हिंदू धर्म के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों का विशेष महत्त्व है। मुख्य रूप से साल में दो बार यह पर्व मनाया जाता है और नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। पहली नवरात्रि तिथि चैत्र महीने में पड़ती है जिसे चैत्र नवरात्र कहा जाता है और दूसरी नवरात्रि शरद ऋतु में मनाई जाती है जिसे शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है। दोनों नवरात्रि तिथियों का अलग महत्त्व और और पूरे नौ दिनों तक पूजा का अलग विधान है। नवरात्रि के दिनों के लिए कलश स्थापना का महत्त्व बहुत ज्यादा है। इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल, मंगलवार से आरम्भ हो रही है। 

आमतौर पर लोग कलश की स्थापना नवरात्रि के पहले दिन करते हैं और आखिरी दिन हवन होने के बाद इसका विसर्जन किया जाता है। यदि घर में कलश स्थापित करना है, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। अगर आप भी कलश स्थापित करने जा रहे हैं तो नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी बता रहे हैं कि कलश स्थापना से पहले क्या काम करने चाहिए जिससे घर में सुख समृद्धि का वास हो। 

घर की साफ़ सफाई 

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नवरात्रि के साथ-साथ भारतीय नववर्ष का आरंभ भी होता है, इसलिए प्रातःकाल उठकर घर की सफाई करें, घर को अच्छी तरह से पानी से धोएं। घर से ऐसा सामान जो काफी समय से प्रयोग में नहीं आया है या आपके काम का नहीं हो, उसे घर से बाहर निकालें। घर के दरवाजे पर आम, अशोक या फूलों के सुंदर बंधनवार लगाएं। यदि पिछले वर्ष माता की मिट्टी की मूर्ति स्थापित की हो, तो कलश स्थापना से पहले उसे विसर्जित करें।

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मंदिर की करें सफाई 

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कलश स्थापना से पूर्व पूरे मंदिर की अच्छी तरह से सफाई करें। इसके लिए सभी भगवान को स्नान कराकर सुंदर पोशाक पहनाएं। कोशिश करें कि सभी भगवानों को नए वस्त्र पहनाएं और मंदिर का कोना -कोना साफ़ करें। 

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दरवाज़े पर स्वस्तिक बनाएं 

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घर के मुख्य द्वार की सफाई करने के बाद स्वस्तिक का निशान बनाएं। स्वस्तिक का निशान घर में सुख समृद्धि का प्रतीक होता है और ये माता के आगमन का प्रतीक भी होता है। 

किचन की करें सफाई 

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घर की सफाई के साथ किचन की सफाई करना भी जरूरी होता है। घर में कलश स्थापित करने से पहले किचन के हर एक कोने को अच्छी तरह साफ़ करें। साफ़ किचन में माता का भोग तैयार करने से मां दुर्गा प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं। 

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कैसे करें कलश स्थापना 

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पंडित प्रशांत मिश्रा जी के अनुसार पृथ्वी पर या किसी बर्तन में थोड़ी बालू या मिट्टी लेकर उसमें जौ बोएं। कलश को धोकर उसे उस मिट्टी पर स्थापित कर हाथ जोड़कर पृथ्वी माता से प्रार्थना करें कि माता हम आपसे मिट्टी ग्रहण कर उससे कलश निर्माण कर रहे हैं। इसके पश्चात कलश पर स्वास्तिक बनाएं। कलश के कण्ठ में कलावा बांधें। थोड़ा जल भरें और हाथ जोड़ कर कलश का आह्वान करें। फिर उसके अंदर रोली, चावल, पुष्प, दूर्वा, थोड़ी मिट्टी, गंगाजल या किसी भी तीर्थ का जल, सुपारी, सिक्का, यह सब क्रम से छोड़ कर थोड़ा जल और डालें। उसके पश्चात पंच पल्लव (आम, गूलर, पीपल, पाकर, बरगद के पत्ते) अथवा आम के पत्ते कलश पर रखें। कलश के ऊपर कलश के ढक्कन में थोड़े अक्षत भरकर रखें। उसके ऊपर एक नारियल कपड़ें में लपेटकर रखें। इसके बाद पूजन प्रारंभ करें।

इन सभी बातों का ध्यान रखकर कलश स्थापित करके घर की सुख समृद्धि के साथ घर को धन धान्य से भी पूर्ण रखा जा सकता है। 

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Image Credit: free pik