पेट्स के लिए सबसे जरूरी चीज़ आपका साथ होती है,  लेकिन क्या आप जानती हैं कि उन्हें ट्रेन करने के लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करने की या फिर उनके लिए अलग से ट्रेनर रखने की जरूरत नहीं होती है। अगर आपके घर में pet डॉग रहता है तो आपको भी शायद उसे ट्रेनिंग देने का खयाल आता हो। ऐसा हो सकता है कि आपको लगे कि ये आसानी से मुमकिन नहीं है और आप इसके लिए किसी एक्सपर्ट को हायर करना चाहें। कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते इस समय ऐसी सभी चीज़ों को बंद कर दिया गया है। लोग अपने-अपने घरों के अंदर हैं और सुरक्षित रहने के लिए घर के अंदर रहना ही सही है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि  लॉकडाउन का फायदा आप अपने डॉग को ट्रेनिंग देने के लिए भी उठा सकती हैं।

डॉग को ट्रेनिंग देना मुश्किल नहीं है। आप उसे बहुत बेसिक कई ट्रिक्स सिखा सकती हैं। लेकिन इसके लिए एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि अगर आपके डॉग की उम्र बहुत ज्यादा है तो उसे आप आसानी से नहीं सिखा पाएंगी। उसके लिए डॉग की उम्र कम होना जरूरी है। साथ ही साथ शुरुआत करने से लेकर आगे तक की चीज़ें सिखाने के कई तरीके होते हैं। आपको शुरुआत हमेशा बेसिक ट्रेनिंग से करनी होती है। अगर आपके घर में भी नया डॉग आया है और अभी उसकी उम्र कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक ही है तो आप उसे इन आसान स्टेप्स के जरिए ट्रेनिंग दे सकती हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि डॉग्स को 21 दिनों के अंदर ट्रेनिंग देने का क्या तरीका होता है।

क्या है ट्रेनिंग देने का सही समय-

American Veterinary Society के एक शोध के अनुसार एक डॉग की ट्रेनिंग उसके पहले तीन महीने में ही शुरू हो जाती है। छोटी उम्र के पपी उनके आस-पास की चीज़ों और गतिविधियों से ज्यादा जल्दी सीखते हैं। उस समय ये डरते नहीं हैं और ज्यादा से ज्यादा चीज़ों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। अगर उस समय उनकी सही ट्रेनिंग नहीं हुई तो हो सकता है कि वो गुस्सैल, चिड़चिड़े हो जाएं और एंग्जाइटी का शिकार हो जाएं। अगर आपके घर में छोटा पपी है तो उसे लोगों और अन्य जानवरों की आदत डालिए।

इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है-

सबसे जरूरी चीज़ जिसका ध्यान रखना चाहिए वो ये है कि अगर आप पपी की ट्रेनिंग शुरू कर रहे हैं तो उसे तुरंत सीखने में समय लगेगा। इसलिए आपको धैर्य रखना होगा। अगर उसकी उम्र थोड़ी ज्यादा बढ़ गई है यानी वो 1 साल तक का है या आपने कोई बड़ा डॉग अडॉप्ट किया है तो उसे सीखने में और भी ज्यादा समय लगेगा, इसलिए उसपर गुस्सा दिखाना या उसे मारना बिलकुल सही नहीं होगा।

डॉग्स को ट्रेनिंग देने का मतलब एक बैलेंस डॉग का होना नहीं है बल्कि उसके बिहेवियर में थोड़ा सा बदलाव लाना है। उससे घर के काम में आसानी होगी और साथ ही साथ इससे कई तरह की समस्याएं फ्यूचर में नहीं होंगी जैसे घर गंदा करना, मेहमानों के आने पर उनका चिल्लाना।

ट्रेनिंग में किस चीज़ का रखना है ध्यान-

American Kennel Society की एक रिसर्च की मानें तो डॉग ट्रेनिंग दो बेसिक कॉन्सेप्ट पर निर्भर करती है। पहला है करेक्शन यानी अपने डॉग को सही करना। उसे ये समझाना कि उसने क्या गलत किया है और क्या सही। इसमें डॉग को सज़ा देना, मारना आदि सही नहीं है। दूसरा है रिवॉर्ड यानी इनाम देना। डॉग्स को ट्रीट देना जब उन्होंने सही काम किया हो और उसे पैट करना यानी सिर पर हल्के से थपथपाना या प्यार करना। इससे उसे समझ आएगा कि इस तरह की चीज़ें करने से उसे प्यार मिलेगा और इनाम मिलेगा इसलिए ऐसा करने की उसे आदत डालिए।

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तो चलिए अब आपको बताते हैं कि 21 दिनों में हर दिन क्या करना है।

1. पहला हफ्ता-  Obedience यानी आज्ञा का पालन करना सिखाना-

डॉग्स को आपकी आज्ञा का पालन करना आना चाहिए। उसके लिए उन्हें शुरुआती एक हफ्ते में ओबीडियंस प्रोग्राम की जरूरत होगी। अगर आपके घर में नया पपी आया है तो ये सबसे बेस्ट तरीका है उसे आदत डालना, आपकी आवाज़, आपकी कमांड यहां तक कि अपने नाम की भी उसे आदत डालनी होती है।

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पहला दिन- आवाज़ और नाम पहचानने की आदत

जब पहले दिन आपकी ट्रैनिंग शुरू हो तो उसे आवाज़ पहचानने की आदत डालें। यहां पहले दिन से हमारा मतलब ये नहीं कि पहले दिन जब पपी घर में आए तभी से उसकी ट्रेनिंग शुरू कर दी जाए।यहां पहले दिन से हमारा मतलब है कि जब पपी को घर में आकर दो-चार दिन हो जाएं और वो डरना बंद कर दे तब उसकी ट्रेनिंग जिस दिन से शुरू हो वो पहला दिन होगा।

अगर आपने स्ट्रीट डॉग अडॉप्ट किया है तो भी यही रूल फॉलो करें। ट्रेनिंग के पहले दिन आपको उसका नाम बार-बार पुकारना है और ये पास जाकर कीजिए। उसका ध्यान अपनी ओर ताली बजाकर खींचने की कोशिश करिए। पहली दो तीन बार तो आपको यही करना होगा। साथ ही साथ अलग-अलग टोन में आप पपी को आवाज़ देने की कोशिश करें।

अगर बड़ा डॉग है तो?

अगर बड़ा डॉग है तो ये काम एक-दो दिन का नहीं बल्कि कम से कम 4 दिन का होगा। आपके डॉग को आदत पड़ने से पहले काफी समय लगेगा। इसलिए धैर्य रखें।

दूसरा दिन- क्रेट ट्रेनिंग-

यहां क्रेट ट्रेनिंग से हमारा मतलब है कि पपी या डॉग कहां सोएगा उसे उस जगह की आदत डालना। इसकी ट्रेनिंग आपको पहले दिन से ही देनी होगी और हो सकता है कि इसके लिए वो कुछ और दिन ले ले। क्रेट या डॉग बेड तैयार करने का सबसे आसान तरीका है कि उसमें आप कुछ ऐसे खिलौने रख दें जो डॉग को पसंद हों और उन्हें वो चबा भी सकें। छोटे पपी के लिए तो यही सबसे अच्छी तैयारी होगी।

तीसरा दिन- लीश ट्रेनिंग (बंधने की ट्रेनिंग)

ये बहुत जरूरी है कि आपके डॉग को कॉलर और लीश की आदत हो। कई बार डॉग जिन्हें आदत नहीं होती है वो कॉलर हटाने की कोशिश भी करते हैं। इसके लिए आपको उसे थोड़े-थोड़े टाइम के लिए आदत डालनी होगी। सबसे पहले तो आपको ये ध्यान रखना होगा कि एक साथ आप बहुत देर के लिए उसे न बांधें। धीरे-धीरे ही उसे आदत डालें।

अगर बड़ा डॉग है तो-

अगर बड़ा डॉग है तो उसे थोड़ा सहज होने का मौका दीजिए। वो बंधवाने से भागेगा। डॉग को थोड़े टाइम के लिए लीश के साथ ही बाहर लेकर जाएं। डॉग को ये समझाना होगा कि अगर वो इसे बंधवा लेगा तो उसे बाहर लेकर जाएंगे और उसे घुमाया जाएगा। पर ये ध्यान रहे कि डॉग्स को हमेशा बंधे रहने देना सही नहीं होता है।

चौथा दिन- वॉयस ट्रेनिंग-

अभी तक हमने डॉग को नाम पहचानने की ट्रेनिंग दी थी, लेकिन अब चौथे दिन में आप अलग-अलग टोन की वॉयस ट्रेनिंग भी उसे दें। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि आपको आपके डॉग को ये बताना है कि आप क्या समझ रहे हैं। आपको टोन मॉड्यूलेशन से ही उसे सही और गलत की समझ देनी है। न ही किसी फिजिकल तरीके से।

ट्रेनिंग देते समय ध्यान-

ट्रेनिंग देते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपकी आवाज़ हमेशा शांत होनी चाहिए। ट्रेनिंग देते समय अग्रेशन या ज्यादा गुस्सा हानिकारक हो सकता है। आप ताली या सीटी बजाकर उसका ध्यान आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन आपकी आवाज़ में खुशी, गुस्सा पहचानने की आदत आपके डॉग को डालनी होगी।

पांचवा दिन- खाना खाने के बर्तन की ट्रेनिंग-

ये सही होता है कि डॉग या पपी को एक ही तरह के बर्तन में एक ही तरह के खाने की आदत डाली जाए। शुरुआत में उसे किसी भी तरह के सप्लिमेंट या विटामिन देने की जरूरत नहीं है। अगर डॉग एक बार में पूरा खाना नहीं खाता है तो हो सकता है कि आप ज्यादा खाना दे रहे हों। इसलिए जरूरी है कि खाने की मात्रा को कम कर दें। उसी के साथ, एक बात ध्यान रखें कि डायट को बीच में न बदलें। छोटे-छोटे मील्स पपी को चार बार और बड़े डॉग को दिन में दो बार मील और बीच-बीच में एक-दो ट्रीट देना ही सही है।

खाने के बर्तन की ट्रेनिंग देने के लिए उसे एक ही जगह पर रखकर दिन में चार बार उसी बर्तन में खाना दें। खाने और पानी के बर्तन अलग होने चाहिए और साफ होने चाहिए।

क्या चीज़ रखनी है ध्यान-

कभी अपने डॉग को टेबल पर, बेड पर या फिर प्लेट में खाना न दें। उसे खाना देने के लिए आपको एक ही तरह का गहरा बर्तन और एक ही तरह की जगह सुनिश्चित करनी होगी। नहीं तो जब भी आप खाना खाएंगे तो डॉग वो खाना भी मांगेगा।

छठवां दिन- स्टे कमांड

Obedience program का सबसे जरूरी भाग ये है कि आपका डॉग ये सीख जाए कि उसे आपकी आवाज़ पर रुक जाना है और आगे नहीं बढ़ना है। स्टे कमांड की एक टेकनीक होती है। इसे सिखाने में एक दिन भी लग सकता है और कई दिन भी।

कैसे करें-

इसके लिए सबसे पहले अपने डॉग को बैठाएं या लेटाएं या खड़े रखें, लेकिन ध्यान रहे वो हिल नहीं रहा हो इसलिए बैठा कर ही शुरुआत करें, इसके बाद स्टे बोलें “stay” आवाज़ में हंसी नहीं होनी चाहिए क्योंकि डॉग्स कमांड बहुत जल्दी पहचान लेते हैं। जिस आवाज़ में आप बोलेंगे उसी को वो आपकी कमांड समझेगा। इसके बाद आप अपने हाथ से इशारा करें। अपना पंजा पूरा खुला रहें। एक उंगली से नहीं। इसके बाद उसकी नाक के सीध में पंजा रखें ताकि उसे ठीक से ये दिख जाए कि आप उसे बैठने को कह रहे हैं। हर बार जब वो आपकी कमांड माने तो उसे ट्रीट दें।

सातवां दिन- सिट कमांड

क्योंकि आप पहले ही स्टे कमांड की ट्रेनिंग दे चुके हैं इसलिए आपके लिए आसान होगा ये कमांड सिखाना। पोजीशन वही होगी, लेकिन आप अपने डॉग को बैठने का इशारा करें। हाथ को ऊपर से नीचे की ओर ले जाएं। उसे ये समझना होगा कि आप उसे बैठने को कह रहे हैं।

पहला हफ्ता बीतने के बाद आपका डॉग आपकी आवाज़ पहचानना, अपना नाम पहचानना, खाना कहां खाना है, सोना कहां है और दो बेसिक कमांड पहचान जाएगा। इसे जब चाहें तब ट्रेनिंग देते रहें।

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2. दूसरा हफ्ता- घर से बाहर जाना और पॉटी ट्रेनिंग-

आपका डॉग अब बहुत बेसिक चीज़ें सीख गया है। जो भी अभी तक आपने सिखाया वो सब वैसे ही चलने दीजिए।

आठवां दिन- फीडिंग शेड्यूल

अब आपको डॉग के फीडिंग शेड्यूल का ध्यान रखना है। पहले हफ्ते में ट्रेनिंग के लिए आपने उसे काफी ट्रीट्स दी होंगी। इसके अलावा, अगर छोटा डॉग है तो कई बार लोग मज़े में ही खिला देते हैं। ऐसा नहीं करना है। अब बड़े डॉग को दिन में दो बार और छोटे डॉग को दिन में चार बार ही खाना दें। खाना कैसे देना है और आपके डॉग को क्या खाना है इसको लेकर आप थोड़ी रिसर्च कर लें या फिर आप वेट (Vet doctor) से पूछ लें।

पर ध्यान यहां भी यही रखना है कि अगर छोटा डॉग है तो दिन में दो बार हल्का खाना और बाकी दो बार भारी, जिससे आप धीरे-धीरे हल्के खाने वाले डोज को बंद कर सकें। फीडिंग शेड्यूल को ऊपर नीचे न करें। अगर ऐसा होता है तो पॉटी ट्रेनिंग में भी दिक्कत आएगी। साथ ही डॉग में एंग्जाइटी भी बढ़ेगी।

नौवां दिन- वॉकिंग शेड्यूल

अब खाना खाने के बाद उसे वॉक पर लेकर जाएं। उसे ये आदत होनी चाहिए कि खाना खाने के बाद उसे बाहर जाना है। इसी बीच वो कई बार पॉटी भी बाहर ही करेगा और इसलिए ऐसी जगह पर ले जाएं जहां उसे पॉटी ट्रेनिंग करवानी हो। ध्यान रहे कि इसके अलावा, छोटे पपी को दिन में कई बार बाहर ले जाना होगा। ऐसा इसलिए होगा ताकि उसकी पॉटी ट्रेनिंग सही से हो पाए। एक दो दिन में ही आपका डॉग समझ जाएगा कि उसे कब खाना मिलना है और कब बाहर जाना है। ऐसा अगर आप एक हफ्ते फॉलो करते हैं तो आपका डॉग बहुत ही ज्यादा फ्री फील करेगा। उसकी बॉडी क्लॉक भी ऐसे ही सेट हो जाएगी।

दसवां दिन- नो कमांड

नो कमांड सिखाना अब आसान है क्योंकि आपका पपी पहले ही बहुत सारे कमांड सीख चुका है। वैसे तो आप पहले से ही इसे कुछ न कुछ बात के लिए मना कर रहे होंगे, लेकिन अब आवाज़ में बदलाव लाकर कीजिए। ये बदलाव लाना जरूरी है। अब 10 दिन ट्रेनिंग के हो चुके हैं इसलिए आप अपने पपी को ये सिखाएं कि आप गुस्सा भी हो सकते हैं। टोन में थोड़ा सा बदलाव लाएं। टोन में जैसे ही बदलाव आएगा वैसे ही आपकी टोन थोड़ी गंभीर होगी और पपी को ये समझ आएगा कि उसे क्या नहीं करना है।

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ग्यारवां दिन- स्पॉट ट्रेनिंग

आपको उसे ये सिखाना होगा कि हर चीज़ की एक जगह है। वो हर जगह सूसू या पॉटी नहीं कर सकता है, वो हर जगह खाना नहीं खा सकता है। वैसे अभी तक जितनी भी चीज़ें आपने उसे सिखाई हैं उनमें वो खाने की जगह पहचानना तो सीख गया होगा, लेकिन ये स्पॉट ट्रेनिंग खास तौर पर पॉटी ट्रेनिंग से जुड़ी हुई है। अभी तक आपको ये भी समझ आ गया होगा कि उसे किस तरह से पॉटी जाता है और कितने समय जाता है।

ध्यान एक बात का रखें कि उसे एक निर्धारित समय में बाहर लेकर जाएं और जो निर्धारित जगह है उसके आस-पास ही टहलाएं। ऐसा करने से उसे समझ आएगा कि उसे पॉटी कहां करनी है।

बारवां दिन- क्लैप ट्रेनिंग

अभी तक आपने अपने डॉग को वॉइस ट्रेनिंग दी है। उसे ये समझ आ गया है कि आपकी आवाज़ पर कैसे रिएक्ट करना है। अब आपको उसे क्लैप ट्रेनिंग देनी है। यानी ताली, सीटी, या ऐसी ही किसी आवाज़ पर आपको उसे बुलाना है। साथ ही अगर कोई गलती हो तो उसे सिखाना है।

एक बात का रखें ध्यान-

उसके बहुत ज्यादा करीब जाकर ये आवाज़ न निकालें। अगर ऐसा होता है तो पपी बहुत ही ज्यादा परेशान हो जाता है। इससे उसका ध्यान भटकेगा। निश्चित दूरी से ही ये काम करें।

अपनी टोन का ध्यान रखें। ताली बजाते हुए गंभीर टोन में ही बताएं??। आप दो अलग-अलग कमांड दे रहे हैं अपने डॉग को इसलिए ये जरूरी है कि आप उसे गंभीर टोन में कमांड दें।

तेरहवां दिन- बाहर की ट्रेनिंग

आप एक पूरा दिन डॉग के साथ बाहर बिताएं, पार्क या ऐसी किसी जगह पर। इसके बाद आप उसे खुलकर खेलने दें, लेकिन ये सिखाएं कि किस चीज़ को नहीं छूना है और किस चीज़ को नहीं खाना है। उसके लिए आप नो कमांड और स्टे और सिट कमांड की प्रैक्टिस कर सकती हैं। इसी के साथ आप अपने डॉग को बहुत सारी चीज़ें सिखा सकती हैं।

एक बात का ध्यान रखें कि डॉग को घर के पास आकर घर के अंदर आने की आदत होनी चाहिए। इसलिए शुरुआत में आप उसे फॉलो करना सिखाएं और उसके बाद उसे बिना लीश के अंदर जाने को कहें। थोड़े दिन में वो सीख जाएगा। अगर वो सही करता है तो उसे शाबाशी देना या ट्रीट देना न भूलें।

चौदवां दिन - डॉग को पैंपर करना और सभी कमांड दोहराना

आज का दिन आपके और आपके डॉग के लिए बहुत जरूरी है। आप बाकी सभी कमांड जैसे सिट, नो, स्टे आदि की प्रैक्टिस करें और अपने डॉग के साथ खेलें। उसे सिर्फ सिखाना ही जरूरी नहीं होता। उसे आराम से बताइए कि वो क्या कर रहा है।

दूसरा हफ्ता बीतने के बाद आपका डॉग काफी कुछ सीख गया है। उसे सभी बेसिक कमांड आती हैं और साथ ही साथ उसकी पॉटी ट्रेनिंग भी चल रही है। अभी तक उसमें आपको काफी बदलाव देखने को मिलेगा। अगर बहुत ज्यादा कमांड आप नहीं सिखा पाई हैं तो भी डॉग को ज्यादा सख्ती न दिखाएं। आराम से सिखाएं।

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3 तीसरा हफ्ता- फन ट्रिक्स

तीसरा हफ्ता शुरू होने पर हम उसे कुछ फन ट्रिक्स सिखाएंगे। ये फन ट्रिक्स काफी आसान होंगी और साथ ही साथ आपके डॉग की बाकी ट्रेनिंग साथ में चलती रहेगी। अभी तक उसका खाने का और बाहर घूमने का शेड्यूल सेट हो चुका होगा।

पंद्रहवां दिन- आपके बोलने पर भौंकना

आपके डॉग को ये सीखना चाहिए कि आपके बोलने पर कैसे भौंके। ये सिखाने में थोड़ा समय लग सकता है, shayad पूरा दिन भी। लेकिन आपको इसके लिए शांत रहना होगा और साथ ही साथ आपको कुछ ट्रीट भी रखनी होगी। आप इस वीडियो की मदद ले सकती हैं।

सोलवां दिन- हैंड शेक

ये सबसे आसान और क्यूट ट्रिक है। आपका डॉग अगर कुछ चाहता है आपसे तो हो सकता है कि वो पहले से ही अपना पंजा आपके हाथ में दे, लेकिन आपको इसके लिए अब थोड़ा सा समझना होगा। आपको अपने डॉग को ये समझाना होगा कि उसे आपके हाथ आगे बढ़ाने पर हमेशा अपना पंजा देना है। इसके लिए आप अपने डॉग को बहुत ही सावधानी से समझा सकती हैं। यहां भी ट्रीट्स आपको देनी होंगी।

क्या करें- सबसे पहले अपनी मुट्ठी में कुछ ट्रीट्स भरें और उसके बाद डॉग के सामने रखें। वो या तो मुंह लगाएगा या फिर पंजा, अगर पंजा लगाता है तो मुट्ठी खोल दें नहीं तो नहीं। ऐसा दो तीन बार करें। इसके बाद आप खाली हाथ से ट्राई करें। जब वो अपना पंजा दे तो उसे ट्रीट दें। इसके बाद थोड़ी और देर तक उसका पंजा पकड़ कर रखें।

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सत्रहवां दिन- डॉग को फेच कमांड सिखाना

किसी चीज़ को आपका डॉग लेकर आए आपकी कमांड पर ये फेच कमांड होती है। इसे सिखाने के लिए आपको कई तरह की चीज़ें करनी होंगी। इसके इंस्ट्रक्सन देखने के लिए आप ये वीडियो देख सकती हैं।

अठारवां दिन- झुकना या नमस्ते करना

डॉग्स को झुकने या नमस्ते करने की ट्रेनिंग भी आसानी से दी जा सकती है। झुकना मतलब सिर्फ सामने की बॉडी झुकाना और पीछे की खड़ी रखना। ये डॉग कई बार खेलते हुए भी करते हैं। आप अपने डॉग को सबसे पहले खड़े होने का सिग्नल दीजिए। इसके लिए जो भी सिग्नल आपने पहले से ही डॉग को सिखाया है वही फॉलो कीजिए।

उसके बाद आप अपने डॉग को कुछ ट्रीट्स दीजिए ताकि वो झुके और साथ ही साथ अपना हाथ नीचे के डायरेक्शन में दिखाइए। आपको बैठना नहीं है वर्ना आपका डॉग भी बैठ जाएगा। इसलिए आप खुद को झुके हुए डायरेक्शन में रखिए। ऐसा आपका डॉग भी करेगा। वैसे इसे करने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन आपको ये ध्यान देने की जरूरत है कि आपके डॉग को इसकी आदत डालनी है।

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उन्नीसवां दिन- गले लगाना

आपको आपके डॉग को गले लगाना भी सिखाना होगा। ऐसा आसानी से सिखाया जा सकता है। इसके लिए आप अपने डॉग को सबसे पहले सिट पोजीशन में बैठाएं। उसके बाद उसके नाक के ऊपर ट्रीट पकड़ें ऐसे में वो थोड़ा सा पंजों को ऊपर उठाएगा। जैसे ही दोनों पंजे ऊपर हों उसे ट्रीट दीजिए। इसके साथ ही साथ आप ऐसा दो तीन बार करेंगे। दो तीन बार करने के बाद आपके डॉग को पता होगा कि उसे कैसे बैठना है। इसे भी 'Sit Pretty' पोजीशन कहा जाता है।

अब आप इस पोजीशन में अपने डॉग को गले लगाएं। ऐसा दो तीन बार करें। ऐसा करने के बाद आपके डॉग को ये समझ आ जाएगा कि उसे आपको गले लगाना है। ध्यान रहे कि ऐसा करते समय या तो आप कोई इशारा करें या फिर आप अपने डॉग को Hug कमांड दें। ऐसा करने पर ही आपके डॉग को समझ आएगा कि आखिर ये कैसे हो रहा है।

बीसवां दिन- पहले की तीन ट्रिक्स की प्रैक्टिस एक साथ

आपके डॉग के लिए अभी तक काफी ट्रेनिंग हो चुकी है और बाकी चीज़ों के साथ-साथ आपके डॉग को प्रैक्टिस की जरूरत है। आखिरी हफ्ते की पहली तीन ट्रिक्स की प्रैक्टिस करें। ऐसा करने से आपको ये समझ आएगा कि कैसे आपका पपी या डॉग सीख रहा है। अगर आप उसे प्रैक्टिस नहीं करवाएंगी तो वो सारी ट्रिक्स भूलता जाएगा।

इक्कीसवां दिन- सारी ट्रिक्स एक साथ

आपको वो सारी ट्रिक्स एक साथ करनी है जो हमने आखिरी हफ्ते में करवाई है। इसी के साथ, आपको सिट, नो और स्टे कमांड को भी बहुत ही अच्छे से दोहराना है। जब तक आपका डॉग इनमें परफेक्ट नहीं हो जाता आप किसी और कमांड का सहारा न लें।