बॉलीवुड में कई ऐसे क़िस्से हैं, जो हमेशा पर्दे के पीछे दबे रहते हैं। यहां हर वक़्त सितारे बनते हैं और डूबते हैं, किसी को कामयाबी इस क़दर मिलती है कि लोग सालों तक उस शख़्स का नाम नहीं भूल पाते हैं। वहीं हिंदी सिनेमा में कई ऐसे निर्देशक रहे हैं जिन्होंने ना सिर्फ़ एक्टर्स की क़िस्मत को बदल डाला बल्कि उन्हें उस सदी का सितारा भी बनाया। उन्हीं में से एक यश चोपड़ा भी थे, जिन्हें रोमांटिक फ़िल्मों का जादूगर कहा जाता है। यही नहीं वह यश चोपड़ा ही थे, जिनकी वजह से अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' और शाहरूख खान को 'किंग ऑफ रोमांस' कहा जाने लगा।

हालांकि यश चोपड़ा के जीवन में एक वक़्त ऐसा भी आया, जब उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ा। नौबत यह थी कि वह अपना स्टूडियो बेच कर टी-सीरीज़ के साथ शॉर्ट फ़िल्म बनाने की प्लान बना रहे थे। यशराज फ़िल्म्स बंद होने के कगार पर था और लगातार फ़्लॉप फ़िल्में देने की वजह से उन्हें लगने लगा कि अब उनका करियर भी डूबने वाला है। विजय, और त्रिशूल जैसी फ़िल्में फ़्लॉप होने के बाद यश राज ने सोचा कि क्यों ना एक बार आख़िरी कोशिश की जाए।

यश चोपड़ा के करियर की टर्निंग प्वाइंट बनी फ़िल्म 'चांदनी'

chandni film

लगातार फ़्लॉप फ़िल्में देने के बाद यश चोपड़ा ने आख़िरी कोशिश के तौर पर चांदनी बनाने का सोचा। इसके लिए वह ऋषि कपूर से मिले और उन्हें बताया कि वह एक फ़िल्म बनाना चाहते हैं, जिसमें हीरोइन सफ़ेद साड़ी में बेहद ख़ूबसूरत लग रही है और उसका नाम चांदनी है। ऋषि कपूर तैयार हो जाते हैं, और कहते हैं कि ठीक है फ़िल्म करूंगा, लेकिन इससे पहले मैं आपको एक फ़िल्म दिखाना चाहता हूं। इसके बाद ऋषि कपूर ने उन्हें एक हॉलीवुड फ़िल्म दिखाई जिसमें एक्टर के पैरालाइज्ड हो जाने की वजह से वह घरवालों से दूर हो जाता है। फ़िल्म देखने के बाद यश चोपड़ा ने इस हिस्से को चांदनी में जोड़ा। फ़िल्म चांदनी यश चोपड़ा की आख़िरी कोशिश थी, इसलिए उन्होंने पिछली फ़्लॉप फ़िल्मों में जो ग़लतियां की थीं, वह उसे दोहराना नहीं चाहते थे। फ़िल्म चांदनी में कॉस्ट्यूम्स से लेकर कहानी तक पर उनकी पूरी नज़र थी। यही नहीं यश चोपड़ा ने ख़ुद ही फ़ाइनल किया कि श्रीदेवी किस दिन कौन सा आउटफ़िट पहनेंगी। इसके लिए उन्होंने पूरा एक दिन रखा और उस दिन श्रीदेवी ने 50 से ज़्यादा आउटफ़िट्स पहन कर देखे। यही नहीं तस्वीरें क्लिक होने के दौरान ख़ुद यश चोपड़ा भी पूरे दिन वहां बैठे रहे।

इसे भी पढ़ें: साथ में फ़ोटो खिंचवाने से पहले मिलिंद सोमन ने महिला से लगवाए 10 पुशअप्स, देखें दिलचस्प वीडियो

यश चोपड़ा की डायरी देखकर हैरान हो गए थे ऋषि कपूर

yash chopra film

चांदनी बनने से पहले यश चोपड़ा की कई फ़िल्में फ़्लॉप रहीं थीं। ऐसे में फ़िल्म चांदनी की शूटिंग के दौरान वह काफ़ी तनाव में थे, उन्हें डर था कि अगर यह फ़िल्म नहीं चली तो उन्हें यशराज फ़िल्म्स को बंद करना होगा। शूटिंग के दौरान उन्होंने ऋषि कपूर को अपने केबिन में बुलाया और बताया कि अगर यह फ़िल्म नहीं चली तो यशराज फ़िल्म्स बंद करना होगा और गुलशन कुमार की टी-सीरीज़ के साथ मिलकर शॉर्ट फ़िल्में बनानी पड़ेंगी। जिसके लिए उनकी बात भी हो गई है। इसके बाद 'चांदनी' की शूटिंग पूरी हुई और फ़िल्म बनकर तैयार हो गई, लेकिन प्रीमियर पर कोई ख़ास रौनक़ देखने को नहीं मिली। उम्मीद की जाने लगी कि यश चोपड़ा की यह फ़िल्म भी नहीं चलेगी। वहीं प्रीमियर शुरू होने के ठीक पहले ऋषि कपूर यश चोपड़ा से मिलने गए। वहां यश चोपड़ा डायरी में कुछ लिख रहे थे, ऋषि जैसे ही बैठते हैं तभी यश चोपड़ा उठकर बाथरूम की तरफ़ चले जाते हैं। उनके जाने के बाद ऋषि कपूर उनकी डायरी में झांकने की कोशिश करते हैं। तभी उन्होंने देखा कि पूरी डायरी में यश चोपड़ा ने एक ही बात लिखी है- हे ईश्वर मेरी मदद कर। यह देखने के बाद ऋषि कपूर दंग रह गए। हालांकि फिल्म जब रिलीज हुई तो कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उम्मीद यश चोपड़ा ने भी नहीं की थी। फिल्म ना सिर्फ हिट हुई बल्कि सुपरहिट साबित हुई।

इसे भी पढ़ें: रोचक है मंदाकिनी से जुड़ा ये क़िस्सा, जानिए एक्टर कुमार गौरव से लिया था किस बात का बदला

Recommended Video

'चांदनी' ने ऋषि कपूर और विनोद खन्ना के करियर को भी डूबने से बचाया

chandni age

फ़िल्म को लेकर स्क्रिप्ट तैयार हो रही थी, तभी चांदनी के रोल के लिए यश चोपड़ा को श्रीदेवी का ख़्याल आया। यश चोपड़ा चाहते तो इस फ़िल्म के लिए श्रीदेवी को मुंबई बुला सकते थे, लेकन वह ख़ुद चेन्नई गए और श्रीदेवी को इसकी कहानी सुनाई। यही वजह थी कि श्रीदेवी उनका काफ़ी सम्मान करती थीं। श्रीदेवी के साथ इस फ़िल्म के लिए यश चोपड़ा ने ऋषि कपूर और विनोद खन्ना को भी कास्ट किया था। उस वक़्त दोनों का करियर डगमगा रहा था। दरअसल चांदनी से पहले ऋषि कपूर ने लगातार 10 फ़िल्में फ़्लॉप दी थीं, ऐसे में अगर चांदनी हिट नहीं होती तो उन्हें 11वीं फ़िल्म के फ़्लॉप होने का धक्का लग सकता था। ऋषि कपूर की तरह विनोद खन्ना को भी चांदनी ने एक नया जीवन दान दिया था। ओशो के आश्रम से लौटने के बाद साल 1988 और 1987 में कुछ फ़िल्में उन्होंने दी थीं, जो बॉक्स-ऑफ़िस पर कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाईं, ऐसे में फ़िल्म चांदनी वापसी के बाद उनकी पहली सुपरहिट फ़िल्म साबित हुई थी।

अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।