डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की ही तरह जीका भी मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारी है। जीका का पहला मामला अफ्रीका में साल 1947 में सामने आया था लेकिन जीका देखते ही देखते यह माहमारी भारत तक पहुंच गई। वैसे तो जीका वायरस एडीज मच्छर से फैलता है लेकिन यह प्रभावित व्यक्ति के साथ सेक्शुअल संपर्क बनाने की वजह से भी फैल सकता है। साल 2016 में WHO ने जीका को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था। गर्भवती महिलाओं के साथ ही होने वाले बच्चे पर भी जीका का खतरा अधिक बना रहता है।
जी हां मच्छर से फैलने वाला यह वायरस बेहद ही खतरनाक है। यह सीधे नवजात को अपना शिकार बनाता है क्योंकि विषाणुओं के प्रभाव से नवजात छोटे सिर के साथ पैदा हो रहे हैं। यह इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण हैं। लेकिन हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि राजस्थान में जीका वायरस जनित रोग का संबंध सिर का विकास नॉर्मल से कम होने यानी माइक्रोसेफाली से नहीं पाया गया है। माइक्रोसेफाली जन्मजात विकृति है, जिसमें बच्चों के सिर का विकास नॉर्मल से कम होता है यानी सिर का आकार काफी छोटा होता है।
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सिर के छोटे होने का संबंध जीका वायरस से नहीं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राजस्थान में जीका वायरस जनित रोग का संबंध सिर का विकास नॉर्मल से कम होने यानी माइक्रोसेफाली से नहीं पाया गया है। माइक्रोसेफाली जन्मजात विकृति है, जिसमें बच्चों के सिर का विकास नॉर्मल से कम होता है यानी सिर का आकार काफी छोटा होता है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “जीका वायरस जनित रोग के एडवांस्ड मॉलिक्यूलर स्टडीज में बताया गया है कि राजस्थान में वर्तमान में जीका वायरस से प्रभावित मरीजों में माइक्रोसेफाली और एडीज मच्छर में पाए जाने वाले जीका वायरस का संबंध नहीं है।”
मंत्रालय ने कहा कि इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने जयपुर में इसके प्रकोप के अलग-अलग समय पर जीका वायरस के पांच नमूनों से नतीजा निकाला। जयपुर में जीका वायरस के प्रकोप में 135 लोग प्रभावित हुए हैं।
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हालांकि, सरकार जीका वायरस से गर्भवती महिलाओं पर होने वाले खतरों की संभावना की निगरानी कर रही है, क्योंकि यह रोग भविष्य में अलग रूप ले सकता है या कुछ अन्य अज्ञात कारक माइक्रोसेफाली में भूमिका निभा सकता है और अन्य जन्मजात विकृति हो सकती है।
मंत्रालय ने कहा कि रोजाना आधार पर हालात की समीक्षा की जा रही है। जीका वायरस के लिए करीब 2,000 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 159 पॉजिटिव मामलों की पुष्टि हुई है।
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