सेक्‍स करना चाहिए या नहीं? यह टीन्‍स के लिए सबसे कठिन फैसलों में से एक फैसला होता है। अगर वह सेक्‍शुअल एक्टिविटीज में शामिल होना चाहते हैं तो उन्‍हें खुद को अनचाही प्रेग्‍नेंसी और सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीजेज (एसटीडीस) से खुद को बचाने की जिम्‍मेदारी भी लेनी चाहिए। बर्थ कंट्रोल और कॉन्‍ट्रासेप्‍शन मेथर्ड्स को अपनाकर लड़कियां खुद को इस स्थिति से बचा सकती हैं और इसलिए विभिन्‍न प्रकार के कॉन्‍ट्रासेप्‍शन, उनके लाभ और इस्‍तेमाल के बारे में जागरूकता महत्वपूर्ण है।

टीनएज में जल्दी सेक्शुअली एक्टिव होने के लिए जिम्मेदार फैक्टर्स-

- आर्थिक स्थिति का अच्‍छा नहीं होना

- सिंगल पेरेंट के साथ रहना

- वो व्यवहार जिनसे खतरा बढ़े (जैसे सिगरेट, शराब, नशीली दवाओं के प्रयोग)

- सेक्‍शुअली एक्टिव साथियों का होना

- कुछ मामलों में जल्दी या तेजी से प्यूबर्टल विकास होना

बर्थ कंट्रोल को लेकर जागरुकता-

यह सबसे अच्छा है जब पेरेंट्स अपने टीनएज बच्‍चे से उसके बदलते शरीर, सेक्स और बर्थ कंट्रोल के बारे में खुलकर बात करते हैं। ऑनलाइन सामग्री या केवल दोस्तों पर निर्भर रहने से गलत जानकारी भी मिल सकती है। पेरेंट्स को अपने बच्‍चों के सेक्‍शुअली एक्टिव होने से बहुत पहले ही उन्‍हें सेक्‍स एजुकेशन दे देनी चाहिए और उनके साथ सेक्‍स से जुड़े विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। उन्‍हें यह जांचना चाहिए कि क्‍या उनके बच्‍चे को प्रेग्‍नेंसी रोकने, खुद को एसटीआई से बचाने और सेफ सेक्‍स के बारे में पता है।

यदि पेरेंट्स को इस विषय पर अपने टीनएज बच्‍चे से बात करने में असहज महसूस हो रहा है तो टीन्‍स को अपने फैमिली डॉक्‍टर्स से बर्थ कंट्रोल के विकल्‍पों के बारे में चर्चा करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए।

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टीन्‍स के लिए बेस्‍ट बर्थ कंट्रोल के तरीके कौन से हैं?

संयम से काम लेना या सेक्स न करना ही अनचाही प्रेग्नेंसी और एसटीडीस से बचने का सबसे सही तरीका है। अगर ऐसा नहीं है तो बर्थ कंट्रोल के तरीकों का आंकलन कर उन्हें इस्तेमाल करना चाहिए। बर्थ कंट्रोल के तरीकों के अन्य फायदे भी होते हैं और साथ ही साथ वो मेंस्ट्रुअल क्रैम्प्स, हेवी मेंस्ट्रुअल फ्लो और एक्ने को रोकने के लिए भी सहायक होते हैं।

टीनएज द्वारा कॉन्‍ट्रासेप्टिव मेथर्ड को चुनते वक्‍त उनकी मदद के लिए इन फैक्‍टर्स को महत्‍व देना चहिए-

स्वीकार्यता या एक्सेप्टेबिलिटी: क्या यह एक ऐसा मेथर्ड है जिसका मरीज लगातार उपयोग करता रहेगा?

उस मेथर्ड की प्रभावशीलता और इंटरकोर्स की फ्रीक्वेंसी: क्‍या यह मेथर्ड इस आयु वर्ग के बच्‍चों को अक्‍सर अनियोजित सेक्‍स की स्थिति में मदद करता है? 

पर्टनर्स की संख्या और एसडीजी से जुड़ी चिंताएं: क्या मरीज पूरी तरह से सुरक्षित है? 

मेडिकल केयर की लागत और पहुंच: क्‍या मरीज लंबी अवधि तक मेथर्ड का खर्च उठा सकता है? 

मरीज और मेल पार्टनर का मोटिवेशन और संयम : क्या फोरप्ले के नतीजों के कारण इस मेथर्ड के इस्तेमाल को रोक दिया जाएगा? 

सेफ्टी और रिस्‍क: क्या इससे सिर्फ शॉर्ट टर्म फायदे मिलेंगे और लंबे समय में इसके नुकसान दिखेंगे?

व्‍यक्तिगत, धार्मिक और पेरेंट्स की फिलॉसफी : क्‍या यह उपयोग को प्रभावित करेगी? 

हर तरीके के फायदे, नुकसान और जोखिम को जानने के बाद ही टीन्स अपने लिए सही बर्थ कंट्रोल मेथर्ड को चुन सकते हैं। 

इंट्रायूटेरिन डिवाइसेस- 

इंट्रायूटेरिन डिवाइसेस (आईयूडी और आईयूएस) लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने वाले रिवर्सिबल कॉन्ट्रासेप्टिव्स हैं। ये 'T' के आकार का टूल होता है जो आपके यूट्रस के अंदर डॉक्टर द्वारा लगाया जाता है। 

- इसे हर रोज़ या फिर सेक्स के पहले इस्तेमाल करने के लिए याद रखने की जरूरत नहीं होती है।

- प्रत्येक 100 महिलाओं में 1 से कम एक साल के दौरान प्रेग्नेंट होती है।

- इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है (5-7 साल) और डॉक्टर द्वारा इसे किसी भी वक्त हटाया जा सकता है।

- इससे मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग या मेंस्ट्रुअल क्रैम्प्स बढ़ सकते हैं। 

हार्मोनल पिल्स- 

हार्मोनल पिल्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय बर्थ कंट्रोल मेथर्ड है। एक बार इसे प्रिस्क्राइब कर दिया जाए तो ये आसानी से उपलब्ध एक किफायती तरीका है।  दो तरह की पिल्स होती हैं- एस्ट्रोजन/ प्रोजेस्टेरोन के कॉम्बिनेशन वाली और सिर्फ प्रोजेस्टेरोन वाली। बर्थ कंट्रोल पिल्स प्रेग्नेंसी रोकने में 91% असरदार होती हैं, ये उन लोगों के लिए ये एक अच्छा तरीका है जिन्हें कम समय के लिए बर्थ कंट्रोल मेथर्ड का इस्तेमाल करना है, पर इन्हें लेने के लिए हमेशा याद रखने की जरूरत होती है। इसे लेने से अनियमित ब्लीडिंग, ब्रेस्ट्स में दर्द, जी मिचलाना और सिरदर्द हो सकता है। 

बर्थ कंट्रोल पैच- 

बर्थ कंट्रोल पैच में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन्स मौजूद होते हैं। ये आमतौर पर भुजाओं या फिर पीछे की ओर लगाया जाता है, लेकिन हमेशा इसे लगाना और हटाना याद रखना होता है। इसे पहले साल इस्तेमाल करने में 100 में से करीब 9 यूजर्स प्रेग्नेंट हो जाती हैं। इसके साइड इफेक्ट्स पिल की तरह ही होते हैं। साथ ही पैच के नीचे की स्किन में खुजली-जलन और पैच के नीचे स्किन डिसकलरेशन हो सकता है। 

वेजाइनल रिंग- 

वेजाइनल रिंग एक नरम छोटा प्लास्टिक का सर्कल होता है जिससे कॉम्बिनेशन पिल की तरह ही हार्मोन्स रिलीज होते हैं। इसे वेजाइना के अंदर डालना होता है और हर तीन हफ्ते में निकालना होता है। प्रेग्नेंसी रोकने के लिए ये 91% तक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके साइड इफेक्ट्स पिल की तरह ही होते हैं। साथ ही इससे वेजाइनल जलन-खुजली और डिस्चार्ज हो सकता है। 

हार्मोनल इंजेक्शन- 

प्रेग्नेंसी रोकने में हार्मोनल इंजेक्शन 94% तक असरदार होते हैं। हर तीन महीने में ये डॉक्टर के जरिए दिए जाते हैं। इससे असामान्य पीरियड्स और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। इनकी वजह से रिवर्सिबल बोन लॉस हो सकता है। 

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नॉर्प्लांट- 

नॉर्प्लांट स्किन के नीचे लगाया जाने वाला प्रोजेस्टिन (लेवोनोर्गेस्ट्रेल) कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस है जिसमें 6 पतले और लचीजे कैप्सूल होते हैं जो सिलिस्टिक रबर से बने होते हैं। ये निरंतर हार्मोन्स रिलीज करता रहता है और इसे 5 साल तक अपनी जगह पर रहने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके फायदे ये हैं कि ये लगातार इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे लगाने या हटाने के लिए रोज़ याद रखने की जरूरत नहीं होती, फोरप्ले में रुकावट या पुरुष साथी का कोऑपरेशन जरूरी है। 

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इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्शन-

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन असुरक्षित सेक्स करने या फिर कंडोम के फट जाने के कुछ ही समय बाद लिया जाता है ताकि प्रेग्नेंसी रोकी जा सके। ये एक बैकअप मेथर्ड है जिसे प्राइमेरी बर्थ कंट्रोल मेथर्ड के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसे आम भाषा में मॉर्निंग आफ्टर पिल भी कहा जाता है। इंटरकोर्स के बाद इस्तेमाल की जाने वाली बर्थ कंट्रोल पिल बर्थ कंट्रोल के सबसे अंडर यूटिलाइज्ड तरीकों में से एक है। 

इसे रूटीन में नहीं इस्तेमाल करना चाहिए बल्कि इसे उस मरीज के लिए डिजाइन किया गया है जिसने अनप्रोटेक्टेड सेक्शुअल इंटरकोर्स किया हो और उसे ऐसा किए हुए 72 घंटे न हुए हों। 

महिलाओं द्वारा इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल दो वर्गों में बांटा जा सकता है: 

- वो पीड़ित जो यौन शोषण की शिकार हों (इसमें डेट रेप भी शामिल है)।

- वो लोग जिनका जिम्मेदार कॉन्ट्रासेप्शन का रेगुलर तरीका प्रयोग करते समय फेल हो गया है (जैसे फटा हुआ या लीक होने वाला कंडोम)। 

 मूल Yuzpe मेथर्ड में दो 50-μg एथिनिल एस्ट्राडियोल / नोर्गेस्त्रेल पिल्स शामिल होती हैं जिन्हें 72 घंटों की समय सीमा के अंदर लिया जाता है। इसके 12 घंटे बाद दो अन्य पिल्स ली जाती हैं। नोर्गेस्त्रेल (norgestrel) या लेवोनोर्गेस्ट्रेल (levonorgestrel) के साथ तीस या पैंतिस माइक्रोग्राम एथिनिल एस्ट्राडियोल पिल्स ली जाती हैं। पर चारों पिल्स को हर डोज के साथ लेना होता है, ये कुल 8 पिल्स होती हैं। 

बैरियर मेथर्ड्स- 

मेल कंडोम्स: प्रेग्नेंसी रोकने में पुरुष कंडोम 82% तक असरदार होते हैं। ये एकमात्र बर्थ कंट्रोल का तरीका है जो एचआईवी और एसटीआईस से सुरक्षा प्रदान करता है। आदर्श रूप में कंडोम का इस्तेमाल अन्य कॉन्ट्रासेप्टिव मेथर्ड के साथ करना चाहिए। 

फीमेल कंडोम्स: सही मायने में ये एकलौता महिलाओं द्वारा कंट्रोल किया जाने वाला डिवाइस है जो अनचाही प्रेग्नेंसी के साथ एचआईवी सहित अन्य एसडीजीस को रोकता है। ये एक पॉलीयुरेथेन शीथ है जिसे वेजाइना में इंसर्ट किया जाता है। इसमें लचीली इंटरनल प्लास्टिक रिंग होती है जो वेजाइनल वॉल्ट के मुख में शीथ को होल्ड करती है। ये शीथ बाहरी जेनेटीलिया को आंशिक रूप से कवर करने के लिए फैल जाती है। ये कंडोम 97% तक असरदार साबित हो सकता है। इसके नुकसान ये हैं कि इसका लुक थोड़ा अजीब है और सेक्स के दौरान अगर ल्यूब्रिकेंट (अब पैकेजिंग के साथ आता है) के बिना इसे इस्तेमाल किया जाए तो सेक्स के दौरान तेज़ आवाज़ आ सकती है। ये दोनों ही टीनएजर्स को वयस्कों की तुलना में ज्यादा परेशान कर सकते हैं। 

डायाफ्राम: ये एक सस्ता बर्थ कंट्रोल का तरीका है जिससे कुछ हद तक एसटीडी से सुरक्षा मिल सकती है, डायाफ्राम उन प्रेरित टीन्स के लिए उपयुक्त विकल्प है जो एक स्थाई रिलेशनशिप में हैं। यह कंडोम की तुलना में कुछ हद तक फोरप्ले को बाधित कर सकता है, हालांकि मरीजों को यह याद रखना चाहिए कि अलग से स्पर्मिसाइड को हर बार सेक्स के पहले इंसर्ट करना जरूरी होता है जिससे ये असरदार साबित हो (81%–98%)। डायाफ्राम सेक्शुअल कॉन्टैक्ट के बाद 6 घंटे तक उसी जगह पर ही रहना चाहिए। 

सर्वाइकल कैप: ये डायाफ्राम की तरह ही होती है बस अंतर ये है कि इससे सिर्फ सर्विक्स ही कवर किया जाता है। इसे इंसर्ट करना थोड़ा मुश्किल होता है और युवा यूजर्स अपने शरीर की रचना को लेकर ज्यादा कुशल या सहज नहीं होते हैं कि वेजाइना के अंदर सही सर्वाइकल कवरेज या कैप की सही स्थिति चेक कर सकें। इस कैप को स्पर्मिसाइड से एक-तिहाई भरे बगैर या फिर सेक्स के बाद आठ घंटे से पहले निकाल देने से फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। 

स्टरलाइजेशन:  मानसिक रूप से विक्षिप्त या शारीरिक रूप से असमर्थ युवाओं के मामलों में स्टरलाइजेशन सबसे उपयुक्त कॉन्ट्रासेप्टिव ऑप्शन है। इस श्रेणी में क्रॉनिक डिसएबिलिटी शामिल है जिसमें सुधार की कोई गुंजाइश न हो, जिसमें किसी व्यक्ति की खुद की केयर करने, सीखने, स्वतंत्र रहने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की क्षमता सीमित हो। ये मरीज अक्सर आंशिक या पूर्ण रूप से संस्थागत होते हैं और परिणामस्वरूप सामान्य टीनएजर की तुलना में यौन शोषण के ज्यादा जोखिम में होते हैं। उनके पास उचित और अनुचित फिजिकल कॉन्टैक्ट के बीच अंतर करने के लिए भावनात्मक परिपक्वता और संज्ञानात्मक क्षमता का अभाव होता है और सेक्शुअल इंटिमिसी को लेकर उन्हें सही काउंसलिंग नहीं दी जाती है। फिजिकल डिसएबिलिटी उन्हें उनके केयर टेकर्स पर निर्भर बना देती है, उन्हें साइकोसोशल आइसोलेशन से जूझना पड़ता है और उन्हें निवारक हेल्थ केयर सही तरह से नहीं मिलती। 

टीनएजर्स की स्वीकृति बढ़ाना- 

कॉन्ट्रासेप्टिव के असर को बढ़ाने के लिए कॉन्ट्रासेप्शन के सभी रिवर्सिबल मेथर्ड्स को सही तरीके से लगातार इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगर मरीज के पहले विजिट पर थोड़ा ज्यादा समय उसकी शिक्षा में लगाया जाए तो ये मुमकिन है कि वो सर्विस को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा आएगा। यह प्रोत्साहित किया जाता है कि कोई व्यक्ति नैतिक समर्थन के लिए अपने पेरेंट्स या दोस्तों को लाए और, अगर मुमकिन हो तो मेल पार्टनर्स को कॉन्ट्रासेप्टिव ऑप्शन्स और उनके फायदों के बारे में हो रही बातचीत में शामिल करें जिससे कपल के बीच आपसी जिम्मेदारी और परिपक्वता आए। 

1. मरीजों को ये याद दिलाएं कि सभी इंटरैक्शन और रिकॉर्ड गोपनीय हैं, इसलिए चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। 

2. उनके कॉन्ट्रासेप्टिव मेथर्ड के बारे में मरीजों को शिक्षित करें (जैसे कि ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स के साथ डिसमेनोरिया)। 

3. मरीजों को उनके मेथर्ड के साइड इफेक्ट्स के बारे में आश्वासित करें (उदाहरण ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स की वजह से वजन का बढ़ना)। भले ही मरीज न पूछे फिर भी उन्हें बताएं।

4. मरीजों को सवाल पूछने और दोबारा प्रिस्क्रिप्शन लेने के लिए फोन करने के लिए प्रेरित करें। वर्ना वो अपना मेथर्ड इस्तेमाल करना बंद भी कर सकते हैं। 

5. जब भी मुमकिन हो ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स, कंडोम्स, स्पर्मिसाइड और ऐसे ही प्रोडक्ट्स के सैम्पल्स दिए जाएं। 

6. हर विजिट पर उन टीन्स को एक साथ इस्तेमाल किए जाने वाले कंडोम के यूज (स्पर्मिसाइड के साथ लेटेक्स टाइप ) के प्रति प्रेरित करें जो अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

7. यौन शोषण, डेट रेप और कॉन्ट्रासेप्टिव फेलियर (जैसे फटा हुआ कंडोम) के मामलों में टीन्स को 'मॉर्निंग आफ्टर पिल' की उपलब्धता और सुरक्षा के बारे में जानकारी दें। 

8. डॉक्टर विजिट्स पर मरीजों को उनके मेल पार्टनर्स के साथ आने के लिए प्रेरित करें ताकि उनकी भागीदारी और आपसी जिम्मेदारी की भावना बढ़ सके। 

सार- 

ऐसा बर्थ कंट्रोल मेथर्ड चुनना जो आपके लिए सही हो वो कई बार कन्फ्यूजिंग हो सकता है। विचार करने के लिए कई अलग-अलग फैक्टर्स हैं जैसे कि कौन से मेथर्ड्स से अनियमित ब्लीडिंग पैटर्न्स बनेंगे, कौन से तरीके आपको एसटीआईस के खतरे से बचाएंगे, आपके लिए इनकी उपलब्धता कैसी है। अपने हेल्थ प्रोवाइडर के साथ विकल्पों पर चर्चा करने से बर्थ कंट्रोल मेथर्ड्स खोजने में मदद मिलेगी जो आपके लिए सबसे अच्छा काम करेंगे। 

विशेष धन्यवाद- 

डॉ. आलोक शर्मा (एमडी, डीएचए, एमआईसीओजी, कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रीशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट एंव एम्प, इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट)

सिविल हॉस्पिटल, सुरेंद्रनगर, मंडी

हिमाचल प्रदेश

 

Reference 

https://www.cdc.gov/media/releases/2015/p0407-teen-pregnancy.html

https://www.healthychildren.org/English/ages-stages/teen/dating-sex/Pages/Birth-Control-for-Sexually-Active-Teens.aspx

https://www.caringforkids.cps.ca/handouts/birth-control-for-teens

https://www.webmd.com/sex/birth-control/birth-control-teens

https://kidshealth.org/en/teens/contraception.html

https://powertodecide.org/news/teens-guide-birth-control