भारत एक बहु-सांस्कृतिक देश है, जो परंपराओं से समृद्ध है। जब हिंदू धर्म की बात आती है तो कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और उनमें से प्रत्येक के लिए एक विशिष्ट दिन समर्पित होता है। हर सोमवार को भक्त भगवान शिव का जाप करते हैं और उपवास रखते हैं जबकि मंगलवार भगवान हनुमान के लिए होता है, भगवान गणेश का दिन बुधवार है। इस तरह से सभी दिन भगवान को समर्पित हैं। आज हम विशेष रूप से मंगलवार के बारे में बात करेंगे जब अधिकांश हिंदू भगवान हनुमान की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए पूरे दिन का व्रत रखते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि यह व्रत जब धार्मिक रूप से रखा जाता है तो कई समस्याओं को दूर करता है क्योंकि भगवान भक्‍त के समर्पण को देखकर उसकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं। सुख-सम्पत्ति, यश और संतान प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत रखना शुभ माना जाता है। हनुमान जी से जुड़ी मंगलवार व्रत कथा का पाठ करके इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करना चाहिए। मंगलवार व्रत कथा को पढ़ना क्‍या हमारे लिए इतना फायदेमंद हो सकता है, यह जानने के लिए हमने पंडित भानुप्रताप नारायण मिश्रजी से बात की। 

भानुप्रताप नारायण मिश्र जी का कहना है कि ''हनुमान जी की व्रत कथा का पाठ आप शादी- ब्‍याह, संतान, नौकरी, तरक्‍की, विदेश जाने, धन आदि की प्राप्ति के लिए कर सकती हैं। वैसे तो इसकी पूजा जन्‍म कुंडली के हिसाब से करनी चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में मंगल ज्‍यादा फायदेमंद हो उनको तो हनुमान जी की व्रत कथा जरूर पढ़नी चाहिए। लेकिन इसकी पूजा कोई भी कर सकता है।''  

mangalwar vrat katha inside  

मंगलवार व्रत कथा

लोक कथाओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में कुंडलपुर नामक एक शहर हुआ करता था, जहां नंदा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुनंदा के साथ रहता था। धनी दंपति की कोई संतान नहीं थी जो उनके वंश के नाम को आगे बढ़ा सके। इस वजह से ब्राह्मण हनुमान जी की पूजा-अर्चना के लिएवन की ओर प्रस्थान कर गया। वहीं ब्रह्माण की पत्नी ने घर पर बजरंगबली की पूजा-अर्चना करनी शुरू कर दी।

ब्राह्मण की पत्नी प्रत्येक मंगलवार व्रत रखती थी और शाम को भोग बनाकर हनुमान जी को अर्पित करती और फिर स्वयं ग्रहण करती थीं। लेकिन एक दिन मंगलवार को कोई और व्रत पड़ गया जिसकी वजह से वह महावीर जी का व्रत नहीं रख पाईं। जिसकी वजह से उसने भोजन नहीं बनाया और हनुमान जी को भोग भी नहीं लगाया और स्वयं भी भोजन ग्रहण नहीं किया। वह अपने मन में ये प्रण लेकर सो गईं कि अगले मंगलवार को वह हनुमान जी को भोग लगाकर ही अन्न ग्रहण करेगीं।

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ब्राह्मण की पत्नी 6 दिन तक भूखी-प्यासी रही। मंगलवार के दिन वह मूर्छित हो गई तब बजरंगबली ने उसकी श्रद्धा और निष्ठा को देखते हुए उससे प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और कहा कि मैं तुमसे बहुत खुश हूं। मैं तुमको एक सुंदर बालक देता हूं जो तुम्हारी बहुत सेवा करेगा और हनुमान जी अपने बाल रूप का दर्शन देकर अन्तर्धान हो गए। सुंदर बालक पाकर वह बहुत खुश हुईं। उसने बालक का नाम मंगल रखा।

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कुछ वक्त बाद ब्राह्मण जब वन से लौटकर आया तो उसने अपने घर में एक सुंदर बालक देखा तो उसने अपनी पत्नी से पूछा कि यह बालक कौन है? पत्नी ने कहा कि मंगलवार के व्रत से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने मुझे बालक दिया है। यह सुनकर ब्राह्मण को अपनी पत्नी की बात पर विश्वास नहीं हुआ।

एक दिन ब्राह्मण कुएं से पानी भरने चला तो उसकी पत्नी ने कहा कि मंगल को भी साथ ले जाओ। ब्राह्मण बालक को अपने साथ ले गया लेकिन जब वापस लौटा तो बालक उसके साथ नहीं था क्योंकि पानी भरने के बाद मंगल को ब्राह्मण ने कुंए में डाल दिया था।

जब ब्राह्मण की पत्नी ने मंगल के बारे में पूछा तो ब्राह्मण जब तक कुछ बोलता तभी मंगल मुस्कुराता हुआ घर आ गया। उसको देखकर ब्राह्मण आश्चर्यचकित हुआ। उसी रात बजरंगबली ने ब्राह्मण को सपने में दर्शन दिए और बताया यह पुत्र मेरा बाल रूप है और तेरी पत्नी की भक्ति से प्रसन्न होकर मैंने उसे वरदान स्वरूप दिया है।

यह सुनकर ब्राह्मण खुश हो गया और ब्राह्मण दंपत्ति सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करने लगे और नियमित रूप से मंगलवार व्रत रखने लगे। मंगलवार का व्रत रखने वाले मनुष्य पर हनुमान जी की अपार कृपा होती है।

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पाठ करने का सही तरीका

मंगलवार के दिन भगवान हनुमान के चारों ओर लाल फूल और लाल कपड़े की एक माला रखें और इस दिन मंगलवर व्रत कथा पढ़ें। प्रसाद के रूप में लड्डू बनाएं। हनुमान जी को 3 प्रकार के लड्डू, केसरिया बूंदी लड्डू, बेसन लड्डू और मलाई-मिश्री लड्डू पसंद हैं।

हालांकि, बेसन को उनका पसंदीदा कहा जाता है इसलिए इन्हें बनाएं और शुद्ध मन से भगवान का जाप करें। उनके द्वारा पसंद किए जाने वाले और फूड्स में इमरती, बनारसी पान और पंचमेवा नामक विभिन्न सूखे मेवों का मिश्रण जिसमें बादाम, किशमिश, काजू, छुहारा और नारियल शामिल होते हैं।

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