हर रोज बढ़ती बीमारियों के मद्देनजर महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बडे़ शहरों में यौन संबंधों में बढ़ती आजादी और एक से ज्यादा पार्टनर की वजह से भी कई यौन संबंधी बीमारियां होने का डर होता है। जेपी हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजिस्ट व आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर श्वेता गोस्वामी का कहना है कि यौन परेशानियों को जल्द से जल्द पहचान कर डॉक्टर के पास जाना आवश्यक हो जाता है। ऐसा न करने पर बांझपन जैसी बड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

स्त्री-पुरुषों में स्पष्ट शारीरिक भिन्नता होती है। स्त्रियों में प्रजनन अंगों का योनि, गर्भाशय व गर्भनली के माध्यम से सीधा संबंध होता है। पति-पत्नी के बीच फिजिकल रिलेशन दोनों के जीवन का सुखकारी समय होता है, किंतु कई बार महिलाओं में प्रसव, मासिक धर्म व गर्भपात के समय भी संक्रमण होने का डर होता है।

pregnant women inside

पेल्विक इनफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) 

यह ज्यादातर असुरक्षित संबंधों के कारण फैलने वाली बीमारी है। मेट्रो शहरों में धीरे-धीरे यह महिलाओं की इन्फर्टिलिटी का एक बड़ा कारण बन रही है। इसकी चपेट में 15 से 24 साल तक की लड़कियां ज्यादा आ रही हैं। पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में इससे पीड़ित होने वाली महिलाओं की संख्या कम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर लगाम नहीं लगाई तो यह आने वाले समय में बड़ी दिक्कत में तब्दील हो सकती है। इसका असर नई पीढ़ी के मां बनने पर पड़ सकता है।

डॉक्टर श्वेता गोस्वामी ने बताया कि यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है। इसकी सबसे बड़ी पहचान है कि महिलाओं का वजन अचानक से बढ़ने लगता है, महावारी अनियमित हो जाती है, मुंहासे की समस्या और गंजापन भी हो सकता है। बच्चे पैदा करने की उम्र में लगभग 1 से 10 महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है। फेलोपियन ट्यूब और प्रजनन से जुडे़ अन्य अंगों में भी इससे सूजन आ सकती है। समय पर उचित इलाज न कराने पर इसका नतीजा इन्फर्टिलिटी के रूप में सामने आ सकता है।

Read more : पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले ब्रेस्‍ट और पेट में होता है दर्द तो ये उपाय अपनाएं

लक्षणों को अनदेखा न करें

आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर श्वेता गोस्वामी बताती हैं कि यह बीमारी क्लैमायडिया ट्रैकोमाइटिस नाम के बैक्टीरिया के कारण होती है। यह क्लामायडिया बैक्टीरिया की एक स्पीशीज है। बडे़ शहरों में यौन संबंधों के मामले में बढ़ती आजादी और एक से ज्यादा पार्टनर इसके फैलने की सबसे बड़ी वजह हैं। इसके अलावा साफ-सफाई का ध्यान न रखने, शराब या स्मोकिंग के कारण इम्यून सिस्टम के कमजोर पड़ने से भी इसका बैक्टीरिया महिलाओं को अपना निशाना बना सकता है।

pregnant women inside

मेट्रो शहरों में इसकी चपेट में आने वाली महिलाएं 3 से 10 प्रतिशत के बीच है। यह महिलाओं के सोशल स्टेटस और सेक्सुअल बिहेवियर पर काफी निर्भर करता है। 25 साल से कम उम्र की लड़कियों के इसकी चपेट में आसानी से आने का कारण यह है कि उनकी बच्चेदानी का मुंह इस उम्र तक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का सामना करने के लिए तैयार नहीं होता है। इसके कारण वे ऐसे रोगों का शिकार बन जाती हैं। यही बीमारियां बाद में पीआईडी की बड़ी वजह बनती हैं।

जागरूकता है जरूरी

डॉक्टर श्वेता गोस्वामी ने बताया कि पीआईडी की चपेट में आने पर वैजाइनल इरिटेशन हो सकती है, वाइट डिस्चार्ज की शिकायत हो सकती है। पेडू के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है, बुखार आ सकता है व उल्टी भी हो सकती है। साथ ही पीरियड्स से पहले और बाद में या शारीरिक संबंध कायम करते समय ब्लीडिंग हो सकती है। इसके कारण पेशाब करते समय जलन भी हो सकती है। कई बार इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में ऐसे लक्षण नजर नहीं आते। 

कैसे पाएं छुटकारा

डॉक्टर श्वेता गोस्वामी का कहना है कि पीआईडी के ज्यादा मामले मेट्रो शहरों में आते हैं। नई पीढ़ी की महिलाओं को इस बारे में जागरूक करने की जरूरत है। इस बीमारी के प्रति लापरवाही आपका मां बनने के सुख से वंचित कर सकती है। पीआईडी से जुडे़ लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। निरंतर चेकअप के साथ दवाओं से इसका इलाज आसानी से संभव है। लापरवाही करने पर यह बीमारी पूरे प्रजनन प्रणाली को अपनी चपेट में ले सकती है।

pregnant women inside

हनीमून सिस्टाइस भी बड़ी समस्या

नवविवाहिताओं में यूटीआई अति सामान्य है। इसको हनीमून सिस्टाइस भी कहते हैं। महिलाओं में मूत्र छिद्र योनिद्वार और मलद्वार के पास स्थित होता है। यहां से जीवाणु आसानी से मूत्र मार्ग में पहुंचकर संक्रमण कर सकते हैं। करीब 75 प्रतिशत महिलाओं में यूटीआई आंतों में पाए जाने बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। इसके अतिरिक्त अनेक अन्य प्रजाति के जीवाणु भी यूटीआई उत्पन्न कर सकते हैं।

करीब 40 प्रतिशत महिलाएं इससे जीवन में कभी न कभी ग्रसित हो जाती हैं। अगर बात लक्षणों की करें तो यूटीआई होने पर बार-बार पेशाब आता है, पर पेशाब कुछ बूंद ही होता है। मूत्र त्याग के समय जलन और कभी-कभी दर्द होता है। मूत्र से बदबू आती है, मूत्र का रंग धुंधला हो सकता है। कभी-कभी खून मिलने के कारण पेशाब का रंग गुलाबी, लाल, भूरा हो सकता है। पति या पत्नी दोनों में किसी को भी संक्रमण होने पर यौन संबंध बनाए जाते हैं तो यौन संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। यदि उपचार नहीं किया जाता तो शरीर के अंगों में दर्द हो सकता है, बुखार हो सकता है। कुछ स्थितियों में संक्रमण मूत्राशय से ऊपर गुर्दों में पहुंचकर इनमें संक्रमण कर सकता है।

बहरहाल, आपके प्रजनन अंग साफ व सुरक्षित रहें, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने प्रजनन अंगों के बारे में जागरूक हों। उनमें किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

 

  • Saudamini Pandey
  • Her Zindagi Editorial