आजकल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें टीनेज गर्ल्स प्रेग्नेंट हो जाती हैं। अगर प्रेग्नेंसी 20 साल से कम उम्र में हो, तो इसे टीनेज प्रेग्नेंसी कहा जाता है। टीनेजर्स बहुत मैच्योर नहीं होते और इस उम्र में प्रेग्नेंसी जच्चा और बच्चा, दोनों की सेहत के लिहाज से सही नहीं होती। टीनेज में फिजिकल रिलेशन्स ना बनाने की सलाह दी जाती है। हालांकि अगर संबंध बन जाते हैं, तो टीनेजर्स को यह समझने की जरूरत होती है कि इसका उनके और उनके बच्चे पर क्या असर पड़ेगा। बहुत से टीनेजर्स यौन शिक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते, इसीलिए इस उम्र में प्रेग्नेंसी हो जाने पर सिचुएशन हैंडल करने में उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर आप टीनेज में हैं और इन समस्याओं से सुरक्षित रहना चाहती हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए कि टीनेज में प्रेग्नेंसी के क्या प्रभाव देखने को मिलता है। इस बारे में हमने बात की Dr. Supriya Arwari (M.D, D.G.O) और उन्होंने हमें इस विषय पर अहम सलाह दी-

हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

अगर कच्ची उम्र में गर्ल्स प्रेग्नेंट हो जाती हैं तो उन्हें हाई ब्लड प्रेशर( pre-eclampsia) की समस्या हो सकती है। ब्लड प्रेशर अगर लगातार ज्यादा बना रहे, तो यह किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और होने वाले बच्चे के लिए भी यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। 

डायबिटीज की हो सकती है समस्या

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टीनेज में मां बनने पर एक नहीं, बल्कि कई हेल्थ इशुज का सामना करना पड़ सकता है। इस उम्र में प्रेग्नेंसी होने पर प्रेग्नेंसी डायबिटीज के साथ कई और स्वास्थ्य समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं। 

हो सकता है प्री-मैच्योर बेबी

अगर महिलाएं 20 साल से पहले मां बन रही हैं तो बच्चे के प्रीमैच्योर होने की आशंका भी बढ़ जाती है, साथ ही बच्चे का वजन भी कम हो सकता है। इसकी वजह से बच्चे के समुचित विकास पर भी असर पड़ सकता है।  मां और बच्चे, दोनों की सेहत अच्छी रहे, इसके लिए मां की उम्र 20 साल से ऊपर होनी चाहिए, तभी मां शारीरिक रूप से प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होती है। बच्चे की डिलीवरी अगर 40वें हफ्ते में होती है, तो इसे आदर्श स्थिति माना जाता है। वहीं अगर बच्चा 37वें हफ्ते में जन्म ले ले तो बच्चे के शारीरिक अंगों के ठीक से विकसित ना हो पाने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चे के जन्म लेने के बाद भी शारीरिक अंगों के विकास की प्रक्रिया जारी रहती है। इस स्थिति में बच्चे को हेल्थ इशुज होने की आशंका बनी रहती है, जिसमें दिल और दिमाग से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। आपके बच्चे को सांस लेने, फीड करने और cognitive skills विकसित करने में समस्या हो सकती है। इसके अलावा इस अवस्था में शिशु मृत्युदर भी काफी ज्यादा होती है। 

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बच्चे का मानसिक विकास हो सकता है प्रभावित

कई मामलों में पाया गया है कि कच्ची उम्र में मां बनने पर बच्चे का मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है, मसलन बच्चा साइकोलॉजिकली डिस्टर्ब हो जाता है। इस उम्र में मां बनने पर टीनेजर्स फैमिली वालों और दोस्तों का सामना करने से कतराते हैं। इस कारण उन्हें डिप्रेशन होने की आशंका होती है। इससे भी बच्चे का विकास प्रभावित होता है। 

इस उम्र में प्रेग्नेंसी होने पर बच्चियां स्कूल जाना बंद कर देती हैं। पढ़ाई बीच में छोड़ देने पर एजुकेशन भी प्रभावित होती है। इससे आगे चलकर करियर ग्रोथ पर भी असर पड़ता है। 

टीनेज प्रेग्नेंसी में इस तरह रखें अपना खयाल

अगर आप कम उम्र में मां बन रही हैं तो आपको डॉक्टर की सलाह पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। इस बारे में obstetrician(प्रसूति से संबंधित डॉक्टर)  बताएगी कि प्रेग्नेंसी की हर स्टेज पर आपको अपनी और अपने और अपने बच्चे की देखभाल किस तरह से करनी है। इससे आप किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन से बचेंगी और आपकी सेहत भी सही रहेगी। 

वेजाइनल ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से संपर्क करें

अगर आपको वैजाइल ब्लीडिंग हो, वैजाइना से डिस्चार्ज हो रहा हो या फिर लगातार उल्टियां आ रही हों, पेट में दर्द उठ रहा हो, धुंधला दिखाई दे रहा हो, सिरदर्द और शरीर दर्द हो रहा हो, टॉयलेट करते हुए जलन महसूस हो रही हो या फिर पैर सूज रहे हों तो बिना देरी किए आप डॉक्टर से संपर्क करें। 

टीनेज प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए सबसे अच्छा यही रहता है कि टीनेज में फिजिकल इंटिमेसी से बचा जाए, हालांकि यौन शिक्षा और कॉन्ट्रासेप्टिव्स के बारे में जानकारी जैसे कि बर्थ कंट्रोल पिल्स, कंडोम्स और आईयूडी आदि के बारे में पता होने से टीनेज में प्रेग्नेंसी से बचाव किया जा सकता है। अगर आप टीनेज में मां बनने का फैसला ले लेती हैं तो पहले दिन से ही अपने बच्चे का पूरा खयाल रखें। 

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Reference: https://www.healthline.com/health/adolescent-pregnancy