ओडिशा भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित राज्य है जो खनिज के साथ-साथ अपने बेहद खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी जाना जाता है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के पास स्थित है एक छोटा पर बेहद खूबसूरत जिला मयूरभंज। यह अनुसूचित जनजाति बहुल जिला है। यहां सबसे ज्यादा संथाल भाषा बोली जाती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में उड़िया भाषा का प्रयोग ज्यादा होता है। ब्रिटिश राज के दौरान इस जिले में शाही राज हुआ करता था। यहां की आबो-हवा बेहद मनमोहक है।

जो भी पर्यटक ओडिशा घूमने आते हैं वह मयूरभंज आना पसंद करते हैं। यहां पर कई ऐसी मन मोहक चीजें हैं जो आपको प्रकृति के बेहद करीब ले जाएंगी। हर साल छुट्टियों के मौसम में यहां पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में-

मयूरभंज पहुंचने का मार्ग

आप मयूरभंज लिए रेल, प्लेन और सड़क मार्ग तीनों रास्तों से जा सकते हैं।  

Interesting Facts About Odisha Mayurbhanj

यहां के रेलवे स्टेशन की बात करें तो यह बारीपाड़ा हावड़ा-चेन्नई रेलवे कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है। यहां से भुवनेश्वर और कोलकाता के लिए रेगुलर ट्रेनें चलती हैं। आप कोलकाता से ट्रेन के जरिए मयूरभंज के बारीपाड़ा तक आसानी से पहुंच सकती हैं। बारीपाड़ा कई अन्य शहर जैसे बालासोर, भुवनेश्वर, कोलकाता,  जमशेदपुर और कटक से भी जुड़ा हुआ है।

आपको बता दें कि बारीपाड़ा शहर मयूरभंज जिले का सबसे मुख्य शहर है। यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 195 किलोमीटर दूर है। आप प्लेन से भुवनेश्वर तक आ सकती हैं और बाद में सड़क मार्ग से इस जिले तक पहुंच सकती हैं। यहां से झारखंड का बिरसा मुंडा हवाई अड्डा 257 किलोमीटर दूर है ,जबकि राउरकेला हवाई अड्डा 282 किलोमीटर दूर है।

मार्गमयूरभंज जिले तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग की व्यवस्था बहुत अच्छी है। यहां के लिए संबलपुर, पुरी, बोलनगीर, झाड़ग्राम, अंगुल, रांची के साथ-साथ कोलकाता और ओडिशा राज्य के सड़क परिवहन निगम के बहुत सी वातानुकूलित बसें चलती हैं। आप चाहें तो अपने निजी वाहन से भी यहां आ सकती हैं।

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मयूरभंज आने के लिए करें इस समय का चुनाव

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आपको बता दें कि अगर आप यहां घूमने का सोच रही हैं तो आप सितंबर से मार्च के बीच अपना प्लान बना सकती हैं। इन महीनों में यहां मौसम बहुत सुहावना रहता है और पर्यटकों को घूमने में भी आसानी रहती है। यहां आपको कई तरह की नई चीजों का अनुभव होगा।

जानें सिमलीपाल नेशनल पार्क में क्या है खास?

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सिमलीपाल नेशनल पार्क बारीपाड़ा के जिले मुख्यालय से केवल 17 किलोमीटर दूर है। यह नेशनल पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। यह एक बाघ आरक्षित क्षेत्र है। यहां के हरे-भरे जंगल और जानवरों की कई प्रजातियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यहां आपको कई तरह के पक्षी भी देखने को मिलेंगे। पार्क के अंदर का दृश्य आपका मन मोह लेगा। यहां बरेहीपानी और डोरंडा झरना भी है जो पर्यटकों के मुख्य आकर्षणों में से एक है।  

देवकुंड झरना

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देवकुंड झरना सिमलीपाल फॉरेस्ट रेंज के उडाला डिवीजन में स्थित है और यह भारत का 19वां सबसे ऊंचा झरना है। इस झरने से थोड़ा आगे दुर्गा देवी का मंदिर स्थित है। इस मंदिर में पूरी श्रद्धा से पूजा और अनुष्ठान किया जाता है।

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जानें लुलुंग प्रवेश द्वार में क्या है खास?

यह सिमलीपाल नेशनल पार्क में जाने का मुख्य और भव्य प्रवेश द्वार है। इसके पास सहायक नदी पालपाला का तट है। यह नदी पूरे साल बहती है और यहां का पानी इतना साफ होता है कि इसमें पड़े छोटे कंकड़ साफ-साफ दिखाई देते हैं। लुलुंग प्रवेश द्वार के आस-पास आपको कई पहाड़ियां नज़र आएंगी। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

देवग्राम की क्या महत्ता? 

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मयूरभंज में देवग्राम नाम का एक प्राचीन और लोकप्रिय गांव है। यह सोनो नदी के तट पर स्थित है। यहां आप कई प्राचीन मंदिरों के खंडहरों को देख सकती हैं जिसमें भगवान शिव, भगवान गणेश और देवी पार्वती के बहुत से मंदिर शामिल है। आज भी इस जगह पर पूरी श्रद्धा के साथ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। यह बारीपाड़ा से 50 किलोमीटर दूर है और आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ यहां पिकनिक मनाने आ सकती हैं।

इन स्थानों के अलावा आपको यहां बैद्यनाथ मंदिर भी देखने को मिलेगा। यह बारीपाड़ा से लगभग 40 किमी दूर स्थित है। अगर आपको प्राकृतिक दृश्य पसंद हैं तो मयूरभंज आपका मन मोह लेगा। यह स्थान आपको प्रकृति के साथ-साथ आध्यात्मिक अनुभव भी दिलाएगा।

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(Image Credit: Wikipedia.com, indiarailinfo.com, Shutterstock.com, Unplash.com)