छोटे बच्चों का इम्युन सिस्टम काफी कमजोर होता है और इसलिए वह बड़ों की अपेक्षा काफी जल्दी बीमार होते हैं। खासतौर से, एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों के फीड संबंधी हर छोटी से छोटी बात का ख्याल मां को रखना होता है। फिर चाहे बात बोतल की हो या फिर टीट्स और सिपर्स की। वैसे तो शुरूआती छह महीनों में बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां द्वारा स्तनपान कराने की ही सलाह दी जाती है। लेकिन इसके बाद ठोस आहार के साथ-साथ महिलाएं बच्चों को बोतल से भी फीड करवाती हैं। ऐसे में आपके पास एक अच्छा स्टेरलाइज़र होना भी उतना ही जरूरी है। दरअसल, बोतल में बच्चे को फीड करवाने के लिए हम गर्म दूध डालती हैं और गर्म दूध  कीटाणुओं और जीवाणुओं के लिए प्रजनन भूमि साबित होता है, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य को काफी हानि होती है। वैसे भी इस उम्र में बच्चे का इम्युन सिस्टम इतना मजबूत नहीं होता कि वह इन कीटाणुओं से लड़ सके। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि बोतलें, सिपर्स, टीट्स, ब्रेस्ट पंप आदि से जीवाणुओं को खत्म करने के लिए हर उपयोग से पहले उसे स्टेरलाइज किया जाए। वैसे तो मार्केट में आपको कई तरह के स्टेरलाइज़र आसानी से मिल जाएंगे, लेकिन इनमें से किसी भी एक को चुनते समय आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। जो हम आपको इस लेख में बता रहे हैं-

कैपेसिटी

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स्टेरलाइजर खरीदते समय आपको सबसे पहले जिस बात पर ध्यान देना होता है, वह है स्टेरलाइजर की कैपेसिटी। हालांकि यह आपकी जरूरत पर आधारित होता है। मसलन, बोतल से फीड करने वाले बच्चों को स्तनपान करने वाले बच्चों की अपेक्षा अधिक बोतलों की जरूरत होती है। ठीक उसी तरह, वर्किंग मॉम को ब्रेस्ट पंप की जरूरत होती है, जिसे हर बार इस्तेमाल से पहले स्टेरलाइज किया जाना जरूरी है। इन स्थितियों में आपको ऐसा स्टेरलाइजर खरीदना चाहिए, जिसकी कैपिसिटी अधिक हो। आजकल ऐसे कई स्टेरलाइजर अवेलेबल हैं, जिनमें आप एक साथ छह से आठ बोतलों को स्टेरलाइज कर सकती हैं। इससे आपके समय की काफी बचत होती है।

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स्टोरेज 

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स्टेरलाइज़र खरीदने से पहले उसके स्टोरेज पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। कुछ स्टेरलाइज़र आपकी रसोई में बहुत सारी जगह घेर लेते हैं, जिससे खाना पकाने या फिर अन्य काम करने में काफी परेशानी होती है। इसके अलावा, एक बार जब आपके बच्चे को इसकी आवश्यकता नहीं होती है, तब इसे स्टोर करना एक परेशानी बन सकता है। इसलिए आप स्टेरलाइजर का ऐसा मॉडल चुनें, जो बहुत अधिक स्पेस ना लेता हो और इसलिए इसे कहीं पर भी रखना या स्टोर करना आसान हो। बेहतर होगा कि आपका स्टेरलाइज़र का साइज कुछ ऐसा हो, जिसे आप ट्रेवल के दौरान भी आसानी से कैरी कर सकें। (शिशु को 6 महीने तक पिलाना चाहिए मां का दूध)

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कम्पैटबिलिटी

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यह भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है, जिस पर ध्यान जरूर दिया जाना चाहिए। कुछ स्टेरलाइज़र केवल विशेष प्रकार की बोतलों के साइज के साथ काम करते हैं। ऐसे में जब बच्चा बड़ा होता है तो उसकी बोतल का साइज भी चेंज हो सकता है। इस स्थिति में आपके द्वारा चुना गया स्टेरलाइजर फिर किसी काम का नहीं रह जाता। (शिशुओं की स्वच्छता हैं ये 5 नियम) इसलिए आप ऐसे स्टेरलाइजर को चुनें, जो हर तरह की बोतल टाइप के साथ फिट बैठता हो। इससे बोतल या उसका साइज चेंज होने पर आपको कोई परेशानी नहीं होगी।

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क्लीनिंग

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जहां एक ओर स्टेरलाइज़र बच्चे की बोतलों से लेकर ब्रेस्ट पंप आदि को डिसइंफेक्ट करने में मदद करते हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हें भी डीप क्लीन करना बेहद जरूरी होता है। अगर इन्हें सही तरह से क्लीन ना किया जाए तो इससे उसमें कीटाणु पनपने लगते हैं। (सिंगल चाइल्ड की बेहतरीन परवरिश) लेकिन मार्केट में मिलने वाले कई स्टेरलाइजर के मॉडल ऐसे होते हैं, जिन्हें अच्छी तरह से क्लीन करना काफी मुश्किल होता है। इनके कई पार्ट्स ऐसे ही गंदे रह जाते हैं। इसलिए जब भी आप बच्चे के लिए स्टेरलाइजर चुनें, तो उसका मॉडल ऐसा होना चाहिए, जिसे क्लीन करना काफी आसानी हो।

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