होली 2020 आ गई है और इस वक्त लगभग हर घर में होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बच्चे जहां अपनी पिचकारियों और रंगों की लिस्ट बनाने में व्यस्त हैं वहीं घर के बड़े अपने-अपने निर्धारित कामों में व्यस्त हैं। बाज़ार से क्या सामान आना है उसकी लिस्ट भी बनाई जा रही है। अधिकारियों को होली मिलन समारोह की चिंता है तो मोहल्ले के चीफ हर एक घर से चंदा लेने में व्यस्त हैं। आखिर होलिका दहन और होली पार्टी की तैयारी जो करनी है। इसी बीच हमारी मिसेज शर्मा अलग ही उधेड़ बुन में व्यस्त हैं। जहां पहले तक सिर्फ होलिका दहन की तैयारी करनी होती थी अब वहीं मिसेज शर्मा को मोहल्ले की होली पार्टी की तैयारी भी करनी है।  

अभी होली में भले ही कुछ वक्त हो, लेकिन उनकी तैयारी तो पूरी होनी चाहिए। होली के पहले का आखिरी संडे उन्होंने बड़े ही इत्मिनान से होली का सारा काम निपटाने की सोची। मंगलवार को होली है तो उसके पहले काम की आशा में संडे होली के काम का मुहूर्त तय किया गया। संडे सुबह 6 बजे का अलार्म तो बजा, लेकिन मिसेज शर्मा अलसाई मार्च की सुबह में जल्दी उठ नहीं पाईं। जैसे ही सुबह 8 बजे उनकी नींद खुली उन्हें समझ आ गया था कि स्टेशन से गाड़ी छूट गई है। जल्दी-जल्दी मिसेज शर्मा ने सुबह का चाय नाश्ता किया और अब काम की लिस्ट बनाने के लिए बैठ गईं।  

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मिस्टर शर्मा से काजू, किश्मिश, मावा, मैदा और न जाने क्या-क्या मंगवाना था। इसी बीच मिसेज शर्मा की जिंदगी में जैसे भूचाल सा आ गया। घर पर काम करने वाली मेड अभी तक नहीं आई थी। शक की सुई घूमी तो उनका सबसे बड़ा डर उनके सामने खड़ा था। काम वाली मेड ने अघोषित छुट्टी ले ली थी। इस बार बहाना था वायरल बुखार का। कोरोना के डर से मिसेज शर्मा उसे घर भी नहीं बुला सकती थीं। अब होली तक का सारा काम उन्हीं के सिर आया है। मिसेज शर्मा का चेहरा अब होली के गुलाल की तरह लाल हो गया था।  

जैसे-तैसे उन्होंने बाज़ार से लाने वाले सारे सामान की लिस्ट बनाई और मिस्टर शर्मा को थमाई। 'इस बार कोई सामान तो नहीं छूटा ना बार-बार मैं बाज़ार नहीं जाऊंगा' ये कहकर मिस्टर शर्मा ने लिस्ट ली और गाड़ी की सर्विसिंग के लिए निकल पड़े।  

वहीं बच्चों ने भी हाहाकार मचाना शुरू कर दिया था। उनकी लिस्ट भी पूरी करनी थी। मिस्टर शर्मा को आवाज़ देकर रोका गया और मिसेज शर्मा ने बच्चों की लिस्ट को पूरा कर एक और लिस्ट और अपना एक बच्चा मिस्टर शर्मा को थमा दिया। अब बारी आई रोज़ के काम निपटाने की। क्योंकि काम वाली नहीं आई थी इसलिए रोज़मर्रा का खाना-पीना, पूरे घर की सफाई और हफ्ते भर के कपड़े धोने में ही बेचारी मिसेज शर्मा ने शाम के 5 बजा दिए।  

मिस्टर शर्मा जैसे ही सामान लेकर घर आए उन्होंने शाम के चाय और उसके साथ गर्मा-गर्म मैगी की गुजारिश की। बच्चों ने भी अपनी-अपनी डिमांड रखी तो मिसेज शर्मा फिर से जुट गईं। झुंझलाई हुई मिसेज शर्मा के सामने एक और मुश्किल खड़ी थी। उसी वक्त उनके घर में मेहमानों का आना हो गया। अब उनकी खातिर करते-करते मिसेज शर्मा को रात के 9 बज गए और खाना-पीना निपटाते हुए गुजिया और नमकीन मठरी बनाने का प्लान अगले दिन के लिए पोस्टपोन हो गया।  

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खैर, रात के 10 बजे तक बर्तन वगैराह तो साफ कर लिए गए थे, लेकिन मिसेज शर्मा की हालत अब खराब हो गई थी। तो सोने का प्लान लिया। अगले दिन ऑफिस से छुट्टी भी ले ली थी।  

होलिका दहन पर एक और बड़ी मुश्किल... 

होलिका दहन का दिन आ गया था और अब तो करो या मरो की स्तिथि आ गई थी। सुबह उठकर घर के पर्दे वगैराह बदल लिए गए। मोहल्ले की होली पार्टी का न्योता आ गया था तो काम भी शुरू करना था। होलिका दहन में भी सभी को जाना था। सुबह का चाय-नाश्ता निपटा कर मिसेज शर्मा ने सामान खोला जो बाज़ार से आया था। उसमें डालडा मिसिंग था। मिस्टर शर्मा को ये बात पता चली तो वो और ज्यादा गुस्सा गए। उन्होंने तो कल ही बोला था कि सब कुछ एक बार में लिख दिया जाए। अब आखिर जैसे-तैसे वो घर से बाहर निकले तो बोले, 'सारा काम हमसे ही करवा लो, खुद बस ऑर्डर चलाना..' बेचारी मिसेज शर्मा सुनती ही रह गईं कि आखिर उनका काम बिना डालडा कैसे होगा।  

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तो काम मिस्टर शर्मा के बाज़ार से आने तक के लिए टल गया और तब तक मिसेज शर्मा ने बच्चों के कपड़े, पिचकारी, हर्बल होली का रंग और गुलास सब जमाना शुरू कर दिया। होलिका दहन के लिए पूजा की सामग्री भी तैयार करने लगीं। 

मिस्टर शर्मा भी शाम होते-होते डालडा ले ही आए। दरअसल, वो रास्ते में अपनी मित्र मंडली के साथ बैठ गए थे। डालडा आते ही शुरू हुई गुजिया बनाने की प्रक्रिया। बच्चों को मिसेज शर्मा ने बुलाया और उनसे कहा कि वो थोड़ी मदद करवा दें। मिस्टर शर्मा से कहा गया कि गैस प्लेटफॉर्म से उतार कर नीचे रख दें ताकि इतना सारा काम आसानी से हो सके। अपने-अपने हिस्से का काम कर सभी चले गए और क्रेडिट भी ले गए। 

जैसे-तैसे काम शुरू हुआ तो फिर शाम हो चुकी थी। पूजा का समय होने वाला था तो आधा काम निपटा कर मिसेज शर्मा उठ गईं। होली के लिए मठरी तो बन गई थी, लेकिन होली की गुजिया अभी भी बाकी थी। 

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होली पार्टी और गुजिया की उधेड़बुन...

होली पार्टी का वक्त भी आ गया और गुजिया की उधेड़बुन भी बनी हुई थी। सुबह 6 बजे से ही मिसेज शर्मा जुट गईं। इतने समय में बच्चे और मिस्टर शर्मा भी उठ गए और चाय-नाश्ते की फिर से डिमांड हुई। आज मिस्टर शर्मा को बिस्किट खाना मंजूर नहीं था। आखिर त्योहार जो था। इसलिए बच्चे भी चिड़चिड़ाए हुए थे कि मम्मी कुछ अच्छा बनाती ही नहीं। 

इसके बाद होली पार्टी का समय हुआ और मिस्टर शर्मा और बच्चे पार्क की ओर तैयार होकर निकल गए। 'सारा काम आखिरी दिन के लिए छोड़ देना, करती क्या हो दिन भर, त्योहार के दिन भी मज़ा किरकिरा कर दिया, आखिर हमने इतनी मदद न की होती तो क्या होता...' ये कहकर मिस्टर शर्मा तो निकल गए, लेकिन बेचारी मिसेज शर्मा गुजिया ही बनाती रह गईं। आखिर मेहमान और बच्चे और खास तौर पर मिस्टर शर्मा जब अपने दोस्तों के साथ होली खेलकर वापस आएंगे तो गुजिया तो चाहिए ही होगी।

तो ऐसे मनी मिसेज शर्मा की होली.. कुछ इसी तरह की होली भारत की हर महिला की होती है। जहां त्योहारों पर काम के अलावा उन्हें और कुछ भी करने का समय नहीं मिलता। इस होली क्यों न मिसेज शर्मा जैसी महिलाओं को थोड़ी राहत दी जाए। उनका साथ दिया जाए, आखिर त्योहार तो उनका भी है ना।