सूफिया खान मनाली से लेह अल्ट्रा मैराथन पूरा करने वाली दुनिया की पहली महिला धावक हैं। उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 6 दिनों में पूरा किया। अल्ट्रा-मैराथन 25 सितंबर, 2021 को सुबह 7.34 बजे शुरू हुआ और 1 अक्टूबर 2021 को समाप्त हुआ। उसने 156 घंटे में 480 किमी की दूरी तय की।

इतना ही नहीं, वह दो बार गिनीज रिकॉर्ड पा चुकी हैं। उन्होंने पहली बार 2019 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था, जब वह 'द इंडियन गोल्डन क्वाड्रिलेटरल रोड' के साथ दौड़ने वाली सबसे तेज महिला बनी थीं। सूफिया और उनके सफर के बारे में आइए थोड़ा और हम इस आर्टिकल में जानें।

अजमेर की रहने वाली हैं सूफिया

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सूफिया का जन्म अजमेर में हुआ था। वह 16 साल की थीं, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था, इसके बाद उनकी देखभाल उनकी सिंगल मदर ने की। सूफिया एक एयरलाइन में थी, लेकिन साल 2018 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर रिलैक्स करने के बारे में सोचा। इसी बीच उन्होंने कई सारी मैराथन और रेस में हिस्सा लिया।

साल 2018 में बनाया रिकॉर्ड

इसी साल उन्होंने गोल्डन ट्रायंगल 720 किलोमीटर को 16 दिनों में दौड़ कर कंपलीट किया और नेशनल रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने उसके बाद 2019 और 2021 में कई और रिकॉर्ड्स भी अपने नाम किए। अब उन्होंने मनाली से लेह अल्ट्रा मैराथन की दौड़ पूरी की है। यह कामयाबी इतनी आसान नहीं थी, इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। अपनी एक्सरसाइज पर ध्यान दिया। इसके बारे में उन्होंने एक लीडिंग साइट को दिए इंटरव्यू में कहा, 'कोई भी ट्रेनिंग काफी नहीं होती है। यह सिर्फ दौड़ नहीं बल्कि सरवाइवल भी था। मैंने अपनी स्ट्रेंथ एक्सरसाइज पर ध्यान दिया। मैंने योग और प्राणायाम (रोजाना करेंगी ये 2 प्राणायाम तो वजन होगा कम) किया, इससे मेरे फेफड़ों को मजबूती मिली। मेरी बहुत अच्छी सपोर्ट टीम है, जिसने मेरी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा।'

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पहली महिला धावक बनने का कामयाब सफर

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कोई महिला जब ऐसा कुछ करती है, तो एक अलग ही खुशी और गर्व का एहसास होता है। फर्स्ट फीमेल रनर बनना सूफिया के लिए भी एक गर्व की बात है। इस बारे में उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा, 'मैं दौड़ से पहले काफी नर्वस थी। इस तरह की टरेन पर दौड़ना मेरे लिए नया था। इससे ज्यादा नर्वस इसलिए थी क्योंकि मैंने यहां के स्थानीय और आर्मी के लोगों से यहां की कई कहानियां सुनी थी। हाई एल्टीट्यूड और ऑक्सीजन की कमी में, कई लोगों ने यहां अपनी जान दी है। हालांकि मैंने खुद को मानसिक रूप से तैयार किया। जब मैं फिनिश लाइन पर पहुंची, तो मैं आश्चर्यचकित थी कि मैं बच गई और बहुत खुश थी कि मैं पहली महिला हूं, जिसने इस दौड़ को पूरा किया।'

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इस तरह के जज्बे के लिए मेंटल फिटनेस का अहम रोल

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सूफिया ने बताया कि इस तरह के कठिन टास्क के लिए मेंटल गेम ही सब कुछ होता है। आपको शुरू से लेकर अंत तक हाई पास, खराब सड़कें, कम ऑक्सीजन लेवल और खराब वेदर सब मिलता है, लेकिन आपको इन चीजों के लिए मेंटली स्ट्रॉन्ग (मेंटली स्ट्रांग महिलाओं की यह होती है पहचान) होने की जरूरत है। हमारा शरीर कठिन से कठिन परिस्थितियों में सर्वाइव कर सकता है, तो हमें बस अपने दिमाग को ट्रेन करने की जरूरत है। अगर आपका मन ही हार मान जाएगा, तो शरीर एक स्टेप भी आगे नहीं बढ़ेगा। मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार थी और इसलिए मेरा शरीर यह कर पाया।

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अब इसके बाद, सूफिया कई सारे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा होंगी। उन्होंने बताया कि उनका सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है 'दुनिया भर में दौड़ना'। उनका सपना है दौड़कर दुनिया को घूमना और इसके लिए वह खुद को तैयार कर रही हैं।

यह थी पहली महिला धावक सूफिया खान, जिन्होंने साबित कर दिया कि जज्बा हो तो सब मुमकिन है। अगर आपको यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करें। इस तरह की इंस्पायरिंग स्टोरीज पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

Image Credit: instagram & twittersufiyakhan