सबसे पहले तो गांधी जयंती की आप सभी को बधाई। कुछ समय पहले हमारे यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक खास मिशन शुरू किया था और वो था 'स्वच्छ भारत अभियान', इस मिशन के दौरान पूरे भारत में ये संदेश गया था कि उन्हें अपने आस-पास सफाई रखनी है और साथ ही साथ प्रदूषण कम करने के बारे में भी सोचना है। यकीनन साफ-सफाई बहुत जरूरी है, लेकिन इसे लिए लोगों को जागरुक करने की शुरुआत अब हुई है। पर यकीन मानिए बहुत पहले से एक गांव है जो न सिर्फ भारत का बल्कि एशिया के सबसे साफ गांव के रूप में मश्हूर है। ये गांव स्वच्छ भारत की मिसाल है। ये गांव है मेघालय की ईस्ट खासी हिल्स में बसा मॉलिनॉन्ग (Mawlynnong ) 

तो चलिए आज बात करते हैं इस खास गांव की जो अपने आप में सबसे अलग है। इस गांव की खासियत यही है कि इसे 'God's own garden' यानी भगवान का बागीचा बोला जाता है। ये कई सालों से अपनी सफाई के लिए बहुत प्रसिद्ध है और यहां आने वाले लोगों को इसका अहसास हो जाता है। यहां लाइव रूट ब्रिज यानी खुद पेड़ों की जड़ों से बनाए गए ब्रिज मौजूद हैं। ये ब्रिज काफी अच्छे हैं और देश-विदेश से लोग इन्हें देखने आते हैं। ये बाकायदा ट्रेकिंग के लिए खास है और यहां प्रकृति प्रेमी आते हैं।  

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1. साफ सफाई और 0 प्लास्टिक का इस्तेमाल- 

आपने अभी कुछ दिन पहले ही ये बात सुनी होगी कि भारत में 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से सिंगल यूज प्लास्टिक अब इस्तेमाल नहीं हो रही है। इसमें 6 तरह का सामान है जो बैन हो रहा है। इस खबर से Mawlynnong के लोगों को कोई समस्या नहीं हुई होगी क्योंकि यहां वैसे भी प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होता है। यहां लोग अपने आस-पास बांस की बनी हुई डस्टबीन का इस्तेमाल करते हैं। सामान ले जाने के लिए कपड़ों से बने थैलों का इस्तेमाल करते हैं और साथ ही साथ अगर किसी टूरिस्ट ने कुछ फेंक दिया है तो लोग खुद ही सफाई करते हैं। यहां बच्चे भी इस बात का ध्यान रखते हैं कि यहां किसी भी तरह का कचरा नहीं फेंकना है।  

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2. 100% लोग हैं शिक्षित- 

अगर आपको लगता है कि मेघालय में दूर दराज की जगह रहने वाले लोग इतने पढ़े-लिखे नहीं होंगे तो ये आपकी गलतफहमी है। ये एक आदर्श टूरिस्ट डेस्टिनेशन होने के साथ-साथ आदर्श गांव भी है। यहां पर लोग बढ़िया अंग्रेजी बोल सकते हैं। यहां तक कि वो इतने सजग हैं कि अपने घर बार का कचरा एक गड्ढे में डालकर उसकी खाद बनाते हैं और पेड़ों के लिए इस्तेमाल करते हैं। अब सोचिए यहां के लोग कितने एडवांस हैं।  

3. खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन-  

अगर मैं बात करूं यहां कि खूबसूरती की तो ये जगह बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है और Mawlynnong में झरना, ट्रेक, लिविंग रूट ब्रिज, Dawki नदी बहुत ही चर्चित हैं। नदी का पानी इतना साफ है कि यहां नाव भी अगर चलती है तो ऐसा लगता है कि वो पानी में नहीं चल रही बल्कि हवा में उड़ रही हो। एडवेंचर टूरिज्म के लिए भी ये बहुत खास जगह है। स्काई व्यू भी एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है यहां। ये गांव भारत-बंगलादेश बॉर्डर पर स्थित है और यहां बहुत ही अच्छे व्यू मिल जाएंगे देखने के लिए। इसी के साथ यहां की एंट्री टिकट बस 10 रुपए प्रति व्यक्ति है। यहां प्रकृतिक सुंदरता भी बहुत है। यहां पर आपको रंग-बिरंगे फूलों के कई गार्डन मिलेंगे। 

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4. पिता नहीं मां का सरनेम मिलता है बच्चों को- 

Mawlynnong वाकई एक आदर्श गांव है। यहां जो लोग रहते हैं वो चर्चित खासी जनजाति के हैं। ये लोग समाज के पितृसत्ता के नियमों को नहीं मानते हैं। यहां बच्चों को पिता का नहीं बल्कि मां का सरनेम मिलता है और जो संपत्ति आदि होती है वो मां के जरिए घर की सबसे छोटी बेटी को दिया जाता है। यहां महिला सशक्तिकरण की मिसाल मिल जाएगी। 

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5. कैसे जाएं और क्या खाएं-

अगर आप नॉर्थ ईस्ट ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो यहां जा सकते हैं। यहां शिलॉन्ग में Umrai Airport सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है और उसके बाद आप वहां से प्राइवेट कैब कर सकते हैं। जहां तक खाने की बात है तो यहां का स्थानीय खाना बहुत रोचक है। यहां सब कुछ ऑर्गेनिक और हेल्दी है। सब्जियां घरों में उगाई जाती है। अगर मीट खा रहे हैं तो जानवरों को भी जो खाना खिलाया जाता है वो ऑर्गेनिक होता है यानी मीट की क्वालिटी काफी अच्छी होगी। इसी के साथ शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का खाना मिल सकता है। यहां पर केले के फूल की सबजी बहुत अच्छी है, मीट खाते हैं तो जादोह खा सकते हैं जो मीट और चावल से बनी डिश है। इसी के साथ, वेजिटेरियन लोगों के लिए टुंग्रीमबाई जो खमीर उठाई गई सोयाबीन, बांस की पत्ती और स्थानीय मसालों से मिलकर बनाई जाती है।