सफेद बालों की समस्या सभी को बड़ी अजीब लगती है। वैसे तो अब Salt and pepper look का फैशन धीरे-धीरे आ रहा है, लेकिन फिर भी पहली बार जब लोगों के सफेद बाल होने लगते हैं तो उन्हें थोड़ा बुरा तो लगता ही है। ये वाजिब सी बात है। कई लोगों को तो 20 साल की उम्र से ही सफेद बालों की समस्या होने लगती है और कई के साथ ये 30 साल की उम्र के बाद शुरू होती है। पर इसे लेकर कई लोगों को बहुत सी गलत बातों पर यकीन होता है। 

सफेद बालों की परेशानी से जुड़े मिथकों पर यकीन करने वाले लोग न जाने क्या-क्या सच मानते हैं। तो चलिए आज बात करते हैं इसी बारे में।  

1. मिथक: एक बाल तोड़ने से और ज्यादा सफेद बाल हो जाते हैं 

ये एक ऐसा मिथक है जिसे लगभग हर कोई मानता है। एक सफेद बाल तोड़ो तो और ज्यादा सफेद बाल होने लगते हैं। ये सही नहीं है। इसके बारे में बाकायदा रिसर्च की गई है और कॉस्मेटिक साइंटिस्ट और ऑथर रैंडी श्चेउलर (Randy Scheuller) ने कई जर्नल में लिखा है कि एक बाल से दूसरे बालों पर असर नहीं पड़ता। हां, पर ये समस्या हो सकती है कि अगर आप बार-बार सफेद बाल तोड़ेंगे तो हो सकता है कि बालों के फॉलिकल डैमेज हो जाएं और दूसरा बाल फिर आए ही नहीं।  

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2. मिथक: एक साथ सारे बाल सफेद हो सकते हैं 

ऐसा बिलकुल सही नहीं है। इतना बड़ा बदलाव सिर्फ तभी हो सकता है जब कोई बीमारी हो। नहीं तो ऐसा नहीं होगा। सफेद बाल इसलिए होते हैं क्योंकि धीरे-धीरे उनका पिगमेंट खत्म होता है। एक बाल टूटता है फिर दूसरा उससे हल्के रंग का आता है फिर तीसरा और फिर जब पिगमेंट बिलकुल ही खत्म होने लगता है तब धीरे-धीरे बाल जड़ों से सफेद होने लगते हैं। ये सब एक साथ नहीं होता इस प्रोसेस में काफी समय लगता है।  

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3. मिथक: डर के कारण बाल सफेद होते हैं 

ये तो बिलकुल ही गलत है। डर के कारण बाल सफेद नहीं होते। भले ही किसी कार्टून फिल्म में कितना भी दिखाया जाए, लेकिन ऐसा सच नहीं है। हां, डर के कारण चेहरे पर फर्क पड़ता है, लेकिन कोई हॉरर फिल्म आपके बालों को सफेद नहीं कर सकती। इंसान कितना भी ज्यादा क्यों न डर जाए उसका असर दिल पर हो सकता है, उसका असर चेहरे पर हो सकता है, लेकिन बालों पर नहीं हो सकता है।  

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4. मिथक: बालों को रंगने से उनका पिगमेंट जल्दी खत्म होता है 

ये सही है कि ज्यादा हेयरकलर लगाने से बाल डैमेज हो सकते हैं, लेकिन वो उनके टूटने आदि के कारण होगा, उनकी क्वालिटी खराब होगी, लेकिन वो सफेद नहीं होने लगेंगे। इससे बाल ड्राई हो सकते हैं, लेकिन सफेद बिलकुल नहीं होंगे। हेयर फॉलिकल का पिगमेंट जब तक कम नहीं होता तब तक बालों का रंग नहीं बदलेगा। तो आप चिंता छोड़ दीजिए और रंग करवाने का मन है तो वो करवा सकती हैं।  

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5. मिथक: बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेने से भी बाल सफेद होते हैं 

चिंता चिता के समान है ये कहावत मैं बचपन से ही सुनती आ रही हूं। लेकिन इसकी वजह से बाल सफेद हों ऐसा नहीं हो सकता है। स्ट्रेस से बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है, लेकिन इससे आपके बाल सफेद नहीं हो सकते हैं। बालों के डैमेज होने को लेकर यकीनन स्ट्रेस जिम्मेदार होता है, लेकिन कई रिसर्च ये कहती हैं कि बालों के पिगमेंट को लेकर इसका काफी कम हाथ होता है। 

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6. मिथक: उम्र की वजह से बाल सफेद होते हैं लाइफस्टाइल कैसी भी हो

नहीं ये बिलकुल सही नहीं है। लाइफस्टाइल जैसे सिगरेट, शराब, ड्रग्स आदि का असर पड़ सकता है। यही नहीं अगर शरीर में कुछ विटामिन की कमी है तो भी असर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर अगर शरीर में विटामिन B12 की कमी है तो बालों के पिगमेंट पर असर पड़ेगा और बाल सफेद होने की समस्या हो सकती है। 2013 की एक स्टडी बताती है कि स्मोकिंग और बालों के सफेद होने में लिंक है।