शादी का निर्णय हर किसी का पर्सनल होता है। लेकिन फिर भी भारतीय समाज में देखा जाए तो एक उम्र के बाद शादी का प्रेशर बढ़ने लगता है। फिर चाहे वो रिश्‍तेदार हो या दोस्‍त या फिर खुद घर के लोग हर किसी की अपेक्षाएं शादी को लेकर बढ़ती चली जाती है और एक समय के बाद आपकी शादी ही मेन चर्चा का विषय बन जाती है। अब सलमान खान को ही ले लीजिए, जिस भी शो में जाता है सबसे पहले लोग उससे उसकी शादी के बारे में ही बात करना चाहते हैं। यानि सोशल प्रेशर किसी पर भी कम नहीं होता। आइए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपकी शादी सही उम्र में नहीं होती हैं तो आपको किन-किन समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है।
यूं तो यह आपका पर्सनल मामला है लेकिन कुछ दोस्‍त की देर से शादी ना करने की सलाह और कुछ दोस्‍त देर से शादी करने के फायदों के बारे में बताते हैं जिसके चलते आप दुविधा में पड़ जाती हैं कि शादी करने के फायदे है या नुकसान? तो आइए आपकी इस दुविधा को हम दूर कर देते हैं।

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देर से शादी करने के फायदे

  • देरी से शादी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी लाइफ को खुलकर जी पाती हैं, और खुद को बेहतर समझ पाती है, शादी के बाद जिम्मेदारियों में इंसान खुद से दूर होता चला जाता है, ऐसे में अपनी महत्वाकांक्षा या कोई सपना पूरा करने का समय नहीं मिलता और कई बार तो आधी उम्र बीत जाने तक पता भी नहीं चल पाता कि जीवन में ऐसा क्या था जो पीछे छूट गया या अधूरा रह गया।
  • देरी से शादी करने से इंसान को अपने परिवार को और खुद को भी इमोशनली स्‍टेल करने का टाइम मिल जाता है।
  • जल्दी शादी के कारण कई बार आर्थिक प्रगति की वो संभावना कम हो जाती है जो कि अकेले रहने पर आसानी से हासिल की जा सकती है।
  • ऐसे में दुनिया को देखने और घूमने का मौका भी मिलता है जो कि जल्द ही शादी करके सेट होने पर कम हो जाता है।
  • परिपक्वता का फायदा तो रहता ही है, कम उम्र में की गयी शादियां निभाने में थोड़ी दिक्कत भी आ सकती है लेकिन इंसान के परिपक्‍व होने पर शादी को और रिश्ते की गंभीरता को समझना इतना मुश्किल नहीं रहता।

पति पत्‍नी में झगड़ा

ज्‍यादा देर से शादी होने पर ज़िम्मेदारी और प्राथमिकताए बदलने के कारण कपल एक दूसरे को समझ नहीं पाते है और नतीजा वह एक दूसरे से बात बात मे झगड़ा करते रहते है। इसके अलावा उम्र बढ़ जाने पर इगो लेवल भी बढ़ जाता है जिससे लड़ाई झगड़े की सम्भावना बनी रहती है, क्‍योंकि दोनों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं होता है।

सेक्‍सुअल एक्टिविटी की कमी

अधिक उम्र होने पर महिलाओ के शारीरिक क्रिया मे मन नहीं लगता और वह उदासीन होने लगती है। इस कारण पति पत्नी मे झगड़ा होता रहता है। इसके अलावा उम्र के साथ ही पुरुषों में टेस्‍टोस्‍टेरोन कम होने लगता है और सेक्‍स की इच्‍छा उतनी नहीं रहती जितनी की कम उम्र में होती है।

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इनफर्टिलिटी की संभावना का बढ़ना

महिलाओं में 30 की उम्र के आसपास प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। 35 साल की उम्र के बाद तो यह और अधिक तेजी से घटने लगती है। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है, उसके गर्भवती होने की संभावना घटती जाती है और प्रजनन अक्षमता (इनफर्टिलिटी) उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती जाती है।

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रिश्‍ते को ज्‍यादा अहमियत ना देना

आज के इस भागदौड़ वाली जिंदगी में लोग अपने रिश्‍तों से ज्‍यादा कैरियर को प्राथमिकता देते हैं चाहे फिर वो लड़का हो या फिर लड़की। जिसके कारण वे सही उम्र में शादी नहीं कर पाते। लेट मैरीज करने के बावजूद वह रिश्‍ते से ज्‍यादा कैरियर को ही मानते हैं। जिनसे रिश्‍ते में मनमुटाव होने लगता है।

हम यह नहीं कह रहें कि आपको शादी जल्‍दी करनी चाहिए या देर से। यह आपका अपना निर्णय है। क्‍योंकि आजकल के लड़के और ल‍ड़कियां अच्‍छे से सेटल होने के बाद ही शादी करते है।

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