महिलाओं के लिए भारत दिन पर दिन अनसेफ होता जा रहा है। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि देश में मेहिलाओं के साथ हो रही रेप की घटानाओं के आकड़ें इस ओर इशारा कर रहे हैं। आपको यह बात जान कर हैरानी होगी वर्ष 2017 में रेप के 32500 केस दर्ज किए गए थे। अगर सरकार के मोस्‍ट रीसेंट डाटा पर गौर फरमाया जाए तो हर दिन भारत में 90 रेप की घटनाएं होती हैं। नैशनल क्राइम ब्‍यूरो के रिकॉर्ड्स के मुताबिक वर्ष 2017 से भारतीय कोर्ट में रेप के 12800 केस कोर्ट मे ट्रायल के‍लिए पेंडिंग पड़े हैं। वर्ष 2017 में कोर्ट ने केवल 18300 रेप केस ही डिसपोज ऑफ किए थे बाकी साल के अंत तक 127800 रेप केस पेंडिंग ही छोड़ दिए गए थे। अगर वर्तमान समय की बात करें तो कुछ ही दिन पहले तेलंगाना और उन्‍नाव में दिल देहला देने वाली रेप की घटनाएं हुईं। दोनों ही घटनाओं में रेप विकटिम की डेथ भी होगई।

जबकि वर्ष 2012 में हुए निर्भया रेप केस के बाद महिलाओं की सिक्‍योरिटी को ध्‍यान में रखते हुए बहुत सारे कानून बनाए गए थे। इन सभी कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए दिन पर दिन रेप जैसे संवेदनशील अपराध को अंजाम दिया जा रहा है। विडंबना तो यह है कि रेप की घटना के बाद रेप विकटिम या उसके परिवार वालों को और भी ज्‍यादा हैरस किया जाता है। हैरेसमेंट की यह शुरुआत होती है वारदात की एफआईआर दर्ज कराने से।

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Police Not Taking Action On Fir

जी हां, रेप की वारदात के बाद सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत विकटेम और विकटेम की फैमिली को वारदात की एफआईआर लिखवाने में आती है। जबकि यह किसी भी विकटिम का अधिकार है कि वह अपने साथ हुई घटना के बारे में पुलिस को जानकारी दे और पुलिस पर उस पर कारवाई करे। हालही में तेलंगाना रेप केस में कुछ ऐसी दिक्‍कतों का सामना किया विकटिम की फैमिली ने जब उनसे पुलिस स्‍टेशन पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि आपको उस पुलिस स्‍टेशन में घटना की एफआइ्रआर दर्ज करानी चाहिए जिस क्षेत्र में घटना हुई। बहुत समय तक विकटिम की फैमिली केवल एफआईआर दर्ज कराने के लिए ही एक पुलिस स्‍टेशन से दूसरे पुलिस स्‍टेशन के धक्‍के खाती रही। जबकि कनूनी तौर पर किसी भी अपराधिक घटना की एफआईआर विकटिम या उसकी फैमिली अपने नजदीकी थाने में लिखवा सकती है उसके बाद यह काम उस पुलिस स्‍टेशन का है कि वह संबंधित थाने तक घटना की सूचना दे।एक्ट्रेस एकावली खन्ना के लिए घरेलू हिंसा के ये हैं मायने, 24 साल की उम्र में झेला था तलाक का दंश

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ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि यह बात खुद सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट कमलेश जैन ने कहीं है। वह कहती हैं, ‘यह भी एक अपराध है कि किसी भी पुलिस थाने में विकटिम या उसके परिवार को यह कह कर लौटा दिया जाए कि वह एफाआईआर दर्ज इसलिए नहीं करेंगे क्‍योंकि यह मामला उनके थाना क्षेत्र का नहीं है। इस बात के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश सुना चुका है कि पुलिस स्‍टेशन कोई भी हो मामले की एफआईआर दर्ज हाने के बाद यह उसका काम होगा कि वह उसे संबंधित थाने तक पहुंचा दे और त्‍वरित कारवाई की जाए।’ गर्ल्स PG में कितनी सुरक्षित रहती हैं लड़कियां? एक्सपर्ट से जानें भारत में किरायदार को मिलते हैं क्या कानूनी अधिकार

Women Safety Toolkit anuradha shankar

दिसंबर 9, 2019 को दिल्‍ली में सेफ्टी ट्रस्‍ट ने  UN Women India, Twitter India, Manupatra & Jagran New Media के साथ मिल कर रेप सरवाइवर्स के लिए सेफ्टी टूल किट लॉन्‍च की थी। इस अवसर में पैनालिस्‍ट के तौर पर मौजूद आइपीएस अनुराधा शंकर से जब पूछा गया कि अगर पुलिस एफआई आर दर्ज नहीं करती हैं तो क्‍या किया जाए? इस पर उन्‍होंने ने कहा, ‘100 नंबर डायल करके आपको उस अधिकारी की शिकायत कर देनी चाहिए। साथ ही आपको अपनी रिपार्ट भी 100 नंबर पर ही दर्ज करवा देनी चाहिए। 5 महिलाओं ने तोड़ी खामोशी और कहीं अपनी आपबीती

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आपकी रिपोर्ट दर्ज होने के साथ रिकॉर्ड भी होगी और इसका एक नंबर आपके मोबाइल पर आएगा जिससे आप उसका स्‍टेटस भी देख सकते हैं। ’इस अवसर पर एक पैनालिस्‍ट एडवोकेट निपुन सक्‍सेना भी थे। उन्‍होंने एफआईआर दर्ज करवाने में होने वाली एक और बड़ी समस्‍या को उजागर किया। उन्‍होंने कहा, ‘एफआईआर दर्ज कराते वक्‍त जब विकटिम का नाम, घर का पता, विटनेस का नाम और उसके घर का पता पूछा जाता है तो दिक्‍कतें वहीं से शुरू हो जाती हैं। उन्‍हें कोई भी आसानी से ट्रैक कर सकता है।’ 

अगर एफआईआर दर्ज कराने में यदि आपको कोई दिक्‍कत का सामना करना पड़ तो आप एडवोकेट कमलेश जैन और आईपीएस अनुराधा शंकर की उपर बताई बातों को जरूर ध्‍यान में रखें। यह बातें आपको केवल रेप जैसे घिनौने अपराध के लिए ही नहीं बल्कि किसी भी तरह के अपराध की एफआईआर लिखवाते वक्‍त ध्‍यान में रखनी होंगी। इसके साथ ही आप चाहें तो ऑनलाइन भी एफआईआर बुक करवा सकती हैं।