कोरोना वायरस ने इस समय सभी देशों को घुटने पर ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्पीच में कहा कि अमूमन कोई प्राकृतिक संकट आता है तो वो किसी राज्य या देश तक सीमित होता है, लेकिन ये कोरोना वायरस पूरे विश्व को परेशान किए हुए है। वर्ल्ड वॉर पर भी इतने देश प्रभावित नहीं हुए थे जितने दो महीनों में कोरोना वायरस के कारण हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च को कोरोना वायरस को लेकर भारत के नाम संदेश दिया है और अहम बात ये है कि जनता कर्फ्यू का ऐलान किया है। तो चलिए जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा...

भारत के नाम संदेश

नरेंद्र मोदी की तरफ से भाषण में कहा गया कि, दो महीनों में कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी का भारत वासियों ने डटकर मुकाबला किया है। सभी देश वासियों ने इससे निपटने का प्रयास भी किया है। लेकिन बीते कुछ दिनों से ऐसा माहौल बन रहा है जैसे हम संकट से बचे हुए हैं। वैश्विक महामारी कोरोना से निश्चिंत हो जाने की ये सोच सही नहीं है। इसलिए हर भारतवासी का सजग रहना और सतर्क रहना बहुत जरूरी है। आपसे मैंने जब भी जो भी मांगा है मुझे कभी भी देश वासियों ने निराश नहीं किया है। आज मैं आप सभी देश वासियों से कुछ मांगने आया हूं।

नागरिकों से मांगा समय

मुझे आपके आने वाले कुछ हफ्ते चाहिए। आपका आने वाला कुछ समय चाहिए। अभी तक विज्ञान कोरोना महामारी से बचने के लिए कोई निश्चित उपाय सुझा सका है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है। ऐसी स्तिथी में हर किसी की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है।

 

दुनिया के जिन देशों में कोरोना का प्रभाव ज्यादा देखा जा रहा है वहां स्टडी में एक बात सामने आई है कि इन देशों में शुरुआती कुछ दिनों के बाद जैसे बीमारी का विस्फोट हुआ है और इन देशों में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ी है। भारत सरकार इस ट्रैक रिकॉर्ड पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है। हालांकि, कुछ देश ऐसे भी हैं जिन्होंने आवश्यक निर्णय भी किए और अपने यहां के लोगों को ज्यादा से ज्यादा आसोलेट करके स्तिथी को संभाला है। और उसमें नागरिकों की भूमिका बहुत अहम रही है।

कोरोना का संकट अहम

भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश के सामने कोरोना का संकट आम बात नहीं है। आज जब हम बड़े-बड़े देशों में कोरोना का प्रभाव देख रहे हैं और इसलिए भारत पर भी असर पड़ेगा। और इस वैश्विक बीमारी का सामना करने के लिए दो प्रमुख बातों की जरूरत है। पहला संकल्प और दूसरा संयम। सभी को संकल्प लेना होगा कि हम इस बीमारी को रोकने के लिए अपने कर्तव्य का पालन करेंगे। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के दिशा निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे। ये संकल्प लीजिए कि हम खुद संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी बचाएंगे।

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दिया हम स्वस्थ तो जग स्वस्थ का मंत्र

ऐसी स्तिथि में जब इस बीमारी की कोई दवा नहीं है तब हमारा खुद का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। इससे बचने के लिए दूसरी अनिवर्यता है संयम।

क्या चाहिए-

घर से बाहन न निकलना

भीड़भाड़ से बचना

सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी है

वर्क फ्रॉम होम का दिया सुझाव

मोदी जी ने कहा, यही इस वैश्विक बीमारी के प्रभाव को कम करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है। और इसलिए अगर आपको लगता है कि आप ठीक हैं और आपको कुछ नहीं होगा और आप ऐसे ही मार्केट में जाते रहेंगे और सड़कों पर जाते रहेंगे और कोरोना से बचे रहेंगे तो ऐसा करके आप अपने साथ और दूसरों के साथ अन्याय करेंगे। इसलिए मेरा सभी देशवासियों से आग्रह है कि आने वाले कुछ हफ्तों तक जब तक बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें। जितना हो सकें अपना काम घर से ही करें। जो सरकारी सेवाओं में हैं और अस्पताल से जुड़े हैं और जन प्रतिनिधी हैं इनकी सक्रीयता आवश्यक हैं, लेकिन समाज के बाकी लोगों को खुद को बाकी भीड़भाड़ से अलग रखने की जरूरत है।

सीनियर सिटिजन घर से बाहर न निकलें

मोदी जी ने अपनी लाइव स्पीच में कहा कि 60 साल से ऊपर के लोग घर से बाहर न निकलें।

जनता कर्फ्यू का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, जनता कर्फ्यू यानी जनता के लिए, जनता द्वारा खुद पर लगाया कर्फ्यू। 22 मार्च रविवार को सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक सभी देशवासियों को जनता कर्फ्यू का पालन करना है। इस जनता कर्फ्यू के दौरान कोई भी नागरिक सड़क पर न निकलें। हां, जो आवश्यक सेवाओं से जुड़े हुए हैं उनको जाना जरूरी है, लेकिन एक नागरिक के नाते आप बाहर न निकलें। इसका अनुभव हमें आने वाले समय की चुनौतियों से संभलने का और उसके लिए तैयारी करने का मौका देगा। सभी संगठनों से अनुरोध किया जा रहा है। इस जनता कर्फ्यू का संदेश लोगों तक पहुंचाएं और घर से बाहर न निकलें। हर दिन आप 10 नए लोगों को फोन करके समझाएं और उनको बताएं। ये एक प्रकार से हमारे लिए और भारत के लिए एक कसौटी की तरह होगा जो कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत कितना तैयार है ये देखने और परखने का भी समय है।

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क्या होगा 22 मार्च को

इस दिन सभी लोग घर के अंदर रहेंगे। इस जनता कर्फ्यू के दिन 22 मार्च को ही यानी रविवार को एक और सहयोग चाहता हूं। कई लोग अपनी परवाह न करते हुए दूसरों की सेवा में लगे हुए हैं। आज की परिस्तिथियां देखें तो ये सेवाएं सामान्य नहीं हैं। आज खुद भी इनके संक्रमित होने का पूरा खतरा मोल लेते हैं। बावजूद इसके ये अपना कर्तव्य भी निभा रहे हैं। 22 मार्च रविवार को ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित कीजिए। रविवार को यानी जनता कर्फ्यू के दिन शाम को ठीक 5 बजे अपने दरवाजे, बाल्कनी और खिड़कियों के सामने खड़े होकर ऐसे लोगों का आभार व्यक्त करें। आभार व्यक्त करके ताली बजाकर, घंटी बजाकर, थाली बजाकर उनके प्रति अपनी क्रतज्ञता अर्पित करें। पूरे देश के स्थानीय प्रशासन से भी आग्रह किया गया है कि सायरन की आवाज़ से लोगों तक ये बात पहुंचाएं।

 

रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल न जाएं

रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल जाने की आदत से इस समय बचें। अगर बहुत जरूरी लग रहा है तो जान पहचान वाले डॉक्टरों से पूछें। कोई जरूरी सर्जरी न हो तो, सर्जरी की डेट भी 1 महीना आगे बढ़ाने का किया आग्रह।

आर्थिक प्रभाव के लिए ये कदम

सरकार ने एक COVID 19 इकोनॉमिक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा और ये टास्क फोर्स हर परिस्तिथी की जानकारी लेगी और उसके खिलाफ एक्शन प्लान तैयार करेगी। आने वाले समय में अगर लोग ऑफिस न आ पाएं, काम ठीक न हो पाए तो उनका वेतन न काटें। और देश वासियों से आग्रह है कि उनके लिए सोचें।

नहीं है जरूरी सामान की कोई कमी

देश में कोई कमी न हो, दूध, अनाज या कोई जरूरी सामान खरीदने की जरूरत नहीं है। जरूरी सामान संग्रह करने की होड़ न लगाएं। सरकार उचित कदम उठा रही है जिससे किसी को कमी नहीं होगी। तो आप अपनी खरीददारी ऐसे ही करें जैसे जरूरी है।