यूं तो हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी देवताओं को पूजा जाता है मगर भगवान हनुमान जी की बात जब आती है तो कई तरह के रूल्‍स को फॉलो करना पड़ता है। खासतौर पर हनुमान जी की पूजा को लेकर महिलाओं को कई रूल्‍स फॉलो करने होते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि हुनमान जी क्‍योंकि बाल ब्रह्मचारी थे इस‍लिए कोई भी महिला उन्‍हें छू नहीं सकती। ऐसा भी कहा जा सकता है कि केवल विवाहित महिलाएं ही हनुमान जी की अराधना कर सकती हैं। हनुमान चालीसा को लेकर भी लोगों में कई भ्रम है, कहा जाता है महिलाओं को हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। मगर इन बातों के प्रमाण कहीं नहीं मिलते। 

हां, यह बात सत्‍य है कि हनुमान ब्रह्मचारी थी मगर हिंदु धर्मग्रंथों में मिली कथाओं के अनुसार हनुमान जी का एक बेटा था। हनुमान जी के इस बेटे को एक मच्‍छली ने जन्‍म दिया था। कथा के अनुसार, हनुमान जी एक रोज समुद्र के उपर से गुजर रहे थे और तब ही उनके पसीने की बूंए एक मच्‍छली के पेट में चली गई। इस पसीने की बूंद से ही मच्‍छली ने एक पुत्र को जन्‍म दिया इसका नाम मकरध्‍वच रखा गया। इस तरह देखा जाए तो हनुमान जी का ब्रह्मचर तो खंडित हो चुका था। बावजूद इसके हनुमान जी कभी गृहस्‍थ जीवन में लीन नहीं हुए और हमेशा माता सीता और भगवान राम की सेवा करते रहे। इसलिए आज भी भगवान हनुमान को बाल ब्रह्मचारी ही कहा जाता है। हिंदू धर्म के ग्रंथों में यह बात कहीं नहीं लिखी कि महिलाएं हनुमान जी की पूजा नहीं कर सकतीं । महिलाएं हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं मगर पूजा के दौरान उन्‍हें कुछ बातों को ध्‍यान में जरूर रखना चाहिए। 

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women can also worship hanuman ji and can read hanuman chalicha   ()

महिलाएं नहीं रख सकती हनुमान जी का व्रत 

शास्‍त्रों में ऐसा कहा गया है कि महिलाएं हनुमान जी की उपासना नहीं कर सकती हैं। दरअसल महिलाओं को पीरियड्स होते हैं और अगर किसी महिलाए ने 9 हनुमन जी के फास्‍ट रखने का अनुष्‍ठान किया हो और बीच में उसे पीरियड्स हो जाएं तो यह अनुष्‍ठान टूट जाता है। इसलिए महिलाओं को हनुमान जी का व्रत रखने के लिए मना किया जाता है। 

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पीरियड्स के समय नहीं पढ़ सकतीं हनुमान चालीसा

जिस तरह महिलाओं को व्रत करने के लिए मना किया जाता उसी तरह महिलाओं को पीरियड्स के टाइम हनुमान चालीसा का पाठ कारने की भी मनाही होती हैं। इस दौरान अगर महिला को हनुमान चालीसा याद भी है तब भी  उन्‍हें वह पढ़ने की इजाजत नही होती है। कहा जाता है कि ऐसे समय पर महिलाओं को भगवान हनुमान जी को याद नहीं करना चाहिए वरना भगवान नाराज हो जाते हैं।  

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हनुमान जी के आगे नहीं झुका सकतीं सिर 

हनुमान जी माता सीता को मां मानते थे। वह बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए उनके लिए महिला किस भी उम्र की हो वह मां सामान ही होती थी। इसलिए भगवान हनुमान खुद तो महिलाओं के आगे झुक सकते हैं मगर कोई महिला उनके आगे झुके यह उन्‍हें मंजूर नहीं। इसलिए महिलाओं को कभी भी हनुमान जी के आगे सिर झुकाने के लिए नहीं बोला जाता । 

हनुमान जी को स्‍नान नहीं करा सकतीं और वस्‍त्र नहीं चढ़ा सकतीं 

हिंदू रिति रिवाज में देवी देवताओं की प्रतिमाओं पर जल चढ़ाना एक संस्‍कार माना जाता है। ईश्‍वर की पूजा ही जल चढ़ाने के साथ शुरु होती है। महिलाएं भी सारे देवी देवताओं को जल चढ़ा सकती हैं मगर हनुमान जी की प्रतिमा पर महिलाओं को कभी भी जल नहीं चढ़ाना चाहिए। इसी तरह महिलाओं को हनुमान जी को कभी भी वस्‍त्र भी नहीं चढ़ाने चाहिए। एसा करना ब्रह्मचारी का अपमान माना जाता है।