निर्भया, तेलंगाना और उन्नाव रेप केस के बाद भी इस तरह की घिनौनी घटनाओं का सिलसिला नहीं रुका है। बेशक अब इन मामलों में लोगों की सोच बदली है और रेप सर्वाइवर की जगह रेपिस्‍ट को लोग दबोचते हैं, पुलिस भी अब इन मामलों में त्वरित एक्शन लेती नजर आती है। मगर, एक वक्त वो भी था जब रेप सर्वाइवर पर ही पूरी घटना का दोष मढ़ दिया जाता था। उसी वक्त के एक दिल दहला देने वाले रेप केस के बारे में सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट कमलेश जैन बताती हैं।

 केस इस प्रकार है:  

कहानी है हजारीबाग की रहने वाली एक आदिवासी लड़की की जो पुलिस स्टेशन में ही काम करती थी। वर्ष 1990 के आसपस का केस है। एक आम सा दिन था, रोज की तरह वह अपनी ड्यूटी पूरी करके घर के लिए निकल रही थी। तब ही उसे उसी थाने में ड्यूटी करने वाले पुलिस अफसर ने साथ में चलने के लिए कहा। वह उसे उसके घर तक लिफ्ट देना चाहता था। लड़की तैयार हो गई। पुलिस की जीप में सवार हो वह अपने घर की ओर ही जा रही थी। जीप में लिफ्ट देने वाले अफसर के अलावा एक और पुलिस अफसर था। दोनों से ही वह भली भांति परिचित थी क्योंकि वह साथ ही में काम करते थे और रोज ही मिलना जुलना होता था। मगर, उस दिन कुछ अलग हुआ। जीप में साथ बैठे दूसरे अफसर का घर रास्ते में ही था। वह लड़की का घर आने से पहले ही अपने घर पर उतर गया। उतरते वक्त उसने लड़की को कहा कि उसकी बीवी ने उसे याद किया है। क्यों न आज ही वह उससे मिल ले। लड़की पुलिस अफसर की वाइफ से मिलने के लिए तैयार हो गई। लड़की ने जैसे ही पुलिस अफसर के घर में प्रवेश किया उसने देखा कि पहले से ही वहां एक और पुलिस अफसर मौजूद है। आगे उसके साथ क्या होने वाला था इस बात का तो उसे कोई अंदाजा भी नहीं था। दोनों ही अफसरों ने मिल कर उसका गैंग रेप किया। रेप के बाद लड़की से हाथापाई की गई और उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। वह किसी तरह से अपने घर पहुंची। यह खबर उस वक्त कई अखबारों में छपी मगर, इस घटना की कोई भी एफआईआर फाइल नहीं की गई। HerZindagi ने Sayfty और UN Women के साथ की नई पहल: रेप विक्टिम्स के लिए लॉन्च की जाएगी टूलकिट

इसे जरूर पढ़े:  क्या कानून महिलाओं को रेपिस्ट्स को जान से मारने की इजाजत देता है? जानें क्या है सच

case study by  supreme court senior  advocate kamlesh jain video

उस दौरान कमलेश जी एक संस्था से जुड़ी थीं जो रेप सर्वाइवर्स के लिए काम करती थी। वह बताती हैं, ‘ मैं जिस संस्था से जुड़ी थी उसने मुझे इस केस को रिजॉल्व करने के लिए भेजा था। मैं उस एरिआ के एसएचओ और सीनियर ऑफिसर से मिली। केस के बारे में पूछा। किसी को कुछ नहीं पता था। वह नाटक कर रहे थे अनजान बनने का। तब मैंने कहा कि आपको इस चेयर पर बैठने का अधिकार नहीं क्योंकि आपको अपने ही महकमे में हुई इस घटना के बारे में नहीं पता है। मैंने उनको एफआईआर फाइल करने के लिए कहा तो उन्होंने इसके लिए भी मना कर दिया। तब मैं उस रेप पीड़िता के पास गई। मैंने कई रेप केस के बारे में सुना था मगर, पहली बार मैनें किसी रेप सर्वाइवर को इतना करीब से देखा था। वह एक स्टोर रूम में मुंह छुपाए बैठी थी और उसके शरीर पर कई घाव थे। उसे देख कर मैं रातभर नहीं सो पाई। मुझे एक बात बार-बार सता रही थी कि आखिर यह लड़की क्यों मुंह छुपा कर बैठी है। मुंह तो उन्हें छुपाना चाहिए जिन्होंने गलत काम किया है।’ डिलीवरी बॉय से सामान लेते हुए कितना सुरक्षित हैं आप?

Recommended Video

इसे जरूर पढ़े:  हैदराबाद रेप केस के आरोपी एनकाउंटर में मारे गए, क्या पुलिस ने भारी दबाव में लिया एक्शन, जानें

कमलेश जैन ने तब तय किया कि वह इस सर्वाइवर को न केवल इंसाफ दिलाएंगी बल्कि उसके खोए हुए आत्मविश्वास को भी वापिस लाएंगी। कमलेश बताती हैं, ‘मेरी जब उस लड़की से बात हुई तो मैंने उससे पूछा, ‘तुम ऑफिस गई की नहीं?’ उसने कहा, ‘किस मुंह से जाऊं ऑफिस’ फिर मैनें कहा, ‘उसी मूंह से जिससे पहले जाती थी। तुमने कोई गलत काम नहीं किया। तुम इस घटना को इस तरह से लो कि रास्ते पर चलते वक्त कोई एक्सीडेंट हुआ है। इस स्थिती में तुम क्या करती अस्पताल जाती। वैसे ही रेप एक एक्सीडेंट है और इसके लिए तुम्हें पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।’ निर्भया कांड 16 दिसंबर 2012: ये कानून दिलवा सकते हैं महिलाओं को इंसाफ, जाने एक्‍सपर्ट से

इस केस के लिए कमलेश ने रात दिन एक कर दिए और उस वक्त के  चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को केस से जुड़ी बातों को लिख कर एक चिटठ्ठी भेजी। उसके बाद केस की एफआईआर दर्ज हुई और दोनों अपराधी ऑफसरों को सजा हुई। वह लड़की भी ऑफिस जानें लगी। कमलेश जी बताती हैं, ‘तब से मैं सभी रेप सर्वाइवर्स को बोलती हूं कि रेप केस में शर्माने की जरूरत नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है और अब तो समाज और घर वाले भी पहले से ज्‍यादा रेप सर्वाइवार को सपोर्ट करते हैं। इसलिए हर लड़की को समाज और किसी की भी चिंता किए बगैर ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए और अपनी जिंदगी को खुल कर जीना चाहिए।’