महिलाएं साल के सबसे बड़ी उत्सव यानी दिवाली के लिए काफी पहले से तैयारी शुरू कर देती हैं। दिवाली पर वे घर के लिए क्या-क्या शॉपिंग करेंगी, घर-परिवार के लोगों को क्या गिफ्ट देंगी, अपने लिए क्या खरीदेंगी, पूजा के लिए क्या-क्या सामग्रियां लेंगी, इन सब चीजों को लेकर वे पहले से ही अपना मन बना लेती हैं। लेकिन दिवाली की तैयारियों में महिलाएं कुछ बातों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिसकी वजह से त्योहार पर उनके चेहरे पर परेशानी की लकीरें झलक सकती हैं। आइए जानें ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में-

बजट सही तरीके से प्लान नहीं करना

happy diwali  dont commit these mistakes inside

अक्सर महिलाएं दिवाली के मौके पर लेन-देन के बारे में तो खूब सोचती हैं, लेकिन अक्सर वे इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं होतीं कि किस सीमा से ज्यादा खर्च करना उनके लिए सही नहीं है। त्योहार पर घर के सजावट के सामान, परिवार वालों के कपड़े और अपने लिए महंगी साड़ियां लेने की चाहत उनका बजट बिगाड़ देती है।

बजट से ज्यादा खर्च करने पर उन्हें आगे के महीनों में अपना हाथ बांधकर चलना पड़ता है, इससे त्योहार का जश्न कुछ फीका सा लगने लगता है। इसे देखते हुए अगर महिलाएं पहले से ही अपनी लिस्ट बनाकर चलें कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है और कहां खर्च करना उनके लिए जरूरी है, तो बाद में उनके लिए पछताने की नौबत नहीं आएगी। 

होड़ लगाना छोड़ दीजिए

बहुत सी महिलाएं दूसरी महिलाओं की देखादेखी नए-नए और अनूठे काम करने लगती हैं। मसलन दूसरी महिलाओं की शानो-शौकत से प्रभावित होकर उनके जैसा रहन-सहन दिखाने की कोशिश दिखाना। होड़ लगाने पर महिलाओं के भीतर हीन भावना विकसित करने लगती हैं और वे खुद को दूसरे से बढ़कर दिखाने की कोशिश का प्रयास करती हैं, फिर चाहें इसमें उनकी क्षमता से ज्यादा खर्च ही क्यों ना हो जाए।

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महंगी घड़ी, ज्वैलरी, बनारसी साड़ी, सूट, सजावटी आइटम्स कई बार जरूरत से ज्यादा शो-ऑफ के लिए खरीदे जाते हैं। ऐसा करने से महिलाएं अपना ही नुकसान करती हैं, क्योंकि इस तरह से होड़ खत्म नहीं होती, अलबत्ता छोटी-छोटी चीजों को लेकर प्रतिद्वंद्वी से महिलाओं के बीच जिरह और जरूरत से ज्यादा खर्च हो जाने पर बाद में अफसोस भी हो सकता है। 

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घर के सदस्यों पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाना

महिलाएं घर के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचती हैं। चाहें घर की साफ-सफाई हो, सजावट का काम हो या फिर पूजा कराने के विधान का, कई बार महिलाओं के घर के दूसरे सदस्यों से विचार नहीं मिलते। परिवार के हर सदस्य की प्रकृति अलग हो, यह कोई हैरानी की बात नहीं है, लेकिन मुश्किल तब आती है, जब महिलाएं फेस्टिव टाइम में घर के दूसरे सदस्यों को अपनी इच्छानुसार काम करने के लिए अत्यधिक दबाव डालती हैं। घर-परिवार के लोगों से त्योहार के दौरान एक तय सीमा तक सहायता लेना उन्हें खुशी देता है, लेकिन जब यही काम उन्हें बोझ लगने लगे, तो उनकी खुशी छिन जाती है और वे हंसी-खुशी से बात भी नहीं करते। ऐसे में अगर आप धैर्य के साथ घर के सदस्यों से हेल्प लें और उन पर बहुत ज्यादा प्रेशर ना डालें, तो आप सभी त्योहार का पूरा मजा ले सकते हैं।

जरूरत से ज्यादा काम बनता है थकावट की वजह

महिलाएं घर के हर छोटे से छोटे काम के लिए इतनी ज्यादा ऊर्जा लगाती हैं कि कई बार वे समय से पहले ही थकने लगती हैं। चाहें कपड़ों की खरीदारी हो या इंटीरियर्स शानदार बनाने के लिए शॉपिंग या फिर बच्चों के लिए खेल-खिलौने, महिलाएं इन सभी कामों में आवश्यकता से अधिक समय देती हैं और यह भूल जाती हैं कि उन्हें भी आराम करने की जरूरत है। लगातार सुबह उठकर देर रात तक काम करने से उनके घर की व्यवस्थाएं तो सही तरीके से हो जाती हैं, लेकिन उनकी सेहत पर इसका बुरा असर हो सकता है। ऐसे में महिलाओं के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे व्यस्तता के बीच अपने आराम के लिए भी थोड़ा समय निकालें, ताकि वे खुद को एक्जॉस्ट ना करें लें और त्योहार का पूरा आनंद उठा सकें।