क्‍या आप मोबाइल का इस्‍तेमाल करती हैं?
आपका हर काम मोबाइल से होता है?
यहां त‍क कि आप मोबाइल फोन पास में रखकर सो जाती हैं? अगर आपका जवाब है तो आपको एक बार सोचने की जरूरत है। आज हम आपको मोबाइल के नुकसान के बारे में नहीं बात रहे बल्कि उन संकेतों के बारे में बता रहे हैं जो आपको बताएंगे कि आपको कब मोबाइल का इस्‍तेमाल बंद कर देना चाहिए क्‍योंकि मोबाइल अब आपकी हेल्‍थ पर बुरा असर कर रहा है। तो देर किस बात की आइए हमारे साथ आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट अबरार मुल्‍तानी से ऐसे ही कुछ संकेतों के बारे में जानें जो मोबाइल का इस्‍तेमाल बंद करने के लिए आपकी बॉडी देती है। जी हां अबरार मुल्‍तानी हमें समय-समय पर हेल्‍थ और फिटनेस से जुड़ी समस्‍याओं का समाधान देते रहते हैं।  

एक्‍सपर्ट अबरार मुल्‍तानी का कहना हैं कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि '' मोबाइल हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्‍सा बन गया है। मोबाइल के बिना आज को अपनी जिन्दगी की कल्पना भी नहीं कर सकता और उसे हमेशा इसे अपने पास ही रखना चाहता है। लेकिन इसका मतलब यह नही है कि आप पूरा दिन मोबाइल पर ही लगे रहें। जहां इससे अनेक फायदें है, वहीं कुछ नुकसान भी है।'' 

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mobile warning sign inside

कब आपको मोबाइल फोन छोड़ देना चाहिए?

  • जब गर्दन में दर्द हो।  
  • हाथों में दर्द हो।
  • हाथों में सुन्नपन आने लगे।
  • हाथों में गर्मी का एहसास हो।
  • हाथों में कमजोरी लगने लगे।
  • अंगूठे और कलाई में दर्द हो।
  • पीठ में कंधे के बीच या गर्दन के नीचे दर्द या जलन हो।
  • आंखों में कमजोरी, जलन या दर्द हो।
  • जब आंखों के सामने धब्बे नज़र आने लगे।
  • व्यवहार में चिड़चिड़ापन।
  • एकाग्रता न होना और याददाश्त कम हो जाना।
  • अस्पष्ट डर या फोबिया।
  • अवसाद या डिप्रेशन।
  • चक्कर आने लगे।
  • सिर में दर्द हो।

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समाधान

  • मोबाइल का उपयोग सीमित करें।
  • रात में फ़ोन जल्दी बंद कर दें।
  • सोशल मीडिया पर कम पोस्ट, कमेंट और फ़ोटो शेयर करें।
  • जहां तक संभव हो इंटरनेट का प्रयोग डेस्कटॉप या लैपटॉप पर ही करें।
  • काल के लिए अलग सिंपल मोबाइल फोन हो और नेट के लिए अलग स्मार्टफोन और स्मार्टफोन को अपने साथ न रखें तो भी काफी राहत मिल सकती है।
  • ध्यान या मेडिटेशन करें।
  • योग करें।
  • गर्दन एवं कमर को सीधा रखें।
  • सिर को झुकाकर मोबाइल का प्रयोग न करें।
  • गर्दन के लिए योग एवं आसन या एक्‍सरसाइज करें।
  • प्रकृति से नज़दीकी बढ़ाएं।
  • बुक्स पढें।

यक़ीनन आभासी दुनिया से वास्तविक दुनिया ही ज्यादा अच्छी है, यह सच स्वीकार करें।