सिनेमा जगत की मां कहलाई जाने वाली निरूपा रॉय अपनी दमदार एक्टिंग के लिए बॉलीवुड में हमेशा याद रखी जाएंगी। शायद ही कोई दूसरी महिला अभिनेत्री रही होंगी जिन्होनें ऑन स्क्रीन मां का किरदार इतनी बखूबी से निभाया होगा। इसके साथ ही वह सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन की ऑन स्क्रीन मां बनी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं उनका फिल्मी करियर कैसे शुरू हुआ था। क्या वह सच में अभिनेत्री बनना चाहती थीं या बात कुछ और थी। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।

शुरुआती जीवन

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क्या आप जानते हैं कि निरूपा रॉय का असली नाम क्या है। फिल्मों में काम करने से पहले वह कोकिला किशोरचंद्र बलसारा थीं। बता दें कि जब निरूपा रॉय महज 15 साल की थी, तब उनकी शादी करवा दी गई थी। उनके पिता ने कमल रॉय से निरूपा की शादी तय की थी। जिस समय उनकी शादी हुई वह उस समय पढ़ाई कर रही थी। इसके बाद वह अपने पति के साथ मुंबई शिफ्ट हो गईं थी। हालांकि, 1946 में गुजराती फिल्म आई रनकदेवी में उन्होनें बतौर हीरोइन अपने करियर की शुरुआत की थी।

पति के शौक के कारण बनीं हीरोइन

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जी हां निरूपा रॉय हमेशा से एक्टिंग लाइन में काम नहीं करना चाहती थी। इस बात का खुलासा खुद उन्होनें एक इंटरव्यू के दौरान किया था। उन्होनें बताया था कि वह इस लाइन में अपने पति कमल रॉय के शौक के कारण अचानक आ गई थी। दरअसल, बात कुछ ऐसी थी कि निरूपा रॉय के पति को फिल्मों का बेहद शौक था और वह खुद एक अभिनेता बनना चाहते थे। उनके इस सपने को हकीकत में बदलने का मौका उन्हें तब मिला जब उन्होनें गुजराती न्यूजपेपर में फिल्म के एक्टर से जुड़ा एक ऐड देखा था। इसे देखने के बाद वह अपनी पत्नी निरूपा रॉय के साथ बीएम व्यास से मिलने गए।

उन्होनें व्यास से इस बात की गुजारिश की की वह उन्हें फिल्म में उन्हें मौका दें और एक्टर के रूप मे काम करना चाहते हैं, लेकिन व्यास ने उनकी यह गुजारिश स्वीकार नहीं की और कहा कि आपकी पर्सनालिटी एक एक्टर जैसी नहीं है। लेकिन इसके साथ ही व्यास ने यह कहा कि आप चाहें तो वह उनकी पत्नी को फिल्म में काम दिला सकते हैं। इसके बाद से कोकिला का सफर निरूपा रॉय के रूप में एक गुजराती फिल्म से शुरू हुआ।

 

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300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

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अपने फिल्मी करियर के दौरान निरूपा रॉय ने करीब 300 फिल्मों में काम किया है। उनका फिल्मी करियर बेहद ही शानदार रहा है। निरूपा रॉय को उनकी दमदार एक्टिंग के चलते क्वीन ऑफ मिसरी, ट्रेजडी क्वीन कहा जाता था।उन्होनें नौकरी, आंचल, खून पसीना, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथोनी, सुहाग, इंकलाब, गिरफ्तार, मर्द और गंगा-जमुना-सरस्वती जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया है। निरूपा रॉय ने सुपरमैन का भी रोल प्ले किया है। वह ऐसा करने वाली पहली एक्ट्रेस थीं। हालांकि, निरूपा रॉय ने हिंदी फिल्मों में अपना डेब्यू अमर राज फिल्म से किया था। इस फिल्म में वह त्रिलोक कपूर के साथ नजर आई थी। लेकिन बतौर एक्ट्रेस काम करने के बावजूद उन्हें उनकी असली पहचान एक मां के रूप में मिली। वह हिंदी सिनेमा की मां कहलाती हैं।

सबसे पहले देवी मां के किरदार निभाए

फिल्मों में मां बनने से पहले वह देवी मां का किरदार निभाया करती थीं। निरूपा रॉय ने 1940 से 1950 के दशक तक उन्होनें कई धार्मिक फिल्मों में काम किया और वह अक्सर उन फिल्मों में देवी मां बना करती थी। यही कारण हैं कि लोग निरूपा रॉय को मां के रूप में देखने लगे थे। उनकी इसी इमेज ने उन्हें बाद में अमिताभ से लेकर शत्रुघन सिन्हा तक की मां बनने का मौका दिया। 

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अमिताभ बच्चन की ऑन स्क्रीन मां

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अगर आपने इस बात पर गौर किया होगा तो शायद आप यह जानते होंगे कि अमिताभ बच्चन की ऑन स्क्रीन मां का किरदार सबसे ज्यादा निरूपा रॉय मे ही निभाया है। फिल्म दीवार का सबसे सुपरहिट डायलॉग मेरे पास मां है में मां का किरदार निभाने वाली और कोई नहीं बल्कि निरूपा रॉय ही थी। इस एक डायलॉग ने उनके इस मां के किरदार को अमर बना दिया। इसके बाद वह  खून पसीना, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथोनी, सुहाग, इंकलाब, गिरफ्तार, मर्द और गंगा-जमुना-सरस्वती जैसी कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन की मां के किरदार में नजर आईं  और इस तरह वे बन गई अमिताभ बच्चन की ऑनस्क्रीन मां। 

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