांकि सभी को नहीं आती लेकिन कुछ मायने में यह डॉक्टरों द्वारा सुझाव दिया जाता है कि कलिनरी आर्ट थेरेपी आपके हेल्थ के लिए सही है। तो चलिए इस खाना बनाने की थेरेपी के बारें में और अधिक जानते हैं-

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कलिनरी आर्ट थेरेपी

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उदहारण के लिए- जब कोई महिला गुस्सा या नाराज होती है तो उसे अपने मनपसंद काम करने की इक्षा होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जब महिला किसी से या किसी चीज को लेकर गुस्सा होती है तो उसे अपने मनपसंद का खाना बनाने या खाने का मन करता है। तब डॉक्टर कलिनरी आर्ट थेरेपी को करने के लिए बोलता है ताकि मानसिक तौर पर इलाज किया जा सके।

तनाव होता है कम-

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खाना बाबाने की कला काफी हद तक आपके तनाव को कम करता है। यह कला किसी के अपने व्यवहार में जानकारी हासिल करने, आत्मसम्मान बढ़ाने और ब्रेन के विकास को बढ़ाने में हेल्प करता है। खाना बनाते समय महिलाओं का ध्यान केंद्रित रहता है और दुसरे कामों पर ध्यान नहीं जाता है, यही केंद्रित ध्यान आपके मानसिक हालत को सुधारता है और आपको हेल्थी रखता है।

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खुशबू का सकरात्मक प्रभाव-

खाना बनाने का एक सकरात्मक प्रभाव खाना की खुशबू भी है। जब महिलाएं खाना बनती है तो खाने में डाले हुए मसाले की खुशबू एक सकरात्मक प्रभाव डालता है। मसाले की खुशबू आपके इंद्रियों पर असर करता है और आप धीरे-धीरे आपके गुस्से को कंट्रोल करता है। खुद, भी कुछ महिलाओं को कहते सुना होगा कि जब वे तनाव में रहती है, तो उन्हें कुकिंग करना पसंद आता है। 

खुद को पहचानना-

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कलिनरी आर्ट थेरेपी एक ऐसा थेरेपी है जो अपने खुद के पहचान को भी बढ़ाता है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि इस पहल से महिलाओं में ईटिंग डिसऑर्डर, डिप्रेशन जैसे बीमारी में हेल्प करता है। खुद को पहचानने का एक सरल उपाय है कलिनरी आर्ट थेरेपी। फूड्स बनाना और उसके प्रति लगाव आपको तनाव मुक्त रखता है।