तीन नदियों के संगम पर, प्रयागराज एक बेहद अद्भुत जगह है। प्रयागराज का आध्यात्मिक महत्व जितना अधिक है, ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह उतना ही महत्व रखता है। बता दें कि मुगल शासन के दौरान, अकबर ने प्रयाग के महत्व को महसूस किया और नदी के संगम पर एक किले के साथ इलाहबाद नामक एक महत्वपूर्ण शहर का निर्माण किया, जिसे आज प्रयागराज के नाम से जाना जाता है। प्रयागराज का अपना एक समृद्ध इतिहास रहा है। 1857 के विद्रोह के बाद, अंग्रेजों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांतों की राजधानी को इलाहाबाद में स्थानांतरित कर दिया, जहां यह अगले बीस वर्षों तक रहा। इलाहाबाद में भारत के सबसे प्रमुख अंग्रेजी दैनिकों में से एक पायनियर को भी प्रकाशित किया गया था। अपने समृद्ध इतिहास के परिणामस्वरूप, प्रयागराज में कई मुगल और ब्रिटिश स्मारक हैं जिन्हें देखकर आप यहां के इतिहास से एक बार फिर से रूबरू हो सकती हैं- 

खुसरो बाग

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 लुकरगंज में स्थित, खुसरो बाग प्रयागराज में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है और अपना एक अलग ऐतिहासिक महत्व रखता है। खुसरो बाग की चारदीवारी को मुगल वास्तुकला का एक आश्चर्यजनक अवशेष कहा जा सकता है। इसमें जहाँगीर परिवार की तीन बलुआ पत्थर की कब्रें हैं; उसकी पत्नी; शाह बेगम, उनके बेटे; ख़ुसरो मिर्ज़ा और उनकी बेटी; सुल्तान निठार बेगम। ज्यादातर जगह के डिजाइन का श्रेय अजा रेजा को दिया जाता है, जो जहांगीर के दरबार में एक कलाकार थे। अमरूद के पेड़ों और गुलाबों के विस्तृत सुंदर बगीचे के बीच, खुसरो बाग़ के मकबरों पर नक्काशी और शिलालेखों को देखा जा सकता है।  

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इलाहाबाद म्यूजियम

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प्रसिद्ध चंद्रशेखर आज़ाद पार्क के अंदर स्थित, इलाहाबाद म्यूजियम भारत के राष्ट्रीय स्तर के म्यूजियम्स में से एक है। यह कला, इतिहास, पुरातत्व, वास्तुकला, पर्यावरण और साहित्य से संबंधित कलाकृतियों के अद्भुत प्रदर्शनों के माध्यम से भारत के इतिहास, संस्कृति, विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन की झलक पेश करता है। इलाहाबाद संग्रहालय के मुख्य आकर्षण रॉक मूर्तियां, राजस्थान से लघु चित्र, कौशाम्बी से टेराकोटा, बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट से साहित्यिक और कलाकृति हैं। हड़प्पा सभ्यता के ऐतिहासिक युग से आरंभ, मध्ययुगीन काल की कलाकृतियाँ, गुप्त काल और खजुराहो से नक्काशी, अंग्रेज़ों के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम तक, इलाहाबाद संग्रहालय यकीनन भारतीय इतिहास का खजाना है। इलाहाबाद संग्रहालय ग्रीन प्रोजेक्ट के लिए एक गैलरी भी है जहां आप डिजिटल रूप में वर्तमान और अतीत के पर्यावरण-जीवन को देख सकती हैं।

 

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चंद्रशेखर आज़ाद पार्क 

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मूल रूप से ब्रिटिश औपनिवेशिक युग के दौरान इसे अल्फ्रेड पार्क के रूप में जाना जाता है। लेकिन आज इसे लोग चंद्रशेखर आज़ाद पार्क या कंपनी गार्डन के रूप में पुकारते हैं। प्रयागराज के जॉर्ज टाउन में स्थित, यह पार्क 1870 में प्रिंस अल्फ्रेड के शहर में आने के एक महत्वपूर्ण चिह्न के रूप में स्थापित किया गया था। लेकिन बाद में इसी पार्क में चंद्रशेखर आजाद के शहीद होने के बाद इस पार्क का नाम बदलकर चंद्रशेखर आज़ाद पार्क कर दिया गया। यह सबसे बड़ा स्थानीय पार्क है और 133-एकड़ में फैला है, जहां पर आप जॉगिंग से लेकर पिकनिक मना सकते हैं। पार्क के सेंट में पार्क हाउस में जॉर्ज पंचम और विक्टोरिया की विशाल मूर्तियां भी हैं। वहीं चंद्रशेखर आजाद की कोल्ट रिवाल्वर को इलाहाबाद संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए रखा गया है और उनके सम्मान में यहां एक स्मारक भी स्थित है।

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इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी

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यह लाइब्रेरी पूरे राज्य में सबसे बड़ी है। इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी में 1,25000 से अधिक पुस्तकों, कई अरबी मैन्युस्क्रिप्ट्स और कई सदियों पुराने प्रकाशनों और समाचार पत्रों का एक बेहतरीन कलेक्शन है। इसलिए, यदि आप पढ़ना पसंद करती हैं और किताबों की बेहद शौकीन हैं, तो प्रयागराज में इस लाइब्रेरी में आपको एक बार जरूर जाना चाहिए। इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना वर्ष 1864 में की गई थी और तब से, यह ऑटोडिडैक्ट्स के लिए ज्ञान का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

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