क्या आपको भी मंडे आने के पहले ही एंग्जायटी होने लगती है? क्या आपको भी ऑफिस से शिफ्ट खत्म होने के बाद निकलने में दिक्कत महसूस होती है? क्या आपको भी वीकएंड पर काम के प्रेशर ने परेशान कर रखा है? अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो आप यकीनन टॉक्सिक ऑफिस के मायाजाल में फंस चुके हैं।
रोज-रोज सुबह उठकर अगर ऑफिस की याद आपको किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं लगती है, तो दोस्त आपको यह स्टोरी पूरी पढ़नी चाहिए। ऑफिस कल्चर एक बहुत बड़ी चीज है जिसके कारण ऑफिस जाने का मन करता है। कल्चर अगर सही नहीं है, तो किसी भी इंसान के लिए ऑफिस में सही से काम करना मुश्किल हो जाता है। ऑफिस में हम अपनी जिंदगी का बहुत समय बिताते हैं और ऐसे में अगर सही माहौल ना मिले, तो स्ट्रेस और एंग्जायटी हमारा पीछा नहीं छोड़ती। हमें बहुत ज्यादा परेशानी महसूस होने लगती है और यह टेंशन घर भी आ जाती है।
हमने इसके बारे में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट की सीनियर चाइल्ड और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और हैप्पीनेस स्टूडियो की फाउंडर डॉक्टर भावना बर्मी से बात की। डॉक्टर भावना के अनुसार, टॉक्सिक वर्क कल्चर एक कर्मचारी की इमोशनल, मेंटल और फिजिकल हेल्थ को खराब कर देता है। यह कल्चर लगातार आपको स्ट्रेस में रखता है और कम्युनिकेशन की समस्या से आपको दो चार होना पड़ता है।
टॉक्सिक ऑफिस कल्चर को एड्रेस करने के लिए जरूरी है कि एम्प्लॉयज को रिस्पेक्ट वाला माहौल मिले। पर भारत में ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें अक्सर किसी ऑफिस में किया जाता है, लेकिन ये टॉक्सिक होती हैं। हम कई बार इन्हें हंसी मजाक में ले जाते हैं, लेकिन सही मायने में एम्प्लॉयज के रिजाइन करने और उनके ऑफिस में खुश ना रहने का कारण यही है।
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वो चीजें जिन्हें भारतीय ऑफिस में समझा जाता है नॉर्मल-
ट्रेनिंग के नाम पर अपना काम जूनियर से करवा लेना
यह तो शायद हर ऑफिस में होता है। कुछ लोग अपने काम को कम करने के लिए वर्क लोड इंटर्न या अपने जूनियर को दे देते हैं। किसी प्रोजेक्ट के लिए रिसर्च करनी हो या फिर किसी तरह का पेपर वर्क हो। अधिकतर इन्हें जूनियर को पकड़ाया जाता है। ट्रेनिंग और एक्सपोजर के नाम पर कम पैसे में ज्यादा काम करवाने की प्रथा भारत में बखूबी निभाई जाती है।
कलीग्स के बीच में कंपटीशन करवा देना
यहां फंडू फ्राइडे वाले कॉम्पटीशन की बात नहीं हो रही है, बल्कि यहां तो बात हो रही है उस माहौल की जब बॉस ही एक एम्प्लॉय को ज्यादा फेवर करे और दूसरे को कम। एक दूसरे के बीच ही कॉम्पटीशन लगा दिया जाए। ऐसे में माहौल चुगली करने वाला हो जाता है और फिर कॉर्पोरेट पॉलिटिक्स की जगह बन जाती है।
आपका रोल ठीक से डिफाइन ना हो
अगर किसी कर्मचारी को यही ना पता हो कि उसका असली काम क्या है, उसे किसे रिपोर्ट करना है या फिर उसके नीचे कौन होगा, तो उसे अपने काम को लेकर ही कन्फ्यूजन बना रहेगा। ऐसा भारतीय ऑफिस में बहुत देखा जाता है कि कोई एक इंसान बहुत सारे काम करता है और उसका कोई एक रोल डिफाइन नहीं होता। इस तरह से देखें, तो लोग ज्यादा परेशान हो जाते हैं।
सैलरी बढ़ाने के नाम पर कमियां निकालना
एक चीज जो अधिकतर देखी जाती है वह यह कि जब कर्मचारी छुट्टी मांगे, तो उसकी अहमियत उसे बताई जाती है, जब वो कंपनी छोड़कर जाना चाहे, तो समझाया जाता है कि उससे ज्यादा वैल्यू कंपनी को किसी की नहीं है, लेकिन अगर वो सैलरी बढ़ाने की बात करे, तो उसकी कमियां निकाली जाती हैं। यहां, एक कमर्चारी अपनी जॉब चेंज करके जितनी आसानी से अपना पैसा बढ़ा सकता है उतना वह सही तरह से काम करके अपनी मौजूदा कंपनी में नहीं कर सकता। यह ट्रेंड एक अच्छे कर्मचारी को उसकी काबिलियत के हिसाब से सैलरी नहीं दिलवा पाता है।
गलतियों की जगह ना देना
कोई अगर काम कर रहा है, तो वो गलती भी करेगा। ह्यूमन माइंड इसी तरह से काम करता है। अगर कोई इंसान गलती करने से डर रहा है, तो वह अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाएगा। वह अपने काम को मुस्तैदी से करने से डरेगा। गलती करने का डर उसे अपने कंफर्ट जोन से बाहर नहीं निकलने देगा और अगर आप उससे कुछ एक्स्ट्रा कर गुजरने की उम्मीद रख रहे हैं, तो वह भी नहीं होगा। आपने कई वायरल वीडियो देखे होंगे जहां इंडियन बॉस अपने कर्मचारियों को ऐसे डांट रहे हैं जैसे उनकी कोई वैल्यू ही ना हो।
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'मैं हूं बॉस' वाला माइक्रोमैनेजमेंट
कहीं भी अगर आपके सिर पर कोई हमेशा खड़ा रहेगा तो आपको काम करने में दिक्कत ही होगी। आपको ऐसा लगने लगेगा कि आपके ऊपर 24 घंटे किसी की नजर है और इसके कारण काम पर से ध्यान हटेगा। आपके ऊपर हमेशा प्रेशर रहेगा कि आपको कोई देख रहा है। भारत में तो यह बहुत ज्यादा देखा जाता है। कॉर्पोरेट ऑफिस में बॉस छोटी-छोटी चीजों पर नजर रखते हैं जिससे ध्यान भटकता है।
टाइम से घर जाने को माना जाता है गलत
इसे सबसे ज्यादा टॉक्सिक चीजों में से एक माना जा सकता है। अगर कोई अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद घर जाने की कोशिश कर रहा है, तो उसे कामचोर समझा जाता है। यहां खाली ऑफिस में बैठे रहना और ओवरटाइम करना भी सही समझा जाता है। ऑफिस आने का तो टाइम हो, लेकिन जाने का ना हो, तो इसे गलत ही माना जाएगा ना।
क्या आपको भी लगता है इस तरह का कल्चर टॉक्सिक होता है? क्या ऐसा कोई और प्वाइंट है जिसे आप भी इस लिस्ट में शामिल करना चाहें? अपने जवाब हमें कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
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