अगर आप खुद पर संयम रखना जानती हैं और बच्चों के साथ बातचीत में मैच्योरिटी के साथ पेश आती हैं तो यह आपके लिए हर तरह से फायदेमंद है। सुकून और शांति से आपकी मनस्थिति सही रहती है, साथ ही आप अपने बच्चों का भविष्य संवारने में भी कामयाब होती हैं। पेन स्टेट की एक स्टडी में पाया गया कि जिन टीनेजर्स को अच्छी फैमिली वाला माहौल मिला और जिनके मम्मी-पापा ने ज्यादा प्रभावी पेरेंटिंग टेकनीक्स का इस्तेमाल किया था जैसे कि अपने लिए फैसलों के लिए तर्क देना और कड़ी सजा देने से बचना, उन टीनेजर्स को बाद में अपनी रिलेशनशिप्स, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स में बेहतर पाया गया, साथ ही यह भी देखा गया कि वे बतौर ए़़डल्ट्स अपनी रोमांटिक रिलेशनशिप में कम आक्रामक थे।

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रिसर्चर मेंग्या जिया ने बताया, 'बचपन में बच्चे अपने परिवार में जिस तरह की रिलेशनशिप देखते हैं उसका असर उनकी भविष्य में विकसित होने वाली रिलेशनशिप पर बहुत व्यापक होता है। टीनेज तक आते-आते बच्चे सक्सेफुल रिलेशनशिप से जरूरी स्किल्स खुद-ब-खुद सीख लेते हैं और उन्हें यह समझ आने लगता है कि उन्हें अपनी रिलेशनशिप में क्या चाहिए। फैमिली बच्चे की जिंदगी की पहली इंटिमेट रिलेशनशिप होती है।'

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बच्चों की लर्निंग पर जिया ने बताया, 'आप इन रिलेशनशिप से जो कुछ सीखते हैं, उसे बाद के जीवन में अप्लाई करते हैं। इसी दौरान आप सीखते हैं कि कैसे कंसट्रक्टिव तरीके से आप खुद को कम्यूनिकेट करना है। बच्चों में इसका उल्टा व्यवहार भी इसी उम्र में विकसित होता है मसलन मतभेद होने पर दूसरों पर चिल्लाना या बुरा-भला कहना भी बच्चे इसी उम्र में सीख लेते हैं। यह सबकुछ फैमिली में ही सीखने को मिलता है।' 

जिया ने कहा कि टीनेजर्स के लिए रिलेशनशिप विकसित करना एक अहम स्किल थी। घर के पॉजिटिव माहौल का टीनेजर्स पर अच्छा असर रहा और ऐसे बच्चे प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स में बेहतर पाए गए। यही नहीं, जिन बच्चों का अपने माता-पिता के साथ ज्यादा पॉजिटिव एंगेजमेंट था, उन्होंने खुद बड़े होने पर अपनी रिलेशनशिप्स में ज्यादा प्यार और साथी के लिए ज्यादा जुड़ाव पाया गया। इस स्टडी से यह बात साफ हो गई कि जिन बच्चों को एकीकृत और व्यवस्थित फैमिली क्लाइमेट मिलता है और जिनकी पेरेंटिंग ज्यादा प्रभावी तरीके से होती है, ऐसे बच्चों के बड़े होने पर अपनी फ्यूचर रिलेशनशिप्स में आक्रामक होने का जोखिम कम हो जाता है।

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जिया ने कहा, 'इस स्टडी में हमने ऐसे किड्स देखे, जो कहीं ज्यादा मुखर थे और उनके पास मुश्किलें सुलझाने के लिए ज्यादा बेहतर तरीके थे, जो काफी अहम है। अगर आप कोई समस्या कंसट्रक्टिव तरीके से सॉल्व नहीं कर सकते, तो मुमकिन है कि आप उसके लिए गलत तरीके अपनाने लगे। इसीलिए आपके लिए यह सोचना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है कि अपनी समस्याओं को कैसे शांतिपूर्वक तरीके से सुलझाया जाए और अगर कोई अपनी रिलेशनशिप में हिंसक तरीके अपनाता है तो ऐसा करने की स्थिति में कैसे बचाव किया जाए।' यह अध्ययन जर्नल ऑफ यूथ एंड एडोल्सेंस में प्रकाशित हुआ था।

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