भारतीय न्याय व्यवस्था अपने निर्णय लेने में हमेशा से ही निष्पक्ष रही है। जब भी जनता को कुछ अन्याय की आशंका होती है वो सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाती है। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय निष्पक्ष होने के साथ सही भी होता है तभी यहां की न्याय व्यवस्था की अपनी अलग ही जगह है। ऐसा ही एक मामला सामने आया था जब भारतीय सेना की लगभग  71 शार्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारीयों को परमानेंट कमीशन मिलने से वंचित कर दिया गया था। 

उस समय उन सभी सेना की महिला अधिकारियों ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और आज उनमें से 39 महिला अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने परमानेंट कमीशन देने का फैसला सुनाया है। आइए जानें क्या है पूरी खबर। 

71 महिला सेना अधिकारियों ने की थी अपील 

सेना में  परमानेंट कमीशन के लिए 71 महिला अधिकारियों ने अपील की थी जिसमें से सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जीतने के बाद 39 महिला सेना अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगले 7 वर्किंग दिनों के भीतर ही उन सभी महिला अधिकारियों को नई सेवा का दर्जा दिया जाए। ये वास्तव में सभी 39 महिला अधिकारियों की जीत है और भारतीय न्याय व्यवस्था का एक ऐतिहासिक फैसला है। 

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क्या होता है सेना में स्थायी कमीशन 

what is permanent commission

स्थायी कमीशन का अर्थ सेना में सेवानिवृत्ति तक करियर जारी रखना है। जबकि शॉर्ट सर्विस कमीशन 10 साल के लिए होता है, जिसमें 10 साल के अंत में स्थायी कमीशन छोड़ने या चुनने का विकल्प होता है। यदि किसी अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं मिलता है, तो अधिकारी चार साल का विस्तार चुन सकता है। उसी स्थाई कमीशन के लिए कुल 71 महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी क्योंकि उन्हें किन्ही कारणों से स्थायी कमीशन से वंचित कर दिया गया था। सभी महिलाएं अपने स्थायी कमीशन की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट गई थीं। (जानें कौन हैं न्यूट्रिशन और डाइट एक्सपर्ट स्वाति बथवाल)

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39 शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारी हुईं चयनित 

केंद्र ने अदालत को बताया कि 71 अधिकारियों में से 39 को स्थायी कमीशन के लिए योग्य पाया गया, सात चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त थीं और 25 में कुछ अन्य मुद्दों को मद्देनज़र रखते हुए चयनित नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने तब केंद्र को एक विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था जिसमें बताया गया था कि 25 स्थायी कमीशन के लिए पात्र क्यों नहीं थे।

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1अक्टूबर को सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मिले थे ये निर्देश 

supreme court decision

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को सरकार से कहा था कि वह किसी भी अधिकारी को सेवा से मुक्त न करें। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की दो-न्यायाधीशों की पीठ, जो भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं, मामले की सुनवाई कर रही थीं। महिला अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकीलों वी मोहना, हुज़ेफ़ा अहमदी और मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया था कि उनकी अयोग्यता मार्च में सुप्रीम कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट में एक साथ 3 महिला जजों ने ली शपथ)के फैसले के खिलाफ थी, जब उसने भारतीय सेना को सभी महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया था। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार को तीन महीने का समय दिया गया था।

इस प्रकार बड़ी संख्या में महिलाओं को एक साथ मिली जीत वास्तव में काबिल ए तारीफ है और ये सभी महिलाओं को अपने है के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। 

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