भारतीय रसोईघरों में कई तरीके के मसाले रखे जाते हैं, जिनका इस्तेमाल हम अपने पकवानों में खूब करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है इनकी भी एक्सपायरी डेट होती है। जिसके बाद उनका इस्तेमाल खाने में नहीं किया जाना चाहिए। समय खत्म होने के बाद इन मसालों से ताजगी और फ्लेवर दोनों चले जाते हैं। मसालों का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से पकवानों में किया जाता है। यह न सिर्फ खानें में स्वाद और फ्लेवर को बढ़ाते हैं बल्कि खाने को खराब होने से भी रोकते हैं। बिना मसाले का खाना बेस्वाद और बेरंग नजर आता है। इसके अलावा मसाले कैंसर, न्यूरोलॉजिकल, हृदय और सूजन संबंधी जैसी बीमारियों के रोकथाम के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करते हैं। रिसर्च के मुताबिक जड़ी बूटियां और मसाले जैसे अजवाइन, लौंग, रोजमैरी आदि में एंटीऑक्सीडेंट अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

अलग-अलग तरीके के होते हैं मसाले

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  1. फ्रेश मसाले- फ्रेश मसाले जैसे अदरक और लहसुन सूखाकर रखने के बाद इनमें अधिक स्वाद होता है, लेकिन इन्हें ज़्यादा समय तक नहीं रखा जा सकता है। 
  2. साबुत सूखे मसाले- इन्हें अधिक समय तक रखा जा सकता है। साबुत मसालों को बारीक पाउडर बनाने के लिए टोस्ट किया जाता है और इससे स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ जाती है।
  3. ग्राउंड मसाले- ग्राउंड मसाले जो हम बाजार से ख़रीदते हैं, इन मसलों की ताजगी समय के साथ कम होती जाती है, और आमतौर पर यह दो से तीन साल से अधिक नहीं रहते हैं।
 

मसालों की एक्सपायरी डेट

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मसाले पौधे की सूखी जड़ों, तने या छाल से बनाए जाते हैं, जिनका उपयोग मौसम के अनुसार भोजन में किया जाता है। जड़ी बूटी एक पौधे की सूखी या ताजी पत्तियां होती हैं जिनका उपयोग भोजन के व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने और गार्निश करने के लिए किया जाता है। सूखे मसालों और हर्ब की एक्सपायरी डेट उसके प्रकार, प्रोसेसिंग और स्टोरेज पर निर्भर करती है। सूखे मसाले, सूखे हर्ब की तुलना में अधिक दिन रह सकते हैं क्योंकि यह मसाले ताजे होते हैं और इनका इस्तेमाल कम से कम किया जाता है। ग्राउंड मसाले यानी जमीनी मसाले कम से कम दो से तीन साल तक खराब नहीं होते हैं। इनमें लहसुन पाउडर, अदरक पाउडर, दालचीनी पाउडर, इलायची पाउडर, हल्दी पाउडर, मिर्ची पाउडर आदि शामिल हैं।

साबुत मसाले अधिक समय तक रखे जा सकते हैं, क्योंकि वे हवा, रोशनी और नमी के संपर्क में कम आते हैं। इससे उन्हें जमीन के मसालों की तुलना में उनके स्वाद और सुंगधित तेलों को संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह मसाले करीबन चार साल तक चल सकते हैं। इनमें धनिया, साबुत काली मिर्च ,सरसों के दाने ,जीरा ,सौंफ, लौंग, दालचीनी के छिलके, सूखी मिर्च, जायफल लेमनग्रास आदि शामिल है।

सूखे मसालों की बात करें तो इनकी सेल्फ़ लाइफ दो से तीन साल तक होती है। इनमें से जो कॉमन मसाले हैं जैसे अजमोद, तुलसी, ओरिगैनो, रोजमैरी, तेज पत्ता आदि शामिल हैं, जिन्हें तीन साल तक रखा जा सकता है।

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सेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए मसालों को ऐसे करें स्टोर:

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  • हवा के संपर्क को कम करने के लिए एयर टाइट ग्लास जार या कंटेनर में मसाले स्टोर करें।
  • सूरज की रोशनी से दूर एक शांत, शुष्क और अंधेरी जगह पर मसालों को स्टोर करें ताकि गर्मी, प्रकाश और नमी के संपर्क को कम किया जा सके।
  • हर्ब या मसाले का उपयोग करते समय, इसे सीधे डिश के ऊपर कंटेनर से न छिड़कें, क्योंकि डिश से गर्म भाप कंटेनर में प्रवेश कर सकती है जिसकी वजह से मसालों में नमी आने की सम्भावना रहती है। इसके बजाय डिश में हर्ब या फिर मसालों को डालने के लिए चम्मच का उपयोग करें।
  • अगर आप अपने मसाला कंटेनरों में किसी भी मोल्ड को नोटिस करते हैं, तो उसे तुरंत फेंक दें।
  • आप ग्लास कंटेनर, सिरेमिक जार में मसाले स्टोर कर सकती हैं क्योंकि वे सबसे अच्छे विकल्प हैं। प्लास्टिक के कंटेनरों का भी उपयोग किया जा सकता है, लेकिन वे विभिन्न मसालों के रंग और गंध को अवशोषित कर सकते हैं और हवा भी मसालों में प्रवेश कर सकती हैं।
  • आप स्टेनलेस स्टील के कंटेनर में मसाले स्टोर कर सकते हैं, लेकिन सुनिश्चित करें कि यह स्टोव से दूर स्टोर हो। मसाले और हर्ब को रेफ्रिजरेटर में स्टोर करने की आवश्यकता नहीं है।

अगर आप मसाले मार्केट से खरीदती हैं तो पैकेट पर एक्सपायरी डेट लिखा रहता है। ऐसे में कोशिश करें कि दिए गए समय के अंदर ही मसालों का इस्तेमाल करें, क्योंकि जड़ी बूटी या मसाले का स्वाद और गुणवत्ता समय सीमा के भीतर संरक्षित रहती है। अगर आपको नहीं पता कि किचन में मौजूद मसाले कितने समय से हैं तो मसाले की खुशबू और स्वाद की चेक करें। इसके लिए आप अपनी हथेली पर थोड़ा मसाला लें और उसे कुचल कर चेक करें। अगर इसमें तेज सुगंध और स्वाद नहीं है तो इसका मतलब है कि यह खराब हो चुका है। इस तरह की जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।