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Vivah Panchami Vrat Katha 2025: विवाह पंचमी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दांपत्य जीवन में बनी रहेगी खुशहाली

Vivah Panchami Vrat Katha 2025: इस साल विवाह पंचमी 25 नवंबर, मंगलवार के दिन मनाई जा रही है। ये पर्व मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। ऐसे में विवाह पंचमी के दिन इस पर्व से जुड़ी व्रत कथा पड़ने से माता सीता और श्री राम का आशीर्वाद मिलता है। अगर आपके वैवाह‍िक जीवन में काेई बाधा आ रही है तो आपको इस कथा का पाठ जरूर करना चाह‍िए।
Updated:- 2025-11-25, 10:31 IST
vivah panchami vrat katha

विवाह पंचमी हिंदू धर्म में एक जरूरी पर्व है, जो भगवान श्री राम और माता सीता के शुभ विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। ये पर्व हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है। इस खास मौके पर भक्त श्री राम और सीता माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। ये माना जाता है कि ऐसा करने से सुखी वैवाहिक जीवन, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों के विवाह में किसी प्रकार की बाधाएं आ रही होती हैं, वे भी इस दिन पूजा करके उन्हें दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

इस साल विवाह पंचमी आज यानी 25 नवंबर, मंगलवार के दिन मनाया जा रहा है। ये दिन विवाह से संबंधित इच्छाओं को पूरा करने और अपने वैवाहिक बंधन को मजबूत बनाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि विवाह पंचमी के दिन इस पर्व से जुड़ी व्रत कथा पड़ने से माता सीता और श्री राम का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन हमेशा खुशहाल बना रहता है। साथ ही, विवाह में अगर देरी हो रही है तो वह भी दूर हो जाती है। चलिए जानते हैं विवाह पंचमी की कथा के बारे में विस्तार से।

विवाह पंचमी की व्रत कथा (Vivah Panchami Vrat Katha 2025)

विवाह पंचमी की कथा भगवान श्री राम और माता सीता के शुभ विवाह से जुड़ी हुई है। यह कथा बताती है कि कैसे एक कठिन शर्त को पूरा करके भगवान राम ने सीता माता को अपनी पत्नी के रूप में प्राप्त किया। कथा के अनुसार, देवी सीता का जन्म धरती से हुआ था। मिथिला के राजा जनक हल चला रहे थे तभी उन्हें खेत में एक कन्या मिली। उन्होंने उस कन्या को अपनी पुत्री मानकर उसका नाम सीता रखा इसलिए उन्हें जनकनंदिनी भी कहा जाता है।

vivah panchami ki vrat katha

सीता जब बड़ी हुईं, तो एक बार उन्होंने खेल-खेल में भगवान शिव के उस अत्यंत भारी धनुष को उठा लिया था, जिसे बड़े-बड़े योद्धा भी हिला नहीं पाते थे। यह देखकर राजा जनक बहुत आश्चर्यचकित हुए। तभी उन्होंने यह प्रतिज्ञा ली कि वे अपनी पुत्री का विवाह उसी वीर पुरुष से करेंगे जो भगवान शिव के इस विशाल और शक्तिशाली धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे तोड़ देगा।

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जब सीता विवाह योग्य हुईं तो राजा जनक ने एक स्वयंवर का आयोजन किया। उस स्वयंवर में दूर-दूर से ताकतवर राजा और राजकुमार आए जिनमें लंका के राजा रावण भी शामिल थे। सभी ने उस धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसे उठाना तो दूर हिला भी नहीं सका। सभी राजा निराश होकर बैठ गए। राजा जनक भी बहुत हताश हो गए कि क्या मेरी पुत्री के योग्य कोई वीर धरती पर नहीं है?

vivah panchami ki katha

तब महर्षि वशिष्ठ ने अपने शिष्य भगवान राम को धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा दी। गुरु की आज्ञा पाकर, शांत स्वभाव के भगवान राम ने शिव धनुष के पास जाकर उसे प्रणाम किया। उन्होंने सहजता से उस धनुष को उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ाने के लिए खींचा, वह धनुष बीच से दो टुकड़ों में टूट गया। धनुष टूटने की ज़ोरदार आवाज से पूरा ब्रह्मांड गूंज उठा।

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धनुष टूटने की शर्त पूरी होने पर सभी देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की। नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद, माता सीता ने आगे बढ़कर भगवान श्री राम के गले में जयमाला पहनाई। इस प्रकार, राम और सीता का विवाह बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इसी शुभ दिन की याद में हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है।

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image credit: herzindagi 

FAQ
विवाह पंचमी के दिन क्या दान करना चाहिए?
विवाह पंचमी के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन दान करना चाहिए।
विवाह पंचमी के दिन श्री राम और माता सीता को क्या अर्पित करें?
विवाह पंचमी पर श्री राम और माता सीता को गुड़ से बनी मिठाई, खीर, पीले या लाल रंग के वस्त्र, 16 श्रृंगार की वस्तुएं, कमल के फूल, पांच प्रकार के फल, तुलसी पत्र और पंचामृत आदि अर्पित करने चाहिए।
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