• ENG
  • Login
  • Search
  • Close
    चाहिए कुछ ख़ास?
    Search

क्या महाभारत का अश्वत्थामा आज भी जीवित है, जानें कुछ अनसुने रहस्य

महाभारत में ऐसी कई कथाएं हैं जिनके बारे में आज भी कुछ रहस्य हैं जिनका पता लगा पाना मुश्किल है। ऐसी ही एक कहानी है द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा की।   
author-profile
Published -02 Aug 2022, 17:59 ISTUpdated -02 Aug 2022, 18:28 IST
Next
Article
is aswathama still alive

जब पौराणिक कथाओं की बात आती है, तो दुनिया के हर देश की कहानियों का अपना अलग इतिहास होता है। हमारे देश में भी कई ऐसी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं जिनके बारे में दुनिया अब तक अनजान है। महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्य हमें कई हिंदू पौराणिक कथाओं के बारे में बताते हैं।

ऐसी ही एक कहानी महाभारत ग्रन्थ में आने वाले महान योद्धा अश्वत्थामा के बारे में बताती है, जिसे अंत तक दुख से भरा जीवन जीने का श्राप मिला था। जब भी अश्वत्थामा का जिक्र आता है तब उन्हें महाभारत में एक महान योद्धाओं का दर्जा दिया जाता है।

कई लोगों का मानना है कि महाभारत के युद्ध के बाद भी अश्वत्थामा जीवित थे और कई लोग इस बात की चर्चा भी करते हैं कि अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं। आइए जानें कि क्या सच में अश्वत्थामा जीवित हैं और उनसे जुड़े कुछ रहस्यों के बारे में भी जानें।  

महाभारत में कौन थे अश्वत्थामा

aswathama story in mahabharat

महाभारत में जब भी अश्वत्थामा का जिक्र आता है उन्हें गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र और ऋषि भारद्वाज के पोते, सात चिरंजीवी में से एक और अमरों में से एक  माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उन्हें भगवान शिव से अमरता का वरदान प्राप्त था।

यही वजह थी की महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद भी वो जीवित थे। अमरत्व प्रदान करने के साथ-साथ, अश्वत्थामा ने अपने जन्म के समय एक रत्न भी प्राप्त किया था जिसे उनके माथे के केंद्र में रखा गया था। रत्न ने उन्हें मनुष्यों से कम सभी जीवित प्राणियों पर शक्ति दी और उन्हें भूख, प्यास और थकान से बचाने में मदद की। 

इसे जरूर पढ़ें: महाभारत में आखिर क्यों अर्जुन को 1 साल तक रहना पड़ा था एक महिला बनकर

अश्वत्थामा का नाम कैसे पड़ा 

अश्वत्थामा का नाम सुनते ही लोगों के मन में यह विचार जरूर आता होगा कि उनका इतना विचित्र नाम कैसे पड़ा। दरअसल इसकी एक बड़ी रोचक कथा है। अश्वत्थामा ने जब जन्म लिया तब उसने अश्व के समान ध्वनि की। इसके बाद आकाशवाणी हुई कि यह बालक अश्वत्थामा के नाम से जाना जाएगा।  

महाभारत की कथा के अनुसार अश्वत्थामा के सिर पर जन्म से ही एक मणि थी। एक बार द्रौपदी ने महाभारत में अर्जुन की प्रार्थना पर गुरु पुत्र को प्राण दान दे दिया लेकिन सजा के तौर पर मणि उनसे छीन ली। 

क्या आज भी जीवित हैं अश्वत्थामा 

aswathama is aive in mahabharat

मध्य प्रदेश में महू से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित विंध्याचल की पहाड़ियों पर खोदरा महादेव विराजमान हैं। इस स्थान को अश्वत्थामा की तपस्थली के रूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज भी अश्वत्थामा यहां आते हैं।

महाभारत के युद्ध के समाप्त होने के बाद कौरवों की ओर से सिर्फ तीन योद्धा ही बचे थे कृप, कृतवर्मा और अश्वत्थामा। इनमें से अश्वत्थामा के जीवित होने के अभी भी चर्चे होते हैं। जिसकी सच्चाई का पता लगा पाना आज भी मुश्किल है। 

इसे जरूर पढ़ें: महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद कैसे हुई थी द्रौपदी की मौत

महाभारत की कहानी में कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में आज भी दुनिया अनजान है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit:wallpapercave.com, hotstar.com

Disclaimer

आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।