राधा-कृष्ण यानि प्रेम का प्रतीक। यानि दो ऐसे पात्र जिन्हें अलग नहीं एक ही माना जाता है। आदीकाल से लेकर आज तक राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी का महत्व बहुत गहरा रहा है। शायद इसीलिए गाहे-बगाहे शादी, अन्नप्राशण, मुंडन, गृहप्रवेश आदि अवसरों पर राधा-कृष्ण की मूर्ति तोहफे में दी जाती है, लेकिन कई बार लोगों को ये नहीं पता होता कि ये उनकी गलती भी हो सकती है। एक आसान सा सवाल। आपके घर में कितनी राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीरें हैं? पेंटिंग, मूर्ति, पोस्टर, फोटो आदि न जाने क्या-क्या। 

गीता, पुराण और शास्त्र: क्या कहते हैं मूर्ति तोहफे में देने के बारे में?

हिंदू धर्म में तोहफे के कई नियम भी हैं। कई शास्त्रों में तो उपहार/तोहफे की तुलना दान से की गई है। गीता कहती है तीन तरह के दान हो सकते हैं। राजसिक, तामसिक, सात्विक। इनमें से कोई भी नियम भगवान की मूर्ति उपहार या दान में देने का नहीं है। श्रीमद भगवत गीता के अनुसार दान देने से पहले ये सोच लेना चाहिए कि वो किसे दिया जा रहा है और जिस व्यक्ति को ये दिया जा रहा है वो इसका उपयोग भी करेगा या नहीं। यानि किसे, क्या और क्यों? वाला सवाल गीता के अनुसार सोचना चाहिए। 

radhika and kanhaiya

स्कंद पुराण में भी एक ऐसे ही दान की बात है। यहां 'अपात्र दान' का प्रावधान है। यानि किसी ऐसे को दान नहीं देना चाहिए जो इसके योग्य न हो। क्योंकि हिंदू धर्म में मूर्तियों की पूजा की जाती है इसलिए किसी भी ऐसे को भगवान की मूर्ति नहीं देनी चाहिए जो उसकी देखभाल न कर पाए। कई पंडितों की राय रहती है कि मूर्ति खास-तौर पर भगवान की मूर्ति तोहफे में न दें वो सिर्फ अपने ही इस्तेमाल के लिए खरीदें। 

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हालांकि, वास्तु शास्त्र में मूर्ति उपहार में देने का प्रावधान है। पर उसके भी कुछ नियम हैं। जहां तक मूर्ति उपहार में देने की बात है वहां वास्तु शास्त्र भी ये कहता है कि इसे सिर्फ उन्हें दें जो इसकी पूरी तरह से देखभाल कर पाए। 

क्यों राधा-कृष्ण की मूर्ति शादी-ब्याह में बिलकुल नहीं देनी चाहिए?

मान लीजिए किसी ऐसे इंसान को मूर्ति तोहफे में देनी है जो इसकी देखभाल करे तो भी शादी-ब्याह या किसी नवदंपत्ति को ये नहीं देना चाहिए। यकीनन राधा-कृष्ण प्रेम का प्रतीक थे, लेकिन दोनों की कभी शादी नहीं हो पाई थी और न ही दोनों साथ रह पाए थे। हिंदू धर्म में शुभ और अशुभ के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। राधा-कृष्ण का प्रेम अमर है, लेकिन दोनों का साथ कुछ समय का ही था। इसीलिए कई लोग ये मानते हैं कि राधा-कृष्ण की मूर्ति शादी-ब्याह या प्रेमी जोड़े को नहीं देनी चाहिए। कृष्ण की शादी जहां रुक्मणि से हुई थी और 16000 रानियां थीं, लेकिन कृष्ण ने राधा से शादी नहीं की। वहीं कई पुराण लिखते हैं कि राधा असल में कृष्ण की मामी बन गई थीं। अलग-अलग पुराणों में राधा के ब्याह की अलग कहानियां हैं, लेकिन वो किसी और दिन बताएंगे। फिलहाल तो यही जान लीजिए कि राधा और कृष्ण का ब्याह नहीं हो पाया था और संजोग की बात ये है कि वो एक दूसरे को इतना प्यार करने के बाद भी अलग ही रहे थे। ऐसे ही राम और सीता की मूर्ति भी नवदंपत्ति को देने से बचना चाहिए। 

radha and krishna murti

राधा-कृष्ण की मूर्ति की जगह क्या दे सकते हैं?

वैसे तो नवदंपत्ति के लिए कई तोहफे हो सकते हैं, लेकिन अगर मूर्ति ही देनी है तो राधा-कृष्ण की जगह शिव-पार्वति, विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति दी जा सकती है। कृष्ण और राधा को विष्णु और लक्ष्मी का अवतार ही माना गया है इसलिए ये बहुत शुभ मानी जा सकती है, लेकिन ध्यान रहे ये दें उसी को जो इसकी कद्र करे। नवदंपत्ति के लिए यही बेहद अच्छा तोहफा हो सकता है। विष्णु-लक्ष्मी सुख-समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में विष्णु के पैर दबाती हुई लक्ष्मी और शेषनाग पर आराम करते विष्णु जी की मूर्ति को शुभ माना जा सकता है। इसके अलावा, अगर किसी को मुंडन आदि में तोहफे देना है तो बांसुरी बजाते कृष्ण और गाय के बछड़े की मूर्ति सबसे अहम मानी जा सकती है। यहां बाल गोपाल यानि माखन खाते हुए कृष्ण की मूर्ति भी बेहद अच्छी मानी जाएगी। 

घर में मूर्ति रखने के भी हैं कुछ नियम-

पुराण और शास्त्र, मंदिर में भगवान की मूर्ति रखने पर जोर देते हैं, लेकिन घर में लोग अक्सर इन मूर्तियों को रखते हैं। ऐसे में घर पर मूर्ति रखने के कई नियम हैं- 

1. भगवान की मूर्तियों को सजावट का केंद्र न बनाएं। 

2. उनपर धूल न जमने दें और साफ रखें।

3. अगर कोई मूर्ति खंडित हो गई है खास तौर पर शिवलिंग तो उसे जल में विसर्जित करें। 

4. अगर पूजा के लिए मूर्ति लाए हैं तो किसी पंडित से प्राण प्रतिष्ठा करवा लें। 

5. किसी ऐसे को मूर्ति उपहार में न दें जो इसका ध्यान न रख पाए। 

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कुल मिलाकर तोहफा सोच-समझकर ही दें। समस्या कई बार ये होती है कि लोग मूर्तियों का महत्व समझ नहीं पाते। आपका तोहफा किसी के लिए अच्छी ऊर्जा का स्त्रोत बने ये बहुत जरूरी है।