प्रेग्‍नेंसी किसी भी महिला के लिए एक अद्भुत अनुभव होता है और इस समय मां और बच्चे का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। मां की प्राथमिक देखभाल स्वयं महिला से अच्‍छी कोई और कर ही नहीं सकता है। लेकिन बच्चे की हेल्‍थ के बारे में जानने के लिए कुछ टेस्‍ट करवाना बेहद जरूरी होता हैं।

प्रेग्नेंसी से पहले अपना चेकअप करवाना मां और होने वाले बच्चे दोनों की सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। अपनी डॉक्टर से डाइट और एक्सरसाइज के बारे में सलाह लेने के साथ-साथ आप इस बात पर भी चर्चा कर सकती हैं कि कहीं ऐसा कोई कारक तो नहीं है जिससे बच्चे में जन्म दोष होने का खतरा बढ़ जाये। साथ ही अगर आपको कोई मेडिकल प्रॉब्लम है, तो भी आप प्रेग्नेंसी से पहले या दौरान किसी भी विशेष देखभाल की आवश्यकता के बारे में डॉक्टर से चर्चा कर सकती हैं। CK Birla Hospital की Director और Senior Gynaecologist Surgeon Dr Aruna Kalra के अनुसार 'बच्चे में जन्म दोष होने का अधिक खतरा हो सकता हैं। अगर आपकी

  • उम्र ज्यादा है।
  • परिवार या जन्म दोष का व्यक्तिगत इतिहास है।
  • आपके पहले बच्चे में जन्म दोष है।
  • प्रेग्नेंट होने के दौरान आपने कुछ दवाओं का इस्तेमाल किया है।
  • डायबिटीज या मोटापे जैसी कोई समस्या है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान recreational drugs का इस्तेमाल या शराब पीती हैं।  

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अगर आपमें कोई जोखिम कारक है, तो आपकी डॉक्टर स्पेशल टेस्ट की सिफारिश कर सकती है जो आपके जोखिम को कम करने में हेल्प करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास जन्म दोषों का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास है, आनुवंशिक परामर्श और टेस्‍ट की सिफारिश की जाती है। अधिकांश जन्म दोष रोकें नहीं जा सकते क्योंकि उनका कारण पता ही नहीं होता है। लेकिन कुछ जन्म दोषों के जोखिम को आप कुछ टिप्स की हेल्‍प से कम कर सकती हैं:

  • प्रेग्नेंसी से पहले अपनी डॉक्टर को दिखाएं।
  • अपने जोखिम कारकों को जानें।
  • प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान रोजाना मल्टीविटामिन लें।
  • एक हेल्दी वजन बनाए रखें।
  • दवाइयां का समझदारी से उपयोग करें।
  • प्रेग्नेंसी से पहले अपनी बीमा‍रियों का ख्याल रखें।
  • शराब या अवैध ड्रग्स का इस्तेमाल ना करें।
  • इंफेक्शन से बचें।
  • हानिकारक एजेंटों से बचें।

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प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन की जरूरत

प्रेग्नेंसी के दौरान आपको विटामिन की जरूरत होती है और विटामिन सप्लीमेंट में विटामिन और मिनरल की recommended amounts होती है, जैसे विटामिन ए, सी, और डी; फोलिक एसिड; और आयरन जैसे मिनरल। प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान कम से कम 1 महीने के लिए 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड रोजाना लेने से बच्चे के ब्रेन और रीढ़ की हड्डी नामक न्यूरल ट्यूब जैसे प्रमुख जन्म दोषों को रोकने में हेल्प करता है। ज्यादातर prenatal और “women’s formula” मल्टीविटामिन के सप्ली्मेंट में फोलिक एसिड के 400-800 माइक्रोग्राम होते हैं।

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दवा लेने से पहले डॉक्टर से सुझाव लें

कुछ दवाएं जन्म दोषों से जुड़ी होती हैं। इसलिए जो कोई भी डॉक्टर आपके लिए दवाओं का सुझाव देते हैं उन्हें आपको बता देना चाहिए कि आप प्रेग्नेंट हैं या प्रेग्नेंट होने के बारे में सोच रही हैं। इसमें आपके कई डॉक्टर जैसे non pregnancy problems, मेंटल हेल्थ providers और dentist शामिल हैं। इसके अलावा, दर्द निवारक, laxatives, cold और एलर्जी का ट्रीटमेंट, vitamins, herbal products और skin treatments जैसे किसी भी समस्या के लिए दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

जन्म दोषों वाले अधिकांश बच्चे जोखिम वाले कारकों के बिना जोड़ों में पैदा होते हैं। हालांकि, जन्म दोषों का खतरा अधिक होता है जब कुछ कारक मौजूद होते हैं। अगर आप बढ़ते जोखिम पर हैं

  • आपमें आनुवंशिक विकार है।
  • आपका पहले बच्चे को अनुवांशिक विकार है।
  • आनुवांशिक विकार का पारिवारिक इतिहास है।
  • आप एक ऐसी जातीय समूह से संबंधित हैं जिनमें कुछ आनुवांशिक विकारों का खतरा अधिक है। 

हालांकि सभी प्रेग्नेंट लेडी को जन्म दोषों के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट की पेशकश की जाती है, हालांकि ये आपकी पसंद है कि ऐसा करना है या नहीं। यह जानने के लिए कि आपका बच्चा खतरे में है या पहले से जन्म दोष है, आपको एक विशेष विकार के साथ बच्चे होने और आपके बच्चे की जरूरत पड़ने वाली चिकित्सा देखभाल का आयोजन करने की अनुमति देता है। आपके पास प्रेग्नेंसी को जारी रखने का विकल्प भी हो सकता है।

उपलब्ध पूर्ण टेस्ट 

जन्म के दोषों के बारे जानने के लिए आपके लिए कई तरह के पूर्व परीक्षण उपलब्ध हैं, जैसे

Carrier tests - ये स्क्रीनिंग टेस्ट बताता हैं कि किसी में एक विरासत में मिले जीन है या नहीं। Carrier tests प्रेग्नेंसी से पहले या दौरान किया जा सकता है। सिस्टिक फाइब्रोसिस carrier स्क्रीनिंग सभी महिलाओं को प्रजनन उम्र में करवानी चाहिए, क्योंकि यह सबसे आम आनुवंशिक विकारों में से एक है।

स्क्रीनिंग टेस्ट- ये टेस्टि जोखिम का आकलन करते हैं कि बच्चे डाउन सिंड्रोम और अन्य chromosome problems के साथ-साथ न्यूरल ट्यूब दोष तो नहीं है। हालांकि ये टेस्ट यह नहीं बताते हैं कि भ्रूण के पास वास्तव में ये विकार हैं या नहीं।

डायग्नोस्टिक टेस्ट- ये टेस्ट इस बारे में जानकारी प्रदान कर सकते हैं कि क्या भ्रूण में एक आनुवंशिक स्थिति है और एमीनोसेंटिस के माध्यम से प्राप्त सेल्सं, कोरियोनिक विलास नमूना, या, शायद ही कभी, भ्रूण के blood sampling पर किया जाता है। विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके सेल्सp का विश्लेषण किया जा सकता है।

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