यह तो हम सभी जानते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज के बिना मनुष्य के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ही समाज में रहकर व्यक्ति कई बार अपनी तुलना दूसरों से भी करने लगता है। हालांकि यह तुलना भले ही एक अच्छे भाव के साथ शुरू की गई हो, लेकिन कभी-कभी यह social comparison वास्तव में आपके लिए घातक होता जाता है। दरअसल, जब व्यक्ति खुद की तुलना दूसरों के साथ करने लगता है, तो वह अपने गोल्स से भटकने लगता है। इतना ही नहीं, social comparison उसके भीतर नकारात्मक भावनाओं का विकास करता है क्योंकि उसे लगता है कि वह कहीं कम है। ऐेसे में व्यक्ति अपनी अच्छाईयों की जगह कमियों को ज्यादा देखता है, जिसके कारण उसके मन में निराशा पैदा होने लग जाती है। वहीं दूसरी ओर, उसके भीतर दूसरों से ईर्ष्या व जलन भी होने लगती है। 

चूंकि इन दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यह social comparison सिर्फ आस-पड़ोस या जानने वालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर दूसरों को देखकर हम अनचाहे ही अपनी तुलना उनसे करने लग जाते हैं। अगर कोई कपल अपनी हैप्पी फोटोज पोस्ट करे तो हम सोचते हैं कि इनकी लाइफ कितनी अच्छी है। हमारी लाइफ इतनी अच्छी क्यों नहीं हो सकती।

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इस तरह छोटी-छोटी तुलना मन में निराशा पैदा करती है। कई बार तो दूसरों से खुद को अच्छा दिखाने की चाह उसके मन में एक तनाव व दबाव पैदा करती है। ऐसे में अगर आप इस social comparison के स्ट्रेस को खुद से दूर रखना चाहती हैं तो इसके लिए आप कुछ आसान उपायों को अपना सकती हैं-

तय करें समय

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सोशल मीडिया भले ही दूसरों के साथ कनेक्ट रहने का आसान जरिया हो, लेकिन अगर आपको ऐसा लग रहा है कि अब आप सोशल मीडिया पर दूसरों को देखकर अपनी तुलना उनसे करने लगे हैं, तो सबसे पहले आप सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को सुनिश्चित करें। आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें, लेकिन उसका जरूरत से ज्यादा उपयोग करने से बचें।

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समझें ट्रिगर

social comparison stress trigger

आजकल हर व्यक्ति सोशल मीडिया से किसी ना किसी तरह से जुड़ा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति अपनी तुलना दूसरों से करता है। इसलिए अगर आपको ऐसा लगता है कि आप social comparison करती हैं तो पहले उन ट्रिगर्स को पहचानने की कोशिश करें।

हो सकता है कि खास व्यक्ति की लाइफ आपको दूसरों के साथ इस होड़ में जोड़ती हो या फिर हमारी खुद की ही कुछ कमियां सोशल तुलना का कारण बनती हैं। इसलिए पहले उन ट्रिगर्स को पहचानें। जब आप उन्हें पहचान लेंगे तो आपके लिए उससे बाहर निकलना आसान हो जाएगा।

फैमिली को दें ज्यादा वक्त

social comparison stress family time

कहा जाता है कि व्यक्ति अपने दुख से नहीं, दूसरों के सुख से ज्यादा परेशान रहता है। ऐसा होता ही है। जब हम अपने सामने किसी को हमसे ज्यादा खुश देखते हैं तो मन में एक जलन की भावना पैदा होती है और हम अनचाहे ही उनसे तुलना करने लग जाते हैं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप सोशल मीडिया की जगह अपनी फैमिली, दोस्तों व करीबियों को अधिक समय दें।

तय करें अपने गोल्स

social comparison stress goals

सोशल कंपेरिजन का एक सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि हम अपने गोल्स से भटकर दूसरों की लाइफ पर अधिक ध्यान देते हैं। लेकिन अगर आप इस होड़ से बाहर निकलना चाहती हैं तो आप पहले अपने माइंड को क्लीयर करें। कोशिश करें कि आप अपनी लाइफ के शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गोल्स लिखें।

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जब आपका माइंड पूरी तरह क्लीयर होगा तो आप दूसरों पर ध्यान देने की जगह अपने गोल्स पर फोकस करेंगी, जिससे आप खुद ब खुद social comparison से तनाव से बाहर निकल जाएंगी।