खाना खाने के लिए सिर्फ दाएं हाथ की ही इस्‍तेमाल क्‍यों किया जाता है, बांए हाथ का इस्‍तेमाल क्‍यों नहीं किया जाता। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि हमें किस हाथ से खाना चाहिए। कई बार जब कोई बांए हाथ का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने वाला इंसान बांए से खाना खाता है तो बड़े-बुर्जुग उसे टोक देते है। लेकिन हमें समझ नहीं आता की उन्‍होंने हमें क्‍यों टोका। हमें ऐसा लगता है कि शायद यही नियम है। लेकिन हम कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते की ऐसा नियम क्‍यों है, क्‍यों हमें ऐसा करने के लिए कहा जाता है। कई बार हमारे दिमाग में यह सवाल आता है लेकिन सही जवाब नहीं मिल पाता। तो आइए आज हम आपको बता रहे है इसके पीछे का सठीक कारण।

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हमारे समाज में भोजन से जुड़ी कई मान्यताएं है और लोग सदियों से इन मान्यताओं को मानते चले आ रहे है। जैसे कि खाना कभी भी खड़े होकर नहीं खाना चाहिए, हमेशा बैठकर खाना चाहिए इत्‍यादी। भोजन हमारे दिनचर्या में शामिल है और भोजन करने से हमें ऊर्जा मिलती है। वहीं, हमारे समाज में भोजन से जुड़ी इन मान्यताएं को ज्‍यादातर लोग मानते भी है।

हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यताओं में से एक मान्यता ये भी है कि बांए हाथ से खाना नहीं खाना चाहिए और हमेशा दाएं हाथ से ही भोजन करना चाहिए। वैसे दाएं हाथ से ही भोजन करने के पीछे यह मान्‍यता है कि दाया हाथ सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कारता है। हिंदू धर्म में सीधे हाथ से खाने पर जोर इसलिए दिया जाता है क्योंकि ये माना जाता है कि जब हम कोई शुभ कार्य करते है तो उससे हमें कोई सकारत्मक प्रभाव दिखाई देता है।

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इसलिए ऐसे काम दाएं हाथ से ही करने चाहिए। इस वजह से पूजा-पाठ, हवन करते समय हमें दाएं हाथ इस्तेमाल करने को कहा जाता है। इसी तरह हमारे भोजन करने के जुडा तथ्‍य यह है कि अगर हम दाएं हाथ से भोजन करेंगे तो हमें खाने से सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

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वहीं, बाएं हाथ के बारे में यह मान्‍यता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए बाएं हाथ से खाना खाने के लिए मना किया जाता है। साथ ही, बाएं हाथ से भोजन करना शुभ नहीं माना जाता है। तो आप कह सकते हैं कि हिंदू धर्म में किसी भी काम, परंपरा के पीछे एक मकसद होता है तो कहीं एक वैज्ञानिक कारण होता है। इसके पीछे भी जो एक कारण है वो सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक ऊर्जा का।

Photo courtesy- (Healthline, YouTube, Little Bites of Beauty, YouTube)