इस वर्ष सितंबर के महीने से अधिक मास शुरू हो जाएंगे, जो एक महीने तक चलेंगे। जिस वर्ष जिस महीने में अधिक मास लगते हैं उस वर्ष उस महीने में कई ऐसे तीज-त्‍योहार आते हैं, जो जगतपिता श्री हरी को समर्पित होते हैं। इस वर्ष सितंबर में अनंत चतुर्दशी, पितृ पक्ष, पद्मिनी एकादशी व्रत सहित कई बड़े अवसर आएंगे जो हिंदू धर्म में काफी महत्‍व रखते हैं। 

चलिए उज्‍जैन के पंडित कैलाश नारायण जी से जानते हैं इस महीने आने वाले त्‍योहारों के बारे में-   

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन,1 सितंबर 2020 

हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी एक बड़ा पर्व होता है। भाद्रपद मास में शुक्‍ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्‍णु के अनंत रूप की पूजा होती है। इसके साथ ही लोग आपके बाजू पर अनंता बांधते हैं। इतना ही नहीं, गणेश चतुर्थी के दिन अपने घर में गणेश जी की स्‍थापना करने वाले लोग अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन भी करते हैं। 

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शुभ मुहूर्त: 1 सितंबर सुबह 5:59 से लेकर 9:41 मिनट तक अनंत चतुर्दशी की पूजा का मुहूर्त है।

गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त 1 सितंबर को सुबह 9:10 से दोपहर 1:56 बजे तक, दोपहर 3:32 से लेकर शाम 5:07 तक, रात 8:07 से रात 9:32 तक और रात 10:56 से लेकर 2 सितंबर सुबह 3:10 तक। 

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भाद्रपद पूर्णिमा व्रत और पितृ पक्ष आरंभ , 2 सितंबर 2020 

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्‍णु के सत्‍यनारायण स्‍वरूप की पूजा होती है। अगर आप बहुत समय से सत्‍यनारायण स्‍वामी की पूजा कराने की सोच रही हैं तो यह दिन बहुत ही शुभ होता है। इस दिन आप भगवान सत्‍यनारायण जी का व्रत भी रख सकती हैं। इस दिन से पितृ पक्ष भी शुरू होते हैं। 15 दिन तक चलने वाले पितृ पक्ष में पितरों की आत्‍मा की शां‍ति की कामना की जाती है।  

शुभ मुहूर्त: भाद्रपद पूर्णिमा व्रत 1 सितंबर सुबह 9:54 पर आरंभ हो कर 2 सितंबर सुबह 10:42 पर समाप्‍त होगा।  

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संकष्टी चतुर्थी व्रत, 5 सितंबर 2020 

संकष्‍टी चतुर्थी हर माह आने वाला त्‍योहार है। यह दिन भगवान गणेश का दिन कहलाता है। इस दिन गणपति के भक्‍त (गणेश जी के भक्‍त हैं तो दें रोचक प्रश्‍नों के जवाब) विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं और व्रत भी रखते हैं। इस व्रत को सुबह से ही रखा जाता है और शाम को चांद निकलने से पहले भगवान गणेश की पूजा कर ली जाती है। चांद के निकलने पर व्रत खोला जाता है। 

शुभ मुहूर्त: सुबह से लेकर चांद निकलने तक।

इंदिरा एकादशी व्रत, 13 सितंबर 2020 

इंदिरा एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन सोते वक्‍त जगतपिता नारायण करवट लेते हैं। इस दिन भगवान विष्‍ण के वामन अवतार की पूजा होती है और साथ ही देवी लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है। इस दिन कुछ लोग व्रत भी रखते हैं। यह व्रत एकादशी से शुरू हो कर द्वादशी पर खोला जाता है। 

शुभ मुहूर्त: 13 सिंतबर को सूर्योदय के साथ शुरू होगा और 14 सितंबर को सूर्योदय के साथ ही समाप्‍त हो जाएगा।

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मासिक शिवरात्रि व्रत , 15 सितंबर 2020

हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्‍व है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। इस व्रत को करने से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। खासतौर जिन कन्‍याओं के विवाह में दिक्‍कत आ रही है, उनका विवाह हो जाता है।

शुभ मुहूर्त: सूर्योदय के साथ शुरू होगा और सूर्यास्त के साथ ही समाप्‍त हो जाएगा।

अश्विन अमावस्या, 17 सितंबर 2020 

यह पितृ विसर्जन का दिन होता है। यह दिन श्राद्ध का आखिरी दिन होता है। ऐसी मान्‍यता है कि अगर आप अपने किसी पितृ का श्राद्ध तिथि अनुसार नहीं कर पाए हैं तो आप अमावस्‍या के दिन उनका श्राद्ध (श्राद्ध का खाना बनाते वक्‍त इन बातों का रखें ध्‍यान) कर सकते हैं। इस दिन किसी भी प्रकार का व्रत रखने का विधान नहीं है। आपको केवल जरूतमंद लोगों को इस दिन भोजन कराना चाहिए। 

शुभ मुहूर्त: 16 सितंबर रात 7:17 से आरम्‍भ हो कर 17 सितंबर शाम 4:32 तक। 

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पद्मिनी एकादशी व्रत, 27 सितंबर 2020 

पद्मिनी एकादशी को कमला एकादशी भी कहा जाता है। यह हर वर्ष नहीं मनाई जाती बल्कि मलमाल (जिसे अधिक मास या पुरुषोत्‍तम मास भी कहा जाता है।) के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में पद्मिनी एकादशी का बहुत महत्‍व होता है। ऐसी मान्‍यता है कि इस एकादशी पर जो व्‍यक्ति भगवान विषणु और शिव जी की पूजा करता है, उसे बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है। इस दिन जो लोग व्रत रखते हैं उन्‍हें सुख, सौभाग्‍य और भैतिक सुख की प्राप्ति होती है। 

शुभ मुहूर्त: 27 सितंबर सुबह 6: 41 से लेकर 28 सितंबर सुबह 8: 09 तक

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