आज कल बच्चों के टेढ़े -मेढ़े दांत होना एक आम समस्या बनती जा रही है। ठीक से ब्रश न करना, मुंह में कोई चीज़ डालना, नाखून चबाना, दूध वाले दांतों का सही समय पर न टूटना या अंगूठा चूसना जैसे कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े होने लगते हैं। 

यदि दांत पूरी तरह से संरेखित नहीं हैं, तो वे आपके व्यक्तित्व और मुस्कान में ग्रहण लगा सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सही समय पर दांतों की देखभाल करके उन्हें टेढ़ा होने से बचाया जा सके। जिससे यह समस्या बचपन में ही ठीक हो सके। आइए स्माइल केयर डेंटल यूनिट,कोलकाता के डॉक्टर विवेक तिवारी B.D.S (cal) से जानें बच्चों में टेढ़े दांतों के कारण और इस समस्या से बचाव के तरीकों के बारे में। 

टेढ़े दांतों का कारण 

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बच्चे के दांत और स्थायी दांत दोनों टेढ़े आ सकते हैं, या वे निकलने के बाद भी टेढ़े हो सकते हैं। बच्चे के दांत कभी-कभी टेढ़ी  स्थिति में चले जाते हैं जिसके कई कारणों में लंबे समय तक चलने वाली आदतें, जैसे कि अंगूठा चूसना या खिलौने चबाना जैसी आदतों से बच्चे के दांत बाहर निकलने लगते हैं और ये टेढ़े-मेढ़े दिखाई देने लगते हैं।

दांतों का टेढ़ापन आनुवंशिकी भी हो सकता है। बच्चे के दांत टेढ़े होने का मतलब यह नहीं है कि आपके बच्चे के स्थायी दांत टेढ़े होंगे। हालांकि, अगर बच्चे के ज्यादातर दांत एक साथ बढ़ते हैं, तो स्थायी दांतों में भी ये समस्या हो सकती है। यदि मुंह में आघात या दांतों की सड़न के कारण एक या एक से अधिक दांत स्वाभाविक रूप से जल्दी गिर जाते हैं, तो आने वाले स्थायी दांत सीधे के बजाय मसूड़ों से बाहर निकल सकते हैं।

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दांतों को प्रभावित करने वाले अन्य कारण 

जबड़े का आकार

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  • बच्चों के दांतों के टेढ़े होने के लिए जबड़े का आकार बहुत ज्यादा मायने रखता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारा विकसित, छोटा जबड़ा भीड़-भाड़ वाले, टेढ़े-मेढ़े और गलत संरेखित दांतों के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
  • आपके ऊपरी दांत आपके निचले दांतों पर थोड़ा फिट होने के लिए होते हैं, आपके ऊपरी दाढ़ के बिंदु आपके निचले दाढ़ के खांचे में फिट होते हैं। जब यह संरेखण नहीं होता है, तो कुरूपता का परिणाम होता है।
  • सामान्य मिसलिग्न्मेंट में ओवरबाइट और अंडरबाइट शामिल हैं। यदि आपको ओवरबाइट है , तो आपके सामने के ऊपरी दांत आपके सामने के निचले दांतों की तुलना में अधिक बाहर निकलते हैं।
  • यदि आपको अंडरबाइट होता है, तो आपके सामने के निचले दांत आपके ऊपरी सामने के दांतों की तुलना में अधिक बाहर निकलते हैं। 
  • यदि आपके माता-पिता में से एक या दोनों के दांत टेढ़े-मेढ़े थे, तो संभव है कि बच्चे के दांत भी टेढ़े होंगे।

खराब दंत चिकित्सा देखभाल

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दंत चिकित्सक द्वारा कम से कम सालाना बच्चे के दांतों की जांच न कराने का मतलब कभी-कभी यह हो सकता है कि मसूड़ों की बीमारी और गुहाओं जैसी समस्याओं का इलाज नहीं किया जाता है। इससे बच्चे में बचपन से ही टेढ़े दांत और अन्य दंत स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

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खराब पोषण

खराब पोषण, विशेष रूप से बच्चों में, दांतों की सड़न और खराब दंत विकास का कारण बन सकता है, जो टेढ़े दांतों के संभावित अग्रदूत हैं।

टेढ़े दांतों के कारण अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

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  • बच्चों के टेढ़े दांतों की वजह से अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले सकती हैं जैसे मसूढ़ों की बीमारी। टेढ़े-मेढ़े दांतों के बीच सफाई करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इससे दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी हो सकती है। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो मसूड़ों की बीमारी से पीरियोडोंटाइटिस हो सकता है, या एक अधिक गंभीर संक्रमण जो हड्डियों और दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • टेढ़े-मेढ़े दांत खाने को ठीक से चबाने में बाधा डाल सकते हैं, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और खराब पाचन किसी नयी बीमारी का कारण बन सकता है। 
  • टेढ़े-मेढ़े दांत भी दांतों, मसूड़ों और जबड़े की मांसपेशियों पर अधिक टूट-फूट का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप फटे दांत, जबड़े में खिंचाव, टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट डिसऑर्डर और पुराने सिरदर्द का कारण हो सकते हैं।

कैसे पाएं टेढ़े दांतों से छुटकारा 

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  • अगर बच्चों के दूध के दांत गिरने के बाद बाद निकलने वाले पक्के दांत भी टेढ़े -मेढ़े हैं तो, उन्हें ब्रेसेज या तार लगाकर सीधा किया जा सकता है तार टेंपरेरी या परमानेंट दोनों तरह से ही लगाई जा सकती है। इसके लिए आप डेंटिस्ट की सलाह ले सकती हैं। स्थाई तौर पर तार लगाने से दातों पर दबाव पड़ता है जिससे दांत सही जगह पर सेट हो जाते हैं और टेढ़े नज़र नहीं आते हैं। 
  • यदि आप बच्चे के दांतों में ऑर्थोडॉन्टिक्स ट्रीटमेंट लेती हैं, तो ट्रीटमेंट के बाद बच्चे को कुछ भी मीठा जैसे चॉकलेट खाने से रोकें और ठन्डे खाद्य पदार्थों के सेवन से भी बचाएं। इससे दांत बहुत जल्द सही आकर में आ जाते हैं।  
  • वैसे तो किसी भी उम्र में टेढ़े दांतो का इलाज करवाया जा सकता है लेकिन बचपन से ही यदि दातों को टेढ़ी होने से बचाया जाए तो यह एक बेहतर विकल्प होता है। क्योंकि कम उम्र में जबड़े बहुत ही मुलायम होते हैं और इसे और दातों को आसानी से टेढ़े होने से बचाया जा सकता है और इन्हें सही आकार में लाया जा सकता है।

रखें इन बातों का ध्यान

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अगर आप बच्चे के टेढ़े दांतों का इलाज करवा रही हैं तो समय-समय पर डेंटिस्ट की सलाह लेनी जरूरी है। जिससे बच्चों में किसी नई तरह की कोई बीमारी की आशंका ना रहे टेढ़े मेढ़े दांतो के ट्रीटमेंट के बाद उसे ऐसे ही छोड़ देने से दांतो के सीधे होने की संभावना कम हो जाती है और टेढ़े -मेढ़े दांत हमेशा के लिए स्थाई हो जाते हैं।

बच्चों की कुछ आदतों को छुड़वाएं 

  • यदि आपके बच्चे में अंगूठा चूसने या चीजों को मुंह में डालने जैसी गलत आदतें हैं जिनकी वजह से दातों का आकार टेढ़ा मेढ़ा हो रहा है, तो पहले उन आदतों को छुड़ाने की कोशिश करें।
  • यदि बच्चे में नाक की जगह मुंह से सांस लेने की आदत है तो इस आदत को भी दूर करना जरूरी है क्योंकि इससे ऊपर वाले दांत बाहर की तरफ निकलने लगते हैं। 
  • अगर आपके बच्चे के दूध वाले दांत समय पर नहीं टूटते हैं तो आप तुरंत डेंटिस्ट के पास जाएं और दूध का दांत निकलवा दें। जिससे नीचे से आने वाले नए दांत सही आकार ले सकें। 

इन टिप्स को अपनाकर बच्चों में टेढ़े मेढ़े दांतों की समस्या से छुटकारा तो पा सकती हैं, साथ ही उनकी मुस्कान में भी चार चांद लगा सकती हैं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik and unsplash