तनाव की तुलना में डिप्रेशन एक गहरी और ज्यादा गंभीर समस्या है और यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है, व्यक्ति की रुचि उन सभी चीजों में ख़त्म होने लगती है, जिसे वह पसंद करता है। इससे व्यक्ति के दैनिक जीवन, कामकाज और उसके व्यवहार पर नेगेटिव असर पड़ता है और उसके अंदर काफी बदलाव देखे जा सकते हैं। 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे होता है और इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोजमर्रा का तनाव डिप्रेशन में कैसे बदल जाता है और डिप्रेशन को अपनी जिंदगी से दूर करने के लिए क्या करना चाहिए। 

इसी बारे में हमने यूनाइटेड वी केयर की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर श्वेता शर्मा से बात की। उन्होंने हमें विस्तार से बताया कि कब साधारण चिंता भी विकराल रूप ले सकती है और कैसे हमें खुद को डिप्रेशन से बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए। 

कैसे तनाव बनता है डिप्रेशन?

हर इंसान को रोज़ाना कई तरह के तनाव से जूझना पड़ता है। नौकरी की चिंता, बच्चों की पढ़ाई की चिंता, रिश्ते-नाते से जुड़ी परेशानियां, दोस्तों से जुड़ी परेशानियां, रिलेशनशिप की समस्याएं आदि। अगर किसी के अंदर चिंता या तनाव ज्यादा समय तक रहता है तो वह डिप्रेशन का रूप ले लेता है और इसी वजह से व्यक्ति महीनों या सालों तक परेशान रहता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा हताश, उदास रहता है और लोगों से दूरी बनाए रहता है और अकेले रहना ही ज्यादा पसंद करता है। 

graphic psychologist

रोज़ाना का तनाव अगर हमें बहुत परेशान कर रहा है और हमारी जिंदगी में इसका उल्टा असर पड़ रहा है तो इससे बचने की जरूरत है। किसी चीज़ के लिए चिंता करना एक बात है, लेकिन अगर हम लंबे समय तक निगेटिविटी से घिरे रहेंगे तो डिप्रेशन की चपेट में आ सकते हैं। इसका ट्रीटमेंट बहुत जरूरी है क्योंकि ऐसा न करने पर सुसाइडल ख्याल मन में आ सकते हैं। 

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डिप्रेशन से कैसे बचें?

अगर आप डिप्रेशन से बाहर आना चाहते हैं तो इसमें सबसे पहले आपको खुद की मदद करनी होगी। इस विषय पर अपने करीबी लोगों या डॉक्टर से खुलकर बात करें। साथ ही अपने रोज के कामो में और अपनी रोज़ाना जिंदगी में कुछ पॉजिटीविटी लेकर आएं, खुद को हमेशा किसी न किसी काम में व्यस्त रखिए जिससे आपको उस बारे में सोचने का वक्त ही न मिले। आपको अपनी सेहत का सबसे पहले ख्याल रखना है और खुद के लिए हर रोज समय निकालना है। अब सवाल ये है कि डिप्रेशन के रहते आप यह सब कैसे करेंगे, आइए जानते हैं : 

करीबी लोगों से बात करें-

अगर आप किसी तरह के डिप्रेशन को झेल रहे हैं, तो इससे बाहर आने के लिए रोज किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिनसे बात करना आपको पसंद है और आप उसपर बहुत अधिक भरोसा भी करते हों। यह तरीका हर तरह के डिप्रेशन से रोगी को निकाल सकता है। आप खुलकर अपनी समस्या के बारे में उससे बात करें। आप इस बात की चिंता बिल्कुल न करें कि लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे, क्योंकि अपनों से मदद लेने में शर्म या संकोच नहीं करनी चाहिए। ऐसे वक्त पर ही लोगों की पहचान होती है कि कौन आपके साथ है और कौन नहीं।

depression from home

व्यायाम और योग करें- 

प्रतिदिन व्यायाम या योग डिप्रेशन को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। जब हम एक्सरसाइज करते हैं तब टेस्टोस्टेरोन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन्स हमारे शरीर से निकलते हैं और ये हमारे दिमाग को स्थिर बनाते हैं। इससे दिमाग में डिप्रेशन को बढ़ाने वाले नेगेटिव विचार आने कम हो जाते हैं। एक्सरसाइज और योग करने से न केवल मानसिक और शारीरिक मज़बूती आती है बल्कि शरीर में पॉजीटिव एनर्जी का संचार भी होता है। इससे काफी हद तक मानसिक तनाव कम हो सकता है। 

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पौष्टिक आहार लें- 

जब व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो उसके भोजन में कमी आ जाती है या फिर वह भोजन करना ही छोड़ देता है । एक पौष्टिक आहार हर इंसान की शारीरिक और मानसिक स्थिति को संतुलित बनाए रखने के लिए बहुत ज़रुरी है क्योंकि पौष्टिक और संतुलित आहार से आपका स्वास्थ्य जहां एक ओर अच्छा बना रहता है वहीं आपका मन भी हमेशा खुश रहता है। इसलिए अगर आप या कोई दूसरा तनाव या डिप्रेशन में है तो उसके पसंदीदा भोजन का पूरा ख्याल रखें ।

क्रिएटिव बनें- 

शोध बताते हैं कि इंसान के अंदर नेगेटिव विचार तभी आते हैं, जब उसके पास करने को और कुछ नहीं होता। इसलिए अगर आपके पास खाली समय है तो उसका उपयोग अपनी क्रिएटीविटी के लिए करें । ऐसे काम करें, जिन्हें करने से आपको खुशी मिलती है। जैसे अगर आपको लिखने का शौक है तो आप यह कर सकते हैं कि एक डायरी पर वह सब कुछ लिख डालें जो आपके मन और मस्तिष्क में भावनाओं के रुप में बसा हुआ है। आपको बस खुद को समझना है और किसी को नहीं। अपने पेन से एक डायरी पर कुछ न कुछ क्रिएटिव लिखने का प्रयास करें, इससे आप जल्द ही इस स्थिति से बाहर निकल जाएंगे। 

नकारात्मक लोगों से दूरी बना लें-  

हम सभी के पास कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हर स्थिति में हमें समझते हैं और हमारा साथ देते हैं। ऐसे लोगों से बात करके हमेशा शांति मिलती है। डिप्रेशन के समय में जब हम अकेला महसूस करते हैं ऐसे में अगर कोई हमारे मन में चल रही बातों और भावनाओं को समझे या सुने तो हमें बहुत अच्छा लगता है। अपने आसपास ऐसे पॉजीटिव लोगों से जुड़ें और साथ-साथ आप उन लोगों से दूर हो जाएं जो हमेशा खुद परेशान रहते हैं या नेगेटिव बातें करते हैं क्योंकि ऐसे लोग खुद के साथ-साथ अपने आस-पास के लोगों में भी नेगेटिविटी भर देते हैं। 

depression from office

अपने काम और नौकरी को मैनेज करें- 

डिप्रेशन के कई मामले ऑफिस स्ट्रेस से जुड़े होते हैं। ऑफिस में कर्मचारियों को ख़ुश रखने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं लेकिन आजकल ऑफिस का स्ट्रेस इतना बढ़ गया है कि व्यक्ति घर पर भी उसी स्ट्रेस का शिकार रहता है। अगर आप अपने ऑफिस की जिंदगी को लेकर चिंता या तनाव महसूस करते हैं तो इस विषय पर फौरन सोचें, क्योंकि हो सकता है कि आपकी नौकरी ही आपके डिप्रेशन की असली वजह हो। 

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छुट्टियां लें, बाहर निकलें- 

घर, ऑफ़िस, शहर और वही रोज़ वाली जिंदगी। अगर लंबे वक्त तक ऐसा ही चलता रहता है तो जिंदगी बहुत बोर लगने लगती है और स्ट्रेस पैदा होता है। ऐसे में थोड़ा रोमांच और नयापन बहुत ज़रुरी हो जाता है। आपके मन में एक तरह की नेगेटिविटी पैदा होती है और फिर यही डिप्रेशन का कारण बनता है। इसलिए अपनी नौकरी और दूसरे काम-काज के साथ थोड़ा एन्जॉय भी करें। हवा-पानी बदलने से आपके मन में चल रहे नेगेटिव विचार दूर हो जाते हैं। 

पूरी और अच्छी नींद लें- 

अच्छी नींद हमेशा एक स्वस्थ और एक्टिव व्यक्ति की पहचान होती है। एक अच्छी नींद मन के नकारात्मक विचारों को कम करने में मददगार होती है। शोध में यह बात सामने आई है कि रोज़ाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन के लक्षण कम होते हैं। इसलिए अगर आप चिंता में हैं या बहुत बिज़ी रहने की वजह से अपनी नींद पूरी नहीं करते तो इस बुरी आदत को छोड़ दें। आपके डिप्रेशन की समस्या का समाधान एक अच्छी गहरी नींद हो सकती है। 

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