'2 मिनट' के फास्ट फूड को इस महिला ने बनाया पॉपुलर, बनीं अपने समय की पहली एफएमसीजी वुमन एक्जीक्यूटिव

हमारे देश के किसी भी कोने में चले जाइए। 'दो मिनट' में बन जाने वाला फास्ट फूड आपको दूर-दराज के गांव से लेकर ऊंचाई पर बसे पहाड़ों पर भी मिल जाएगा। जब भूख लगी हो तेज और कुछ पकाने के लिए ना हो बंदोबस्त तो हर कोई इसे फटाफट बनाते हैं और अपनी भूख मिटा लेते हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक हर कोई इस चाव से खाता है। क्या आप जानती हैं कि इसे देश में लाने का क्रेडिट किसे जाता है? यह जानी-मानी महिलाए हैं संगीता तलवार, जिन्हें देश की पहली एफएमसीजी वुमन एक्जीक्यूटिव होने का सौभाग्य मिला। आइए जानें उनके इस रोमांचक सफर के बारे में-
'दो मिनट' के फूड ने इस तरह लिया जन्म
आज के दौर में घर-घर बनने वाले इस फास्ट फूड का पहले नामोनिशान भी नहीं था। उस समय में चाइनीज फूड देश में प्रचलित नहीं था, खासतौर पर नूडल्स। नेसले इंडिया में रहते हुए संगीता तलवार ने इस बारे में काफी सोचा कि चाइनीड फूड को किस तरह से भारतीय डाइट में शामिल किया जाए। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया, 'हमने कई इंडियन फूड्स के बारे में लिस्टिंग की और पाया कि देश में ऐसे गर्म स्नैक्स की कमी थी, जिन्हें आसानी से पकाया जा सके। अगर समोसा, उत्पम, वणा या फिर इ़डली की बात करें तो इनमें से कोई भी जल्दी नहीं बनाया जा सकता। इसी तरह सैंडविच, पकोड़ा और समोसा बनाने में भी वक्त लगता ही है। इसी समय में हमने नूडल्स की तरह के स्नैक्स लाने के बारे में सोचा। यह फूड बच्चों को खासतौर पर पसंद आया, जबकि उस समय में बच्चों को कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती थी। जल्दी ही वह समय आ गया, जब बच्चे इस फास्ट फूड नूडल्स को एंजॉय करते नजर आए।

बेहतरीन काम से कमाया नाम
संगीता तलवा ने नेस्ले बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी जॉइन किया था। इस तरह का बड़ा ब्रांड जॉइन करने पर कोई भी सोचता है कि उसे बड़े प्रॉडक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा, लेकिन संगीता को नए प्रॉडक्ट्स में डाल दिया गया। यह काम था मैगी क्यूब प्रमोट करने का। उस वक्त संगीता ने सोचा कि उन्हें इसी में बेहतर कर दिखाना है। इस प्रॉडक्ट के प्रमोशन के लिए उन्होंने अपनी तरफ से बहुत सी कोशिशें कीं, जिससे उन्हें पहली बार काफी कुछ सीखने को भी मिला।
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महिलाओं को खुद पर यकीन रखने का दिया संदेश
संगीता इस बात को शिद्दत से महसूस करती हैं कि महिलाओं की प्रगति में ही देश की प्रगति है। वह महिलाओं को संदेश देती हैं, 'साहसी बनो, आत्मविश्वास रखो और दूसरों के लिए दयाभाव भी रखो। खुद पर भरोसा रखो-यह काम सिर्फ तुम्ही कर दिखा सकती हो। अगर तुम खुद पर यकीन नहीं करोगी तो तुम इसके लिए किसी और को भी कन्विंस नहीं कर सकतीं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए काफी साहसी होने की जरूरत होती है और मैंने की ऐसी इंस्पायरिंग जर्नी देखी भी है।

महिलाओं की जिंदगी बहुत रिच है
महिलाएं सिर्फ ऑफिस में ही काम नहीं करतीं, घर पर भी उनके लिए पूरा संसार होता है। पूरे परिवार को वे ही इकट्ठा लेकर चलती हैं। महिलाएं इमोशनल होती हैं और मुझे नहीं लगता कि उन्हें अपने इमोशन्स छिपाने की जरूरत है। एक पत्नी और मां के तौर पर उनमें जो नर्चरिंग क्वालिटी होती हैं, वे बेहद खूबसूरत हैं। इसके साथ भी वे आगे बढ़ सकती हैं, बशर्ते उन्हें यह पता हो कि वे क्या चाहती हैं।
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