सोचिए अगर आप पर कोई चोरी का आरोप लगाए जो आपने की भी न हो या कोई मिथ्या आरोप आपके सिर मढ़ दिया जाए। आप सोच रही होंगी कि आखिर ऐसा होगा क्यों? मगर, पुराणों की मानें तो ऐसा हो सकता है अगर आपने गणेश चतुर्थी की रात चांद देख लें तो। जी हां, ज्योतिषाचार्य पंडित दयानंद शास्त्री जी की मानें तो, ‘एक दफा गणेश जी के लंबोदर और गजमुख को देखकर चांद को हंसी आ गई। गणेश जी इससे नाराज को गए और चांद से कहा कि तुम्हें अपने रूप का अहंकार हो गया है इसलिए अब तुम्हारा क्षय हो जाएगा। जो भी तुम्हें देखेगा उसे कलंक लगेगा इसलिए गणेश चतुर्थी और गणेश चौथ का चांद नहीं देखना चाहिए।’ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि, ‘ पुराणों में इस कहानी का जिक्र मिलता है कि एक बार गणेश चतुर्थी का चांद भगवान श्री कृष्ण ने देख लिया था उनको भी समयन्तक मणी चोरी करने का आरोप से कलंकित होना पड़ा था। ’
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गणेश चतुर्थी के चांद को लेकर भगवान श्री कृष्ण की जिस कहानी के बारे में ज्योतिषाचार्य बात कर रहे हैं उसकी एक कथा प्रचलित है। ‘शास्त्रों के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने अनजाने में चांद को देख लिया था। इसका परिणाम यह हुआ कि उन पर एक व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा। भगवान श्री कृष्ण को इस आरोप से मुक्ति पाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। नारद जी से जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने ऊपर लगे झूठे आरोपों का कारण पूछा तब नारद जी ने श्री कृष्ण भगवान से कहा कि यह आरोप भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चांद को देखने के कारण लगा है। इस चतुर्थी के दिन चांद को देखने से कलंक लगने की वजह नारद जी ने यह बताई की, इस दिन गणेश जी ने चन्द्रमा को शाप दिया था।’इन मंत्रों के साथ करेंगी गणेश जी की स्थापना तो पूरी होगी मनोकामना
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कथा यहीं समाप्त नहीं होती है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं, ‘गणेश जी के शाप से चन्द्रमा दुःखी हो गये और घर में छुप कर बैठ गये। चन्द्रमा की दुःखद स्थिति को देखकर देवताओं ने चन्द्रमा को सलाह दिया कि मोदक एवं पकवानों से गणेश जी की पूजा करो। गणेश जी के प्रसन्न होने से शाप से मुक्ति मिलेगी। तब चन्द्रमा ने गणेश जी की पूजा की और उन्हें प्रसन्न किया। गणेश जी ने कहा कि शाप पूरी तरह समाप्त नहीं होगा ऐसा इसलिए क्योंकि अपनी गलती चन्द्रमा को हमेशा याद रहे। इससे गणेश जी ने दुनिया को भी यह ज्ञान दिया कि किसी के रूप रंग पर हंसना अपराध है। तब से इस दिन जो भी चांद देखता है, उसे भगवान गणेश के प्रकोप का सामना करना पड़ता है।’गणेश चतुर्थी पर घर में कर रही हों गणेश जी की स्थापना तो इन 5 बातों का रखें खास ख्याल
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार यदि भूल से चंद्र दर्शन हो जाये तो उसके निवारण के निमित्त श्रीमद्भागवत के 10वें स्कंध, 56-57वें अध्याय में उल्लेखित स्यमंतक मणि की चोरी कि कथा का श्रवण करना लाभकारक हैं। जिससे चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक का ज्यादा खतरा नहीं होगा।घर में लाएं गणपति की ऐसी प्रतिमा, जो पूरी कर दे सारी मनोकामनाएं
चांद को देखते समय इस मंत्र को पढ़ना चाहिए-
सिहः प्रसेनमवधीत सिंहो जाम्बवता हतः । सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ॥
इतना ही नहीं आपकेा भगवान गणेश को ख़ुश करने के लिए ‘ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र का जप करने और गुड़ मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढ़ती है ।
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