पैरेंटिंग यकीनन एक बेहद ही मुश्किल जॉब है। वैसे बच्चों की अलग-अलग उम्र में पैरेंट्स को कई तरह के चैलेंजेस का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, जब बच्चे छोटे होते हैं तो उनकी सही तरह से केयर करना और उनके व्यक्तित्व में अच्छे संस्कारों को शामिल करने के लिए पैरेंट्स कई प्रयास करते हैं। वहीं जब बच्चों की उम्र बढ़ने लगती है तो वह दुनिया को अपनी ही एक नजर से देखते हैं और उनकी अपनी एक सोच विकसित होने लगती है।

ऐसे में हो सकता है कि वे अपने पैरेंट्स के विचारों से सहमत ना हों और इसलिए पैरेंट्स और बच्चों के बीच विचारों का मतभेद व खींचातानी शुरू हो जाए। टीनेजर्स बच्चों के साथ Conflicts को हैंडल करना इतना भी आसान नहीं होता। इस स्थिति में अक्सर पैरेंट्स अपना आपा खो देते हैं और बच्चों पर गुस्सा हो जाते हैं।

हालांकि यहां यह जरूरी है कि आप थोड़ी समझदारी का परिचय दें। ऐसे कुछ टिप्स हैं, जिनकी मदद से आप टीनेजर्स बच्चों के साथ अपने मतभेद को आसानी से मैनेज कर सकती हैं-

ना करें जज

issues with teenager child attitude dont judge

टीनेजर्स बच्चों और पैरेंट्स के बीच अक्सर समस्या का समाधान इसलिए भी नहीं निकल पाता क्योंकि पैरेंट्स बच्चों की बात सुनने से पहले ही उन्हें जज कर लेते हैं। ऐसे में उनका पहले से ही एक माइंड सेट हो जाता है, वहीं दूसरी ओर जब बच्चों को इस चीज का आभास होता है, तब वे और भी ज्यादा लापरवाह हो जाते हैं और फिर वह सिर्फ अपने मन की ही करते हैं।

सुनें ध्यानपूर्वक

issues with teenager child attitude listen carefully

अगर आप सच में चाहती हैं कि आपके और बच्चों के बीच प्रॉब्लम्स आसानी से सॉल्व हो जाएं तो ऐसे में आपको पहले एक गुड लिसनर बनना होगा। इसके लिए आप पहले बच्चों की बात ध्यान पूर्वक सुनें। ध्यान दें कि आप उन्हें बीच में ना टोकें।

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जब वह अपना पक्ष आपको बताएं, तब आप उन्हें तवज्जो दें और उनके पक्ष को समझने की कोशिश करें। ऐसा करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आप उनकी बात तो समझेंगी ही, साथ ही जब आप अपनी बात उन्हें समझाएंगी तो वे भी आपकी बात को ध्यानपूर्वक सुनेंगे।

सीधे ना नहीं कहें

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हो सकता है कि बच्चे अपनी उम्र व अनुभव के आधार पर सोच रहे हों (टीनएज गर्ल्स मां से न छिपाएं ये बातें) और उनके द्वारा लिया गया फैसला या फिर उनका मत सही ना हो। लेकिन इस स्थिति में भी कभी भी बच्चे को सीधे ना नहीं कहें।

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इससे बच्चों को बुरा लग सकता है। हो सकता है कि वे यह भी सोचें कि आप उन्हें समझती ही नहीं हैं। ऐसे में वे कभी भी आपकी बात को समझने की कोशिश नहीं करेंगे।

निकालें बीच का रास्ता

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अगर आप अपने रिश्ते को मधुर बनाते हुए बच्चों को बेहतर तरीके से समझाना चाहती हैं तो ऐसे में हमेशा एक बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करें। आपका सॉल्यूशन कुछ ऐसा हो, जिसमें बच्चे की मर्जी भी शामिल हो और आप भी अपना प्वाइंट बच्चे को समझा पाएं। ऐसे में आप बच्चे से हमेशा एक सकारात्मक तरीके से बात करें

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मसलन, आप उसे कहें कि तुम्हारा आईडिया तो अच्छा है, लेकिन अगर हम इसमें यह भी शामिल कर दें या फिर इसे कुछ इस तरह से किया जाए तो कैसा रहेगा। इस तरह आप उनके विचारों को मोडिफाई करके उसे बेहतर बनाएं। साथ ही अगर आप चाहें तो उनसे ही कुछ और आईडियाज भी मांग सकती हैं।

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