कोरोना वायरस अब पूरी दुनिया पर अपना असर दिखा रहा है और आलम ये है कि अगर लोग सचेत नहीं हुए तो दुनिया भर में इसके और भी ज्यादा खराब आंकड़े देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में उन लोगों को बहुत समस्या हो रही है जिनके छोटे बच्चे हैं। कई देश लॉक डाउन में हैं। खुद भारत में भी लॉकडाउन हो गया है और 21 दिन तक किसी को भी बाहर नहीं निकलना है। 25 मार्च से शुरू हुआ ये लॉकडाउन 14 अप्रैल तक चलेगा। ऐसे में अगर आपके घर में कोई छोटा बच्चा है और उसे ब्रेस्टफीडिंग करवाई जा रही है तो लोगों का डरा स्वाभाविक है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक महिलाएं जिन्हें कोरोना वायरस संक्रमण हो गया है और वो ब्रेस्टफीडिंग करवाती हैं वो सही तरीके के प्रोटेक्शन के साथ बच्चों को ब्रेस्टफीड करवा सकती हैं।

WHO ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर ये लिखा है कि ब्रेस्टफीडिंग बच्चे के लिए बहुत जरूरी है और ये अन्य कई गंभीर बीमारियों से बच्चों को बचाती हैं। अगर कोई महिला कोरोना वायरस की चपेट में है तो उसे WHO द्वारा निर्धारित प्रोटेक्शन लेने होंगे। अगर कोई महिला चाहती है कि वो कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद भी अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करवाए तो वो जरूर करवाए।

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बच्चों को ब्रेस्टफीड करवाते समय क्या ध्यान रखना है?

WHO के मुताबिक जो भी महिला कोरोना वायरस संक्रमित है और अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करवाना चाहती है उसे कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा।

1. हमेशा मास्क पहन कर रहना होगा, साथ ही साथ सभी तरह की सांस लेने वाली हाईजीन का पालन करना होगा।
2. अपने बच्चे को छूने से पहले हाथ जरूर धो लें। ये हर बार करना है।
3. पूरे घर को हर थोड़ी देर में साफ करने की जरूरत पड़ती है, कम से कम उन जगहों पर जहां बच्चा जाता है वहां तो होती ही है। इसलिए उन्हें साफ रखें। हर जगह को डिसइन्फेक्ट करना जरूरी है।

COVID-19 के दौर में WHO की ब्रेस्टफीडिंग टिप्स-

अगर कोई महिला बहुत ज्यादा बीमार है और वो बच्चे को ब्रेस्टफीड नहीं करवा पा रही है तो उसके लिए भी WHO ने कुछ तरीके बताए हैं।

who guidelines on breastfeeding

1. एक्सप्रेसिंग मिल्क-

एक्सप्रेसिंग मिल्क यानी मां का दूध जो किनी न किसी तरह से वो बच्चे तक पहुंचाए। सीधे स्तनपान से नहीं बल्कि उसे बाहर निकाल कर। मां का दूध स्टोर किया जाता है और वो बच्चे को पिलाया जाता है बाद में जब भी जरूरत हो। मां अपने हाथों से या ब्रेस्ट पम्प की मदद से ये काम कर सकती है। ब्रेस्ट पम्प खास तौर पर ब्रेस्टमिल्क निकालने के लिए ही बनाया गया है।

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2. रिलैक्टेशन-

अगर कोरोना वायरस से संक्रमित महिला ब्रेस्टफीड करवाने में पूरी तरह से असमर्थ है तो वो रिलैक्टेशन जैसा प्रोसेस चुन सकती है। ये एक प्रोसेस है जिसमें मां कुछ समय के लिए बच्चे को दूध पिलाना बंद कर देती है। उसके बाद वापस उसे दूध पिलाना शुरू कर देती है।

3. डोनर ह्यूमन मिल्क-

American Pregnancy Association के डेटा के मुताबिक डोनेट किया हुआ ब्रेस्टमिल्क भी सुरक्षित होता है। ये उन माओं से लाया जाता है जो अपने बच्चे को दूध पिलाने के बाद भी ब्रेस्टमिल्क पम्प करती हैं। दूध का हर कंटेनर बैक्टीरिया के लिए टेस्ट किया जाता है। उसके बाद दूध का पॉश्चुराइजेशन होता है और उसके बाद दूध बच्चे को पिलाया जाता है।

अगर कोई कोरोना वायरस संक्रमित महिला है तो उसे अपने बच्चे को सावधानी से उठाना होगा। साथ ही साथ, पूरे घर का बार-बार सैनिटाइजेशन काफी जरूरी है क्योंकि ऐसे में बच्चे को भी इस संक्रमण का खतरा है।

प्रेग्नेंट महिलाएं क्या करें-

प्रेग्नेंट महिलाओं को भी इस वक्त बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि वो लगातार अपने हाथ धोती रहें। साथ ही साथ सांस लेने से जुड़ी सभी तरह की हाईजीन को फॉलो करना है। अपने हाथ, नाक, मुंह छूने से बचना चाहिए।

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प्रेग्नेंट महिलाएं फॉलो करें ये टिप्स-

- दूसरों से दूरी बनाए रखें
- छींकते या खांसते समय टिशू या कोहनी का इस्तेमाल करें। सीधे हाथों से मुंह को न ढंकें। साथ ही साथ, तुरंत टिशू को हटा दें और हाथ धो लें
- अगर आपको बुखार, सर्दी या खांसी जैसा कुछ हो रहा है तो तुरंत ही मेडिकल एडवाइस लें और देर न करें।

इस तरह आप अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं। कोरोना वायरस पर हरजिंदगी की तरफ से आपको जागरुक करने वाली जानकारी भी दी जा रही है। ऐसी ही अन्य खबरें पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

All Image Credit: Pinterest and WHO Instagram handle