8 साल पहले देश की राजधानी दिल्‍ली में हुए निर्भया रेप केस में आखिरकार पीड़िता और उसके परिवार को इंसाफ मिल ही गया। इंसाफ पाने की लंबी जंग का अंत 20 मार्च 2020 को हुआ। निर्भया के चारों दोषियों को दिल्‍ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई। 6 में से एक आरोपी ने पहले ही आत्‍महत्‍या कर ली थी और 1 आरोपी नाबालिग होने के कारण पहले ही जेल से रिहा हो चुका है।  

निर्भया को तो इंसाफ मिल गया, मगर देश में आज भी कई ऐसी पीड़िता और पीड़ित के परिवार हैं, जो इंसाफ पाने की लड़ाई में अपना सब कुछ गवां चुके हैं। निर्भया केस के बाद सरकार ने देश के कानूनी ढांचे को बदलने और महिलाओं की सुरक्षा में बड़े बदलाव लाने की जो बड़ी-बड़ी बातें कहीं थीं, वह आज किसी ठंडे बस्‍ते में पड़ी धूल-मिट्टी चाट रही हैं। हालांकि, महिलाओं की सुरक्षा के लिए नए कानून बनाए गए, मगर यह कानून भी महिलाओं को सुरक्षा दे पाने में असक्षम रहे। इतना ही नहीं, रेप के मामलों में आज भी पीड़िता और उसके परिवार को कोर्ट-कचहरी की सुनवाई में चप्‍पलें घिसनी पड़ती हैं। 

 आज हम आपको निर्भया केस के बाद देश में घटे कुछ ऐसे ही रेप केसेस के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में सुन कर आपका भी कलेजा फट जाएगा- 

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1. बदायूं रेप केस, मई 2014 

बदायूं जिले के गांव कटरा शहादतगंज में 27 मई 2014 की रात बेहद खौफनाक थी। यहां एक साथ एक ही परिवार की दो चचेरी बहनों के शव गांव वालों को एक ही आम के पेड़ की दो अलग-अलग शाखाओं पर लटके मिले थे। इस घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया था। दलित परिवार की 14 और 15 वर्ष की उम्र की दो बेटियों की बेरहमी से हत्‍या कर दी गई थी। जब दोनों शवों का पोस्‍टमार्टम कराया गया, तब पहले पोस्‍टमार्टम में बलात्‍कार और हत्‍या के साक्ष्‍य मिलने की बात कहीं गई मगर जून 2014 में यह केस जैसी ही सीबीआई के हाथों पहुंचा मामले की पूरी कहानी को ही पलट दिया गया। सीबीआई ने इस केस की फाइल को 6 महीनें में यह कर बंद कर दिया कि न तो लड़कियों का बलात्‍कार हुआ था और न ही उनकी हत्‍या की गई थी बल्कि लड़कियों ने बदनाम होने के डर से आत्‍महत्‍या की थी। 

लड़कियों को बदनाम होने का डर इसलिए था क्‍योंकि दोनों बहनों में बड़ी बहन को गांव के एक व्‍यक्ति ने 19 वर्ष पप्‍पू यादव के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था।  इसके बाद इस केस के मुख्‍य अभियुक्‍त पप्‍पू यादव को भी सभी इलजामों से बरी कर दिया गया था। मगर लड़कियों का परिवार शांत नहीं बैठा। पीड़ित परिवार ने बदायूं की पॉक्सो अदालत में 'क्लोज़र रिपोर्ट' को ख़ारिज किए जाने की याचिका दाख़िल की। नौ महीने बाद अदालत ने परिवार के हक़ में फ़ैसला देते हुए अक्तूबर 2015 में सीबीआई की 'क्लोजर रिपोर्ट' खारिज कर दी और मुख्य अभियुक्त पप्पू यादव को दोबारा पकड़ लिया गया। मगर एक रात जेल में काटने के बाद ही पप्‍पू का जमानत दे दी गई।  

साल 2016 में पीड़ित परिवार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दोबारा से पप्‍पू और अन्‍य अभियुक्‍तों को पकड़ने की मांगी की। तब से इस केस में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है। चार साल के बाद सुनवाई अब भी चल ही रही है। इस साल कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने केस की गति और धीमी कर दी है। 

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2. कठुआ रेप केस, जनवरी 2018 

जम्‍मू और कश्‍मीर के कठुआ इलाके के पास मौजूद रासाना गांव में 10 जनवरी 2018 को एक 8 साल की बच्‍ची आसिफा बानो के गुम होने की खबर आई थी इसे बाद 17 जनवरी को उसका शव मिला, जिसके बाद पूरे गांव में तहलका मच गया। पोस्‍टमार्टम की रिपोर्ट में साफ हो गया कि आरोपियों ने बच्‍ची का अपहरण किया और उसे नशीली दवा खिला कर कई दिनों तक सामूहिक बलात्‍कार किया और बाद में उसकी हत्‍या कर दी। इस सनसनीखेज गैंग रेप के बाद देश भर के लोगों का गुस्‍सा फूट पड़ा। निर्भया केस के बाद यह देश का दूसरा बड़ा मामला था जब सोशल मीडिया से लेकर देश की सड़कों तक में लोगों ने आसिफा को इंसाफ मिलने की गुहार लगाई। 

इस केस में मुख्‍य अभियुक्‍त पूर्व सरकारी अधिकारी सांजी राम था, जिसे पठानकोट की फास्ट ट्रैक अदालत उम्र क़ैद की सज़ा दे चुकी है। 10 जून 2019 को आए एक विशेष अदालत के फैसले में इस मामले से जुड़े 7 में 6 आरोपियों को दोषी करार दिया गया और 3 को उम्र कैद और 3 को पांच साल की सजा सुनाई गई। वहीं 1 आरोपी को नाबालिग होने की वजह छोड़ दिया गया। हालांकि, कोर्ट के फ़ैसले के बाद पीड़िता की मां ने मुख्य अभियुक्त सांझी राम को फांसी देने की मांग की थी। 

3. हैदराबाद गैंगरेप केस, नवंबर 2019 

28 नवंबर 2019 को भी देश के हैदराबाद शहर के शादनगर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। इस केस में जानवरों की एक डॉक्‍टर से 4 लोगों ने सामूहिक बलात्‍कार किया और फिर उसकी निर्मम हत्‍या कर दी। 

इस चौंका देने वाले केस ने देश भर में तहलका मचा दिया। हालांकि शुरुआत में हैदराबाद पुलिस मामले की जांच पर ढिलाई दिखाई, मगर देश की जनता ने जब इंसाफ के लिए हंगामा मचाया तो 24 घंटे के अंदर ही चारों आरोपियों को पकड़ लिया गया और 6 दिसंबर को ही चारों को पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया। चारों आरोपियों के मारे जाने के बाद हैदराबाद पुलिस प्रशासन की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ की गई, मगर साथ ही लोगों ने इस एनकाउंटर को फेक भी कहा और पुलिस पर केस के प्रेशर के तहत आरोपियों को मारने का आरोप भी लगाया।  

इस रेप केस में आरोपियों ने पीड़िता के साथ रेप कर उसकी हत्‍या की और फिर उसके शव को पैट्रोल डाल कर जला दिया था। उस लिहाज से देखा जाए तो पुलिस प्रशासन ने आरोपियों को बहुत ही आसान मौत दे केस को रफा-दफा कर दिया। 

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4. हाथरस गैंगरेप केस, सितंबर 2020 

हाथरस गैंगरेप घटना को हुए अभी ज्‍यादा वक्‍त नहीं बीता है। 14 सितंबर 2020 को हाथरस से सटे एक गांव में 20 वर्ष की एक युवती के साथ गैंगरेप किया गया। इस गैंगरेप में हैवानों ने युवती के शरीर को इतना यातनाएं दीं कि जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा फट जाएगा। घटना के बाद पीड़िता को इलाज के लिए दिल्‍ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। यहां जिंदगी और मौत के बीच की जंग में जीत मौत की हुई और 29 सितंबर को युवती ने दम तोड़ दिया। 

इसके बाद जो हुआ वो और भी ज्‍यादा खौफनाक था। युवती की मौत के बाद शव को परिवार के हवाले करने की जगह यूपी पुलिस ने कथित तौर पर परिवार को एक कमरे में बंद कर युवती के शव को खेत में जला दिया। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए थे, जिन्‍हें देख कर लोगों में इस घटना और पुलिस की कार्यवाई की प्रक्रिया को लेकर गुस्‍सा फूट पड़ा था। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल सीबीआई इस केस की जांच कर रही है.

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